1.5 लाख लोगों को घड़ियाल सेंचुरी से राहत, आबादी क्षेत्र मुक्त

कोटा. नए साल की शुरुआत शहर के हजारों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है. कोटा बैराज से हैंगिंग ब्रिज के बीच चंबल नदी के किनारे बसा आबादी क्षेत्र अब आधिकारिक रूप से घड़ियाल अभयारण्य से मुक्त कर दिया गया है. केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही वर्षों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है. इस फैसले से करीब 730 हेक्टेयर क्षेत्र अब सेंचुरी से बाहर हो गया है, जिससे लगभग 40 हजार मकानों और उनमें रहने वाले करीब डेढ़ लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.
वर्ष 1983 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत चंबल नदी के किनारे एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को घड़ियाल अभयारण्य घोषित किया गया था. उस समय भी यहां पहले से ही घनी आबादी मौजूद थी, सेंचुरी घोषित होने के बाद लोगों को अपने मकानों के पट्टे नहीं मिल पा रहे थे. निर्माण, मरम्मत, बिजली-पानी के कनेक्शन, सड़क, सीवरेज और संपत्ति की खरीद-फरोख्त तक में कानूनी अड़चनें बनी हुई थी. बीते 41 वर्षों से लोग इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे थे.
डि-नोटिफिकेशन की खबर मिलते ही किशोरपुरा, शिवपुरा, सकतपुरा, रामपुरा, गुमानपुरा और नयागांव सहित कई इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई. लोगों ने देर रात तक आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाकर इस खुशी का जश्न मनाया. Local की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड रिपोर्ट की और स्थानीय लोगों से बातचीत की.
केवल आबादी वाले हिस्से को ही सेंचुरी से मुक्त किया गया है
शिवपुरा क्षेत्र के स्थानीय निवासी जीतू बनाना ने Local से बातचीत में कहा, “हम लोग बचपन से यहां रह रहे हैं, लेकिन आज तक हमारे घरों के कागज पूरे नहीं हो पाए. इस फैसले से अब हमें अपने मकान पर पूरा अधिकार मिलेगा, यह हमारे लिए सपने के सच होने जैसा है.” डि-नोटिफिकेशन के बाद किशोरपुरा क्षेत्र का 208.56 हेक्टेयर, शिवपुरा क्षेत्र का 320.33 हेक्टेयर, सकतपुरा क्षेत्र का 186.36 हेक्टेयर, रामपुरा क्षेत्र का 0.7 हेक्टेयर, गुमानपुरा क्षेत्र का 3.93 हेक्टेयर और नयागांव क्षेत्र का 12.12 हेक्टेयर इलाका अब घड़ियाल सेंचुरी से बाहर हो जाएगा. इससे इन सभी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण अब पट्टा वितरण, नियमितीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम कर सकेंगे. इसके साथ ही नए आवासीय और व्यावसायिक निर्माण का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो जाएगा.
रामपुरा मंडल अध्यक्ष चंद्र प्रकाश महावर ने कहा, “यह फैसला कोटा के हजारों परिवारों के लिए ऐतिहासिक है. वर्षों से जो अन्याय हो रहा था, वह अब समाप्त हो गया है. इसके लिए हम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का आभार व्यक्त करते हैं, जिनके प्रयासों से यह संभव हो पाया.” वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से घड़ियालों के संरक्षण पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. चंबल नदी का मुख्य प्रवाह क्षेत्र और घड़ियालों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. केवल आबादी वाले हिस्से को ही सेंचुरी से मुक्त किया गया है, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह फैसला कोटा के विकास को नई दिशा देगा और लंबे समय से रुका हुआ विकास कार्य अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा.



