Rajasthan

जब 12 साल की कच्ची उमर में ही शादीशुदा महाराजा को दिल दे बैठीं गायत्री देवी : प्रेम कथा 01

हाइलाइट्स

दो बार लोकसभा की सदस्य रहीं महारानी गायत्री देवी को दुनिया की 10 खूबसूरत औरतों में गिना जाता था
जब वह छोटी थीं तभी उन्हें एक ऐसे शख्स से प्यार हो गया, जिसकी दो शादियां हो चुकी थीं
गायत्री को बचपन से खुली जिंदगी मिली थी. वह टाम बॉय की तरह थीं, हार्स राइडिंग और शिकार से प्यार था

आजादी के बाद दो बार लोकसभा की सदस्य रहीं महारानी गायत्री देवी को दुनिया की 10 खूबसूरत औरतों में गिना जाता था. उनकी खूबसूरती वाकई अप्रतिम थी. वह कूच बिहार राजघराने की राजकुमारी थीं. लंदन में पैदा हुईं. विदेशों में पढ़ी. जब वह छोटी थीं तभी उन्हें एक ऐसे शख्स से प्यार हो गया, जिसकी दो शादियां हो चुकी थीं. अजीब प्रेम कहानी थी आयेशा कही जाने वाली महारानी गायत्री देवी. जो आपातकाल में गिरफ्तार की गईं. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी उनकी अदावत के काफी चर्चे रहे.

गायत्री देवी ना केवल खूबसूरत थीं बल्कि चार्मिंग भी थीं. उनकी मां इंदिरा देवी की गिनती खुद अपने जमाने की सुंदर महिलाओं में होती थी. इंदिरा देवी की शादी जिस तरह कूच विहार के प्रिंस से हुई थी, वो अपने आप में एक सनसनी थी. क्योंकि इंदिरा देवी ने ग्वालियर के सिंधिया से अपनी शादी तोड़कर मां-बाप की मर्जी के बगैर शादी रचाई थी. उनकी बेटी भी उसी ओर बढ़ने वाली थी लेकिन अलग तरह से. इंदिरा देवी जितनी सुंदर थीं, उतनी ही स्टाइलिश और तड़क भड़क वाली महिला थीं. यूरोप में उनकी पार्टियां और दोस्तियों के चर्चे होते थे. माना जाता है देश में सिल्क और सिफॉन की साड़ियों को फैशन में लाने का श्रेय इंदिरा देवी को ही जाता है.

इंदिरा देवी की सगाई ग्वालियर के सिंधिया घराने में हुई थी, लेकिन वो इस बीच कूचबिहार के युवराज जितेंद्र के प्यार में पड़ गईं. उन्होंने ना केवल ग्वालियर में राजघराने में शादी तोड़ी बल्कि अपने माता-पिता के खिलाफ जाकर इंग्लैंड कूच बिहार के युवराज से शादी रचाई. इंदिरा देवी के तीन बच्चे थे. एक बेटा और दो बेटियां. गायत्री देवी तीसरे नंबर की संतान थीं. सबसे छोटीं. वह 1919 में लंदन में पैदा हुईं थीं. तब उनका नाम आयेशा रखा गया. गायत्री देवी के तौर पर नया नाम तो उन्हें शादी के बाद मिला.

गायत्री देवी अपने जमाने में अप्रतीम सौंदर्य की देवी भी थीं. उन्हें दुनिया की खूबसूरत महिलाओं में शुमार किया जाता था. (फाइल फोटो)

ये लग चुका था कि गायत्री देवी बेतरह सुंदर होंगी
जब गायत्री देवी बड़ी होने लगीं तो ये तय हो चुका था कि वह अपनी मां की ही तरह बेहद सुंदर महिला बनने वाली हैं. गायत्री को बचपन से ही खुली जिंदगी मिली थी. वह टाम बॉय की तरह थीं, जिसे हार्स राइडिंग और शिकार से प्यार था. जब वह 12 साथ की थीं तब उन्होंने पहली बार पैंथर का शिकार किया था. गायत्री को ना किसी तरह कोई अभाव था और ना कोई दिक्कत.

हालांकि उनके पिता पक्ष में शराब की लत बुरी तरह घुसी हुई थी. इसी की अधिकता से गायत्री देवी के चाचा और राज्य के प्रमुख की मृत्यु हुई. फिर उनके पिता भी इसी के शिकार हुए. इसी वजह से उनकी मृत्यु हो गई. गायत्री देवी तब कम उम्र की ही थीं. पिता की मौत के बाद उन्हें उनके प्यार की जरूरत महसूस होती थी.

12 साल की गायत्री मानसिंह पर मुग्ध हो गईं
जब गायत्री 12 साल की थीं तो मां इंदिरा देवी ने कोलकाता में फैमिली एस्टेट में जयपुर के आकर्षक महाराजा मानसिंह को आमंत्रित किया. 21 साल के मानसिंह का निकनेम जय था. वह पोलो के जानेमाने खिलाड़ी थे. गायत्री ने 12 साल की उम्र में जब हैंडसम मानसिंह को देखा तो वह उनके ऊपर मुग्ध हो गईं. उन्हें जय को देखकर कुछ कुछ होने लगा.

महारानी गायत्री देवी कूचविहार रियासत की राजकुमारी थीं. वह लंदन में पैदा हुईं और उनकी सारी पढ़ाई विदेशों में हुई. उनकी मां इंदिरा देवी खुद अपने जमाने की फैशन सिंबल के तौर पर जानी जाती थीं. (फाइल फोटो)

उनके आसपास मंडराने लगीं
अभी ये उनका एकतरफा प्यार ही था. गायत्री उनके इर्दगिर्द मंडराने लगीं. इस तरह दिखाने की कोशिश करने लगीं कि वह बड़ी हो चुकी हैं. खैर इस दौरे में मानसिंह यानि जय ने गायत्री को किसी बच्चे जैसा ट्रीट किया. अगले सीजन में मानसिंह फिर कोलकाता आए. फिर वह गायत्री के परिवार के मेहमान बने. गायत्री हालांकि अब भी टीनएज ही थीं लेकिन महाराजा ने अबकी बार बड़ी होती इस सुंदर किशोरी को नोटिस किया.

अबकी बार मानसिंह ने भी उन्हें नोटिस किया
जय की आंखें पूरी ट्रिप में अबकी बार उन्हीं पर थीं. जब उन्होंने कोलकाता में इंडिया पोलो एसोसिएशन चैंपियनशिप जीती, तो इंदिरा देवी ने दोस्ती के तौर पर उनसे कुछ भी मांगने को कहा. तो उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि आज रात में उनके साथ डिनर में गायत्री साथ रहें. इससे इंदिरा देवी खिन्न तो जरूर हुईं लेकिन वादा कर लिया था. गायत्री को साड़ी पहनाकर डिनर के लिए उस रात राजा मानसिंह के साथ भेजा गया. अभी तो आगे इस प्रकरण में बहुत कुछ और भी होना था. ये तो शुरुआत थी.

जब गायत्री देवी का दिल जयपुर के महाराजा मानसिंह द्वितीय पर आया तो वह 21 साल के थे जबकि गायत्री 12 साल की. वो उनके आसपास मंडराने लगीं. (फाइल फोटो)

महाराजा का दिल भी उन पर आ गया था
ये डिनर कोलकाता के मशहूर रेस्टोरेंट में था. ऐसा लगता है कि 13 साल की इस किशोरी पर युवा महाराजा रीझ चुका था. हालांकि जयपुर में उसकी दो रानियां पहले से मौजूद थीं. उसकी पहली शादी मरुधर से तब हो गई थी जब वह केवल 12 साल का था. तब पहली पत्नी 24 साल की थी. दूसरी बीवी पहली की भांजी थी.

प्यार में डूबने लगे थे
हालांकि जय को गायत्री के साथ कुछ मुलाकातों में अंदाज हो गया कि उनकी नई प्रेमिका बेशक उम्र में छोटी हो लेकिन आज्ञाकारी तो नहीं रहने वाली. एक बार जब गायत्री और उनका परिवार जयपुर घूमने गए तो जय ने तय किया वो गायत्री को अकेले हार्स ट्रिप पर ले जाएंगे. जब उन्होंने गायत्री को हार्स राइडिंग के नए टिप्स दिए तो उन्होंने इसे अनसुना कर दिया. हालांकि दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब चुके थे.

महाराजा ने शादी का प्रस्ताव किया और मां ने खारिज कर दिया
गायत्री जब 14 की हो गई तो महाराजा ने उसकी मां से कहा, वह कुछ और बड़ी होने पर गायत्री से शादी करना चाहते हैं. तब इंदिरा देवी इस प्रस्ताव की हंसी उड़ाते हुए खारिज कर दिया. दोनों परिवारों में बड़ा अंतर तो था. गायत्री का परिवार बहुत ओपन था तो मानसिंह का परिवार बेहद परंपरागत और पर्दा मानने वाला.

जय की पहली दोनों पत्नियां पर्दे में राजमहल के अनुशासन के तहत पर्दे में रहती थीं जबकि गायत्री का लालन-पालन इंडीपेंडेंट तरीके से हुआ. दकियानूसी परंपराओं में वह कतई यकीन नहीं रखती थीं. इंदिरा देवी इसलिए भी अपनी बेटी को जयपुर में ब्याहना नहीं चाहती थीं क्योंकि वो नहीं चाहती थीं कि वह भी जयपुर के पर्दे और अन्य परंपराओं का पालन करे.उन्हें ये भी लगता था कि उनकी बेटी कभी ऐसा नहीं कर पाएगी. (जारी है) (इस लव स्टोरी का अगला पार्ट कल पढ़ें)

Tags: Jaipur news, Love, Love Story, Rajasthan Royals, Valentine Day

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