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Tuesday , 23 April 2019
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मनोहर पर्रिकर की तस्वीर बगल में रख गोवा के नए सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने संभाला कामकाज – नवभारत टाइम्स

पणजी

देर रात शपथ लेने के बाद गोवा में डॉ. प्रमोद सावंत ने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाल लिया है। वह सीएम की कुर्सी में बैठ गए हैं, लेकिन उनके बगल की कुर्सी पर रखी पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर की तस्वीर ने सभी का ध्यान खींच लिया। इस तस्वीर के कई मायने हैं। दरअसल प्रमोद सावंत ने गोवा में पर्रिकर की विरासत संभाल तो ली है, लेकिन अपने गुरु की जगह वह नहीं लेना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने कार्यालय में अपने लिए अलग कुर्सी मंगवाई जबकि बगल वाली कुर्सी में मनोहर पर्रिकर की तस्वीर रखी। इसी कुर्सी पर कभी मनोहर पर्रिकर ही बैठा करते थे।

एक वजह यह भी है कि सावंत ने पर्रिकर के मातहत ही उन्होंने राजनीति सीखी थी और वह उनकी पसंद भी थे। सावंत उन्हें अपना गुरु मानते हैं और इसलिए वह उनके मार्गदर्शन लेने के लिए उनकी तस्वीर को बगल में रखना चाहते हैं ताकि सीएम दफ्तर में मनोहर पर्रिकर की मौजूदगी का अहसास हमेशा होता रहे। प्रमोद सावंत ने बताया कि चूंकि इस समय 7 दिन का राष्ट्रीय शोक है इसलिए इस दौरान उन्हें बधाई न दी जाए।

‘7 दिन तक बधाई न दें और न स्वागत करें’
उन्होंने कहा, ‘मैं सभी से विनती करता हूं कि कि 7 दिन के राष्ट्रीय शोक के दौरान न ही मुझे बधाई दें और न ही फूलों से स्वागत करें। मेरे साथ दो डेप्युटी सीएम विजय सरदेसाई और सुधिन धवालिकर भी होंगे। इसके अलावा हम बुधवार को फ्लोर टेस्ट के लिए भी जाएंगे।’ 46 वर्षीय सावंत गोवा में बीजेपी के अकेले विधायक हैं, जो आरएसएस काडर से हैं। वह नेतृत्व के लिए किस तरह से पसंदीदा लीडर थे, इस बात को इससे ही समझा जा सकता है कि जब भी पर्रिकर के विकल्प की बात की गई तो उनका नाम प्रमुख रहा।

  
  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर की जिंदगी 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू हुई। सामान्य परिवेश से निकलर उन्होंने आईआईटी मुंबई से शिक्षित होने से लेकर गोवा के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और फिर गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी सांस ली। पर्रिकर की जिंदगी एक आम आदमी के पोस्टर बॉय बनने की कहानी की जबरदस्त मिसाल है। आगे की स्लाइड में देखें उनकी राजनीति और जिंदगी के चमकते और संघर्ष से सफलता तक की कहानी…

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    गोवा के इस दिग्गज राजनेता को राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी सादगी और जीवट के लिए याद किया जाता है। कैंसर की दुर्गम लड़ाई से लड़ते हुए उन्होंने आखिरी सांस ली। जीवन के आखिरी वक्त तक वह सक्रिय रहे और कैंसर से लड़ते हुए मुख्यमंत्री के दायित्व निभाते रहे।

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    गोवा की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पर्रिकर रक्षा मंत्री के तौर पर शामिल हुए। रक्षा मंत्री रहने के दौरान देश के दूर-दराज के इलाकों में भी लोग उनकी सादगी के कारण उन्हें बेहद पसंद करते थे। आधी बांह के ट्रेडमार्क शर्ट-पैंट, चश्मे और सिंपल घड़ी में नजर आनेवाले पर्रिकर की सादगी, लेकिन तकनीक और विज्ञान के लिए दिलचस्पी ने उन्हें देशभर के युवाओं का फैन बना दिया।

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    मनोहर पर्रिकर की पत्नी की भी 2001 में कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उस वक्त पर्रिकर गोवा के सीएम भी थे। हालांकि, इस निजी त्रासदी से ऊबरकर न सिर्फ उन्होंने बतौर सीएम अपना दायित्व निभाया, बल्कि दोनों युवा बेटों की परवरिश भी शानदार तरीके से अकेले ही की।

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    मनोहर पर्रिकर को देश में राजनीति के भविष्य के संकेतों को समझनेवाले के तौर पर भी देखा जाएगा। 2013 में पर्रिकर बीजेपी के पहले अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम उस वक्त बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे किया था। गोवा में बीजेपी की सत्ता में वापसी कराने और गठबंधन के साथ सरकार चलाने के लिए भी बीजेपी आलाकमान ने पर्रिकर पर ही भरोसा किया। 2017 में गोवा चुनाव के बाद बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन पर्रिकर दिल्ली से गोवा पहुंचे और आखिरकार जोड़तोड़ के बाद सरकार बनाने में कामयाब रहे।

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    प्रधानमंत्री मोदी जिन नेताओं पर खासा विश्वास करते थे, उनमें एक मनोहर पर्रिकर भी रहे। पर्रिकर और मोदी के बीच के रिश्तों का समीकरण इससे समझा जा सकता है कि पर्रिकर न सिर्फ उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने पीएम पद के लिए मोदी का नाम बढ़ाया था। वह लगातार राफेल डील को लेकर पीएम का बचाव करते रहे।

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    मनोहर पर्रिकर के बारे में दिलचस्प बात है कि छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे और ईसाई बहुल राज्य गोवा के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। गोवा के लोगों के बीच पर्रिकर को ‘मैन विद प्लान’ के नाम से लोकप्रिय हुए। पर्रिकर जब प्रदेश के विपक्ष के नेता थे तो उनके भाषण न्यू गोवा के सपनों के साथ कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर कठोर तंज कसनेवाले थे। बतौर विपक्षी नेता उनके भाषणों में दूरदर्शिता और जोश था और इसने उन्हें प्रदेश में लोकप्रिय बनाया। सीएम बनने के बाद उन्होंने गोवा में फैले भ्रष्टाचार, अवैध माइनिंग के आरोप में कई कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई की और इसने उन्हें जनता के बीच फैसले लेनेवाला सीएम के तौर पर स्थापित किया।

  • ​आम आदमी के असली 'पोस्टर बॉय' थे मनोहर पर्रिकर

    गोवा के ज्यादातर लोगों की तरह मनोहर पर्रिकर को भी फुटबॉल खेलना काफी पसंद था। एक फुटबॉल टूर्नमेंट के दौरान उन्होंने कहा भी था कि गोवा के लोग अब फुटबॉल को भूल रहे हैं और क्रिकेट खेल रहे हैं। खुद पर्रिकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि राजनीति में आने के बाद वह आईआईटी हॉस्टल की मस्ती और फुटबॉल को मिस करते हैं।

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    बतौर सीएम गोवा में मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल को न्यू गोवा बनाने के उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। पर्रिकर ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों और गोवा में निवेश को बढ़ाने पर काफी जोर दिया था। गोवा के सीएम का कार्यभार 2017 में संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि गोवा हॉलिडे और शूटिंग भर की जगह नहीं है। वह गोवा को निवेश और इनफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देश का अव्वल प्रदेश बनाना चाहते हैं।



बचपन से आरएसएस से संबंध

सावंत गोवा में बिचोलिम तालुका के एक गांव कोटोंबी के रहने वाले हैं। सावंत का बचपन से आरएसएस से संबंध रहा है। आरएसएस की ओर झुकाव के कारण ही हिंदुत्व की विचारधारा के प्रति उनमें समर्पण आया। उनके पिता पांडुरंग सावंत पूर्व जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। वह भारतीय जनसंघ, भारतीय मजदूर संघ के सक्रिय सदस्य थे। बीजेपी के वफादार कार्यकर्ता के तौर पर उनकी पहचान थी।

पढ़ें- गोवा में यहां फंसा था पेच, इसलिए देर रात शपथ



पर्रिकर की पसंद


पर्रिकर के बीमार होने के बाद वह गोवा में सीएम पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे। वह स्वर्गीय पर्रिकर की भी पहली पसंद थे। उन्होंने खुद सीएम पद की शपथ लेने से पहले कहा है कि उनको राजनीति में लेकर पर्रिकर ही आए थे। उन्होंने स्पीकर और सीएम बनने का श्रेय भी पर्रिकर को दिया है। पार्टी के प्रति उनकी वफादारी भी उनकी सीएम पद की दावेदारी की एक वजह थी।

पार्टी के एक सूत्र ने बताया, ‘सावंत पार्टी के प्रति काफी वफादार थे। वह अपनी किसी भी निजी महत्वाकांक्षा से पहले पार्टी को रखते थे। पार्टी को भी एक कम उम्र के ऐसे नेता की जरूरत थी जो अगले 10-15 सालों तक पार्टी का नेतृत्व कर सके। इसके अलावा पर्रिकर की इच्छा थी कि अगला सीएम कोई भी बीजेपी का विधायक ही हो। इन सब चीजों की वजह से माहौल सावंत के पक्ष में हो गया था।’

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