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राज्‍यपाल के रूप में कल्याण सिंह ने तोड़ा था 52 साल का रिकॉर्ड, बदली थी ब्रिटिश राज की परंपरा– News18 Hindi

लखनऊ. बीजेपी के दिग्गज नेताओं में से एक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Former CM Kalyan Singh) का शनिवार शाम को निधन हो गया. इस वक्‍त उनसे जुड़े तमाम किस्‍से और रिकॉर्ड चर्चा में है. इस बीच बीजेपी के कद्दावर नेता रहे कल्याण सिंह ने राजस्थान (Rajasthan) के राज्यपाल रहते 52 साल का रिकॉर्ड तोड़ना भी सुर्खियों में शुमार है. दरअसल, राजस्थान के इतिहास में 52 साल में कोई भी राज्यपाल अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया था, लेकिन कल्याण सिंह ने 2 सितंबर 2019 को ये रिकॉर्ड तोड़ डाला.

यही नहीं, यूपी के पूर्व सीएम ने बतौर राज्यपाल न सिर्फ पांच साल का कार्यकाल पूरा किया बल्कि 1967 के बाद ये पहला मौका था, जब किसी राज्यपाल ने अपना कार्यकाल पूरा किया. इससे पहले 1967 में सम्पूर्णानंद ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था.

52 साल में बने 40 राज्‍यपाल, लेकिन…
बता दें कि राजस्‍थान में 52 साल में 40 राज्यपाल नियुक्त हुए, लेकिन कोई 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया था. इस दौरान कुछ ने इस्तीफा दे दिया, तो कुछ की कार्यकाल के बीच में ही पद पर नियुक्ति हुई. वहीं, केंद्र की सरकार बदलने के साथ कई राज्‍यपाल यकायक बदल गए. हालांकि चार राज्यपालों का पद पर रहते हुए निधन हुआ. इसके अलावा 40 राज्यपालों में से 17 ऐसे थे, जो दूसरे प्रदेश के राज्यपाल थे और उन्हें कुछ समय के लिए राजस्थान का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था.

कल्‍याण सिंह ने तोड़ा रिकॉर्ड
कल्याण सिंह समेत 23 राज्यपालों की पूरे 5 साल के लिए नियुक्ति की गई, लेकिन उनको छोड़कर कोई भी अपना कार्यकाल पूरा ही नहीं कर सका. हालांकि बलिराम भगत 4 साल 10 महीने, अंशुमान सिंह 4 साल 8 महीने, जोगेंद्र सिंह 4 साल 7 महीने और रघुकुल तिलक 4 साल 3 महीने तक के सर्वाधिक कार्यकाल तक इस पद पर रहे. वहीं सिर्फ तीन लोगों ने अपना कार्यकाल पूरा किया.इनमें 30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक राज प्रमुख के रूप में सवाई मानसिंह, इसके बाद 1 नवंबर 1956 से 15 अप्रैल 1962 तक गुरुमुख निहाल सिंह और 1962 से 1967 तक डॉ. सम्पूर्णानंद ने पूरे 5 साल के लिए राज्यपाल रहे.

वैसे कल्‍याण सिंह दो अलग-अलग पार्टियों की सरकारों में राज्यपाल रहे.जब वह 2014 में राज्यपाल बनकर आए तब राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार थी. वहीं, जब 2 सितंबर 2019 को उनका उनका कार्यकाल पूरा हुआ तब कांग्रेस की सरकार की थी. यही नहीं, सीएम अशोक गहलोत 8 महीने का कार्यकाल पूरा कर चुके थे.

कल्याण सिंह ने बदली ब्रिटिश राज की परंपरा
यही नहीं, राजस्थान के राज्यपाल का पद संभालते ही कल्याण ने पहले ही दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की और राज्यपाल को ‘महामहिम’ की जगह ‘माननीय’ संबोधित करने के आदेश दे दिया था. उन्होंने कहा था कि महामहिम शब्द में औपनिवेशिक बू आती है. हम स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं. ऐसे में राज्यपाल के लिए महामहिम के बजाए माननीय या फिर दूसरा सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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