Rajasthan

100 साल की राष्ट्र सेवा! नागौर के सैनी परिवार ने रचा इतिहास, अब डाक अधीक्षक बना बेटा

Last Updated:December 30, 2025, 17:00 IST

Nagaur News Hindi : नागौर जिले के घाटवा गांव का सैनी परिवार बीते सौ वर्षों से भारतीय डाक विभाग में सेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. ब्रिटिश शासनकाल से शुरू हुई यह परंपरा आज़ाद भारत तक निरंतर चली आ रही है. चार पीढ़ियों की मेहनत, ईमानदारी और राष्ट्र सेवा की भावना ने परिवार को गौरवशाली पहचान दिलाई है. अब परिवार का सदस्य डाक अधीक्षक बनकर इस विरासत को नई ऊंचाई दे रहा है.डाक सेवा

राजस्थान के नागौर जिले के घाटवा गांव का सैनी परिवार एक अनोखी सफलता की कहानी का प्रतीक है. यह परिवार आजादी से पहले ब्रिटिश शासनकाल से लेकर आज़ाद भारत तक लगातार भारतीय डाक विभाग में सेवाएं देता आ रहा है. लगभग एक शताब्दी से अधिक समय तक सरकारी सेवा में शामिल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सैनी परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी राष्ट्र सेवा की मजबूत परंपरा को भी उजागर करता आ रहा है.

डाक सेवा

इस गौरवशाली परंपरा की शुरुआत बीस के दशक में मानाराम सिंगोदिया से हुई, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के समय बतौर पोस्टमैन डाक विभाग में सेवाएं देना प्रारंभ किया. उस दौर में संचार के सीमित साधनों के बीच डाक सेवा आमजन के लिए जीवनरेखा समान थी. मानाराम सिंगोदिया ने कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी और निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए परिवार की सेवा परंपरा की मजबूत नींव रखी.

डाक सेवा

मानाराम सिंगोदिया की इस परंपरा को उनके पुत्र सुरजाराम ने आगे बढ़ाया. सुरजाराम भी भारतीय डाक विभाग में पोस्टमैन के पद पर कार्यरत रहे और उन्होंने अपने पिता के आदर्शों का अनुसरण करते हुए पूरी निष्ठा से सेवा दी. उनके कार्यकाल में भी डाक विभाग आमजन और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बना रहा. सुरजाराम ने अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी से परिवार की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया.

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डाक सेवा

इसके बाद तीसरी पीढ़ी के रूप में सुरजाराम के पुत्र सुवालाल ने भारतीय डाक विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सुवालाल ने पोस्ट मास्टर के पद पर रहते हुए वर्षों तक सेवाएं दीं और वर्ष 2013 में खाचरियावास से सेवानिवृत्त हुए. उनके कार्यकाल में डाक विभाग में तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले, जिनका उन्होंने निर्वहन करते हुए विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखी.

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इसके बाद सुवालाल के बड़े पुत्र राजेंद्र प्रसाद ने भी सेवा की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. वे भारतीय सेना के डाक विभाग में वॉरंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे और भारतीय शांति सेना के तहत साउथ अफ्रीका में भी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे भारतीय डाक विभाग सीकर में निरक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जहां उनका अनुभव और अनुशासन विभाग के लिए बहुत काम आ रहा है.

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वहीं सुवालाल के छोटे पुत्र रामनिवास ने भी भारतीय सेना के डाक विभाग में नागपुर में वॉरंट ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं. वर्तमान में वे भारतीय डाक विभाग श्रीमाधोपुर में निरक्षक के पद पर कार्यरत हैं. दोनों भाइयों ने सेना और डाक विभाग में कार्य करते हुए न केवल परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया, बल्कि राष्ट्र सेवा की मिसाल भी पेश की.

डाक सेवा

सैनी परिवार की इस परम्परा में अब एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है. घाटवा गांव के राजेन्द्र सैनी का चयन भारतीय डाक विभाग में सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट यानी डाक अधीक्षक के पद पर हुआ है. यह उपलब्धि न केवल सैनी परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत भी है, जो यह दर्शाती है कि समर्पण और निरंतर सेवा से पीढ़ियों तक सफलता पाई जा सकती है.

First Published :

December 30, 2025, 17:00 IST

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यह सैनी परिवार सौ वर्षों से दे रहा है डाक विभाग में सेवा

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