authentic sports jerseys cheap
cheap authentic stitched nfl jerseys
Monday , 25 June 2018
Breaking News

आज होगा तय, निजता का अधिकार ‘मौलिक अधिकार’ है या नहीं – BBC हिंदी

आधार कार्डइमेज कॉपीरइट
Getty Images

Image caption

आधार कार्ड को ज़रूरी बनाने के केंद्र के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

आधार स्कीम को लागू करने को लेकर उठे निजता के अधिकार के सवाल पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर के नेतृत्व वाली नौ जजों की संविधान पीठ इस विवाद पर फैसला देगी कि संविधान के तहत निजता का अधिकार, नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं.

आधार नहीं तो टीबी इलाज के लिए नहीं मिलेगा कैश

‘निजता का अधिकार’ मौलिक अधिकार है या नहीं

माना जा रहा है कि इस फैसले पर ही केंद्र की आधार योजना का भविष्य तय होगा.

अर्थशास्त्री और इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक रितिका खेड़ा इस बात पर हैरानी जताती हैं कि आखिर ये सवाल ही क्यों पैदा हुआ कि निजता का अधिकार, नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं.

इस बारे में उन्होंने बीबीसी से बातचीत की. पढ़िए बातचीत के अंश-

इमेज कॉपीरइट
Getty Images

निजता के अधिकार पर ही सवाल

लोग इस बात पर हैरान हैं कि निजता के सवाल पर, 21वीं सदी में देश में नौ जजों की संविधान पीठ के बैठने की ज़रूरत क्यों पड़ी.

अगर एक लोकतंत्र में निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार नहीं रहता है तो ये किस तरह का लोकतंत्र है.

किसी भी तरह आधार को क़ानूनी तौर पर लागू करने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार के वकीलों ने निजता के अधिकार की मौलिकता पर ही सवाल खड़ा कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में 2015 में सरकारी वकीलों की तरफ़ से तर्क दिया गया कि ये हो सकता है कि आधार लोगों की निजता में दखल देता हो, लेकिन क्या निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है?

सरकार का तर्क था कि इस बारे में कभी भी अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया और संविधान में भी इस बारे में स्पष्ट कुछ लिखा नहीं है.

उस समय इस मामले की सुनवाई तीन जज कर रहे थे. उन्होंने सरकारी वकील की दलील मान ली और इस पर फैसला लेने के लिए मामले को संविधान पीठ के हवाले कर दिया.

तत्कालीन जज जस्टिस जे चेलमेश्वर ने इस मामले की जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया था क्योंकि आधार के लागू होने से बहुत सारे लोगों के जीने के अधिकार पर असर पड़ रहा है.

फिर भी इस मामले को लगभग दो साल हो गये.

सरकारी दलीलें

संविधान पीठ में जब इस पर बहस हो रही थी तो सरकारी वकीलों ने बहुत अजीबो ग़रीब दलीलें दीं.

उनका पहला तर्क था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है ही नहीं.

सरकार की तरफ़ कुछ दूसरे वकील जब बहस में आए तो उन्होंने कहा कि ये मौलिक अधिकार तो है लेकिन ये पूरी तरह निरपेक्ष नहीं है.

सरकार की ओर से सबसे अहम दलील दी गई कि अगर निजता का अधिकार और जीने का अधिकार आमने सामने टकराते हैं तब जीने का अधिकार प्राथमिक होगा.

हालांकि दूसरे पक्ष के वकीलों की दलील दी थी कि ये दोनों अधिकार एक दूसरे में ही निहित हैं, इन्हें अलग नहीं किया जा सकता.

उनका तर्क था कि न तो जीने का अधिकार, बिना निजता के अधिकार के पाया जा सकता है और ना ही निजता का अधिकार, बिना जीने के अधिकार के पाया जा सकता है.

‘निजता का अधिकार संपूर्ण नहीं, कुछ पाबंदी संभव’

कैसे रुकेगी आपके आधार डेटा की चोरी?

इमेज कॉपीरइट
AFP

सरकार का डर

डर ये है कि अगर सुप्रीम कोर्ट निजता के अधिकार को मौलिक मान लेता है तो आधार पर एक सवाल खड़ा हो जाएगा क्योंकि ये निजता के अधिकार में दखल देता है.

सरकार इन दोनों को आमने सामने रख कर रास्ता निकालने की कोशिश कर रही थी.

इमेज कॉपीरइट
Sumit kumar

सरकार आधार को जीने के अधिकार से जोड़कर देख रही है क्योंकि उसका तर्क है कि इसके बिना सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मनरेगा, बुज़ुर्गों की पेंशन स्कीम और अन्य जन कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं चलाए जा सकेंगे.

उसका तर्क है कि आधार से, इन योजनाओं को अच्छी तरह लागू करने में मदद मिलती है.

हालांकि आधार योजना के शुरू होने के पहले से सारी योजनाएं चल रही थीं.

सबसे अहम बात ये है कि ये सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि जिन कल्याणकारी योजनाओं में आधार को लागू किया गया है, वहां लोगों का नुकसान हुआ है. उनका राशन बंद हुआ है, काम का हक़ छिना है.

इमेज कॉपीरइट
Getty Images

निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया तो…

अगर निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना गया तो ये आम जनता के लिए एक बड़ा झटका होगा.

आम नागरिकों के लिए निजता का अधिकार ही एक सुरक्षा है और अगर यही उनसे छिन जाए तो राज्य, जो कि पहले ही लोगों की निजी ज़िंदगी में अधिक से अधिक दखल करना चाहता है, और हावी हो जाएगा.

असल में ये सिर्फ आधार से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि ये हमारे जीने और खुली सोच की आज़ादी का मामला है.

अगर संविधान पीठ अपने फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक मानती है तो फिर ये मामला छोटी पीठ के पास वापस चला जाएगा.

तब जजों के सामने ये सवाल बचेगा कि निजता और आधार के बीच क्या रिश्ता है.

लेकिन निजता के मौलिक अधिकार मान लिए जाने के बाद, आधार परियोजना पर सवाल खड़ा होना तो लाज़िमी है.

इमेज कॉपीरइट
Alok putul

आधार से जनकल्याणकारी योजनाएं ठप

जिस तरह से जनकल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य किया जा रहा है, उससे ये योजनाएं ठप पड़ती जा रही हैं.

गांवों के बुज़ुर्ग लोगों को पिछले अगस्त से पेंशन नहीं मिल रही है. आधार न होने से लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा. गांवों में मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा.

जबकि सरकार प्रचारित कर रही है कि इसकी वजह से जनकल्याणकारी योजनाओं से फर्जी लोग छंट गए, बिचौलियों का सफाया हो गया और सरकार का पैसा बच गया.

असल में आधार नंबर हासिल करने और सबकुछ दुरुस्त होने के बाद भी लोगों को समझ नहीं आ रहा कि कहां ग़लती रह गई.

अगर आधार की अनिवार्यता समाप्त होती है तो आम लोगों को भारी राहत मिलेगी.

ग्राउंड रिपोर्ट: आधार कार्ड होने पर भी झारखंड में नहीं मिल रहा राशन

(रितिका खेड़ा के साथ बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र की बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

About editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*


Authentic Hockey Jerseys
Super Bowl Football Celebration Decorating Ideas
Get Custom Football Jerseys For Your Team- Let Your Passion Show
You Could Never Dream You Get Cheap Mlb Jerseys
Create Your Special Custom Football Jerseys
When You Collect Hockey Jerseys
New Nfl Jerseys - Showing Your Support By Sporting Nfl Jerseys
Who Else Wants A Zero Cost Nfl New Jersey?
Nfl Jerseys From China: Jerseys That Fit To Your Budget
Super Bowl Party Decorations (Video)
cheap jerseys
wholesale jerseys
cheap nfl jerseys
wholesale jerseys
cheap nba jerseys
wholesale nba jerseys
nba jerseys cheap
cheap jerseys