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Wednesday , 27 March 2019
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AAP और कांग्रेस के संभावित गठबंधन में बड़ा पेच, दोनों पार्टियां चाह रही हैं सेम सीटें – Navbharat Times

अतुल माथुर और आलोक के. एन. मिश्रा, नई दिल्ली

दिल्ली में कांग्रेस अभी इस दुविधा से गुजर रही है कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करे या नहीं। लेकिन मुश्किल सिर्फ गठबंधन के लिए सहमति बनाने में ही नहीं है, इससे भी ज्यादा मुश्किल होगा सीटों का बंटवारा। दोनों ही पार्टियों का वोट बैंक एक तरह का है- अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और स्लम एवं रीसेटलमेंट कॉलोनियों में रहने वाले लोग। ऐसे में संभावित गठबंधन में सीटों का बंटवारा बहुत पेंचीदा रहने वाला है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 3:3:1 के फॉर्म्युले पर काम चल रहा है। इसके तहत दोनों ही पार्टियां 3-3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं और एक सीट पर किसी न्यूट्रल शख्स को उतारा जाएगा। हालांकि, उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि किस पार्टी के खाते में कौन-कौन सी 3 सीटें आएंगी, इसे तय करने में बहुत मुश्किल होने वाली है।

एक सूत्र ने बताया कि राजनीतिक गठबंधन के लिए बातचीत में अधीर ने होना और बहुत ज्यादा उत्सुक ने दिखना बहुत जरूरी है, लेकिन AAP ने जिस तरह कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन के लिए छटपटाहट दिखाई है, उससे लगता है कि वह इस कला में अनाड़ी है। अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह कई बार यह बयान दिया कि उन्होंने कांग्रेस को गठबंधन के लिए मनाने के लिए कई बार कोशिशें कीं, इससे बातचीत में कांग्रेस का पलड़ा भारी रह सकता है।

वैसे कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पी. सी. चाको का शुक्रवार को दिया गया बयान काफी अहम है कि बीजेपी का मुकाबला करने के लिए दोनों पार्टियों को साथ आना चाहिए। चाको ने कहा, ‘एमसीडी चुनाव में हम दोनों पार्टियों को 50 पर्सेंट वोट मिले और बीजेपी को 35 पर्सेंट। अगर दोनों मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो जीत निश्चित दिख रही है। कांग्रेस के हित में है कि त्रिकोणीय मुकाबला न हो। बड़े दुश्मन को हराना रणनीति है, इसलिए गठबंधन जरूरी है।’ गठबंधन के बाद सीट शेयरिंग पर चाको का कहना है कि इसमें कोई मुश्किल नहीं है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि यह आसान नहीं होने वाला है।

BJP बड़ी दुश्मन, AAP से अलाइंस जरूरी: चाको

सूत्रों ने बताया कि दोनों ही पार्टियों की निगाह ईस्ट, नॉर्थ ईस्ट और साउथ दिल्ली सीट पर है, जहां उनके वोटबैंक माने-जाने वालों की अच्छी-खासी संख्या है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, ‘अगर हमें 3 सीटें मिलती हैं तो हम निश्चित तौर पर यमुना पर की 2 सीटों- ईस्ट या नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में से किसी एक सीट को चाहेंगे। इसके अलावा नई दिल्ली के साथ-साथ चांदनी चौक या नॉर्थवेस्ट दिल्ली में से एक सीट हम चाहेंगे।’ उन्होंने बताया, ‘हम उन सीटों पर लड़ना चाहते हैं जहां अल्पसंख्यक, पिछड़े और एससी वोटों की अच्छी-खासी तादाद हो।’

नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में करीब 20 प्रतिशत मुस्लिम, 17 प्रतिशत दलित और 14 प्रतिशत पिछड़ी जातियों के वोट हैं। इसी तरह, ईस्ट दिल्ली में 15 प्रतिशत मुस्लिम, 17 प्रतिशत एससी और 22 प्रतिशत पिछड़ी जातियों के वोट हैं। दिल्ली कांग्रेस चीफ शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित जहां ईस्ट दिल्ली से 2 बार- 2004 और 2009 में सांसद रह चुके हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश अग्रवाल चांदनी चौक से 3 बार जीत चुके हैं और 2009 में वह नॉर्थ ईस्ट दिल्ली चले गए, जहां आसान जीत हासिल की। 2014 में कांग्रेस को दिल्ली की किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।

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दिलचस्प बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने अपने 2 सबसे मजबूत नेताओं- आतिशी और दिलीप पांडे को क्रमशः ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से उतारने का ऐलान कर चुकी है। पार्टी इन दोनों में से किसी की भी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए अनिच्छुक होगी। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी को लगता है कि दिलीप पांडे, आतिशी और साउथ दिल्ली से उसके कैंडिडेट राघव चड्ढा की स्थिति बाकी 3 उम्मीदवारों से ज्यादा बेहतर दिख रही है और पार्टी किसी भी कीमत पर इन तीनों सीटों को अपने पास रखना चाहेगी।

नॉर्थ वेस्ट दिल्ली सुरक्षित सीट है जहां एससी (24 प्रतिशत) के अलावा पिछड़ी जातियों (21 प्रतिशत) और मुस्लिम (10 प्रतिशत) वोटों की भी अच्छी खासी संख्या है। इस लोकसभा क्षेत्र में स्लम, अवैध और रीसेटलमेंट कॉलोनियों की सबसे ज्यादा संख्या है। इस वजह से दोनों पार्टियां इस सीट को अपने पास रखने की कोशिश कर सकती हैं।

एक और दिलचस्प बात यह है कि एक सीट ऐसी भी है जहां दोनों पार्टियां चाहती हैं कि वहां दूसरा लड़े। यह सीट है वेस्ट दिल्ली। AAP को जहां अबतक इस सीट से कोई अच्छा दावेदार ही नहीं मिला है, दूसरी तरफ कांग्रेस इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने से इसलिए बचना चाहेगी क्योंकि इसे बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। वेस्ट दिल्ली में सिख (12 प्रतिशत), पंजाबी और खत्री (12 प्रतिशत) और जाट (8 प्रतिशत) की अच्छी-खासी संख्या है।

वैसे, आम आदमी पार्टी के नेता जोर देकर कह रहे हैं कि वे कांग्रेस को 2 से ज्यादा सीट नहीं देना चाहते। AAP के एक नेता ने पूछा, ‘हम उस पार्टी को 3 सीट कैसे दे सकते हैं जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में एक सीट भी नहीं जात पाई थी और 2015 के विधानसभा चुनावों में खाता तक नहीं खोल पाई?’ AAP नेता ने आगे कहा, ‘अगर ज्यादा सीट पाती है और किसी तरह उन्हें जीत जाती है तो इससे वह 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।’

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