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Tuesday , 17 July 2018
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राज्यसभा चुनाव : मोदी-शाह के घर में कांग्रेस ने बाजी मारी

InShot_20170809_120028586गांधीनगर/ अहमदाबाद। गुजरात की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव में कांग्रेस के अहमद पटेल, बीजेपी के अमित शाह और स्मृति ईरानी ने जीत हासिल की। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी। निर्वाचन अधिकारी की ओर से परिणाम घोषित करने से पहले वोटिंग विवाद को लेकर करीब 11 घंटे तक काउंटिंग रुकी रही। देर रात इलेक्शन कमीशन ने कांग्रेस की मांग पर कांग्रेस के दो एमएलए के वोट रद्द किए, उसके बाद फिर मतगणना शुरू हुई। घोषित परिणाम में कांग्रेस के अहमद पटेल अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, वहीं बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह और स्मृति ईरानी भी राज्यसभा के लिए चुन लिए गए। पटेल ने बीजेपी कैंडिडेट बलवंत सिंह को मात दी। पटेल को 44 तो बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले। वहीं, शाह और ईरानी को 46-46 वोट मिले। पंजाब विधानसभा चुनावों के गुजरात में राज्यसभा चुनावों में मिली सफलता ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कद में इजाफा हुआ है,हालांकि गहलोत के समक्ष चुनौती अभी कम नहीं है,क्योंकि इस वर्ष गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं।
pixlr_20170808083603045_20170809074457430_20170809084822181ये रहा गणित : गुजरात से राज्यसभा के लिए हुए मतदान में 176 विधायकों ने वोट डाले। इस हिसाब से अहमद पटेल को जीत के लिए 45 वोट चाहिए थे। रात को कांग्रेस की शिकायत के बाद इलेक्शन कमीशन ने कांग्रेस के दो विधायकों के वोट रद्द कर दिए।
इसके बाद कुल विधायकों की संख्या घटकर 174 हो गई। अब जीत के लिए अहमद पटेल को 44 वोट की जरूरत थी, जो उन्हें मिल गए। नियमों के मुताबिक एक कैंडिडेट को जीत के लिए कुल वोट का एक चौथाई वोट जरूरी होता है।
पहले का समीकरण : गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं। 6 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी है। सभी विधानसभा से भी त्यागपत्र दे चुके हैं। इसके बाद असेंबली में 176 विधायक बचे । बीजेपी के 121 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के पास 51 विधायक हैं। इनमें से 6 विधायक बागी हो गए थे।
आपत्ति पर दो विधायकों के वोट रद्द : कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि शंकर सिंह gt.e_20170809080929134_20170809083656796वाघेला गुट के दो विधायक राघवजी पटेल और भोलाभाई गोहिल ने अपना वोट डालते वक्त उन्हें बीजेपी एजेंट को दिखाया। इस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और वोट कैंसल करने की मांग की।
निर्वाचन नियमानुसार क्या है नियम : द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 का रूल 39 कहता है कि वोट देने वाले के लिए पोलिंग स्टेशन पर सीक्रेसी रखनी जरूरी है। अगर कोई इसका वॉयलेशन करता है तो प्रिसाइडिंग ऑफिसर या पोलिंग ऑफिसर उस वोटर से बैलेट पेपर वापस ले लेता है और चुनाव आयोग शिकायत और साक्ष्य होने पर रद्द भी कर सकता है।
करीब 11 घंटे रुकी रही मतगणना : वोटिंग मंगलवार की सुबह 9 बजे शुरू हुई और 2 बजे के करीब खत्म हो गई। मतगणना शाम 4 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन कांग्रेस नेता वोटिंग विवाद पर शाम 6:30 बजे इलेक्शन कमीशन के पहुंच गए। दो विधायकों के मत रद्द करने के बाद में रात करीब 1:30 बजे मतगणना शुरू हुई।
इन विधायकों ने क्रांस वोटिंग की : कांग्रेस के 7 विधायकोंं ने क्रॉस वोटिंग की। इनमें एक विधायक करशमी पटेल भी था जिसे 44 विधायकों के साथ कुछ दिन के लिए बेंगलुरु शिफ्ट किया गया था। जिन दो विधायकों के वोट रद्द हुए हैं वे इन्हीं विधायकों में शामिल हैं।
क्रांस वोटिंग वाले विधायक : 1. राघवजी पटेल, 2. भोलाभाई गोहिल, 3. धमेंद्र सिंह जडेजा, 4. करम सिंह पटेल, 5. महेंद्र सिंह वाघेला, 6. सीके रावल, 7. अमित चौधरी।
भाजपा ने भी नहीं होने दी मतगणना : देर रात इलेक्शन कमीशन ने काउंटिंग शुरू करने के आदेश तो दिए लेकिन बीजेपी ने आपत्ति जताई। उसका आरोप है कि कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने वोटर्स पर दबाव डाला था।
इलेक्शन कमीशन के किस-किस नेता ने संभाला मोर्चा : वोटिंग पर विवाद बढऩे के बाद कांग्रेस और बीजेपी के नेता तीन-तीन बार इलेक्शन कमीशन के ऑफि स पहुंचे। कांग्रेस का मोर्चा पी चिदंबरम, रणदीप सुरजेवाला, राजीव शुक्ला, आरपीएन सिंह और अशोक गहलोत ने संभाला, वहीं भाजपा की कमान 6 केन्द्रीय मंत्रियों अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, एमए नकवी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान के हाथ रहीं। कांग्रेस दो विधायकों के वोट रद्द करने की मांग कर रही थी जबकि बीजेपी फौरन काउंटिंग शुरू करने की मांग पर अड़ी थी।
⇒ एनसीपी के एक विधायक ने बीजेपी और दूसरे ने कांग्रेस को वोट दिया
♦ नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि राज्य में पार्टी के दो विधायक थे। इनमें से एक ने कांग्रेस को और दूसरे ने बीजेपी को वोट दिया है। इसमें बताया गया कि पार्टी ने व्हिप जारी कर कहा था कि अहमद पटेल को वोट दें। लेकिन एक विधायक ने इसे नहीं माना।
♦ बता दें कि एनसीपी के दो विधायक जयंत पटेल और कंधाल जाडेजा हैं। जेडीयू के एक विधायक ने पटेल को वोट दिया।
⇒ कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं- वाघेला
वोटिंग के बाद वाघेला ने कहा था, ‘जब कांग्रेस जीतने वाली ही नहीं है तो बिना मतलब कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं है। हमने अहमद पटेल को वोट नहीं दिया। बीजेपी के तीनों कैंडिडेट जीतेंगे, कांग्रेस के कैंडिडेट की संभावना नहीं है।अपनी पुरानी पार्टी (कांग्रेस) को बहुत समझाया था और 21 जुलाई को अपने जन्मदिन पर इसे मुक्त भी कर दिया था। मैंने अपना वोट अपने अजीज अहमद भाई को नहीं दिया। इसका मुझे अफसोस है, क्योंकि उनके समथज़्न में 40 विधायक भी नहीं है। जो 44 लोग उनके साथ थे, उनमें भी 4-5 उन्हें वोट नहीं करने वाले। कांग्रेस को पटेल जैसे बड़े नेता की प्रतिष्ठा के साथ मजाक नहीं करना चाहिए था।’

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