भरतपुर में नीतू मौसी का सामूहिक विवाह अभियान

भरतपुर. सामाजिक एकता, बेटियों के सम्मान और मानवता की मिसाल पेश करते हुए भरतपुर की प्रसिद्ध किन्नर समाजसेवी नीतू मौसी ने एक बार फिर अपनी उदारता और सेवा भावना से शहर को प्रेरित किया. उन्होंने यह साबित किया कि सेवाभाव किसी लिंग या समुदाय तक सीमित नहीं होता.
नीतू मौसी पिछले 15 वर्षों से लगातार गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सामूहिक विवाह कराती आ रही हैं. इस वर्ष भी उन्होंने अपने निजी खर्चे पर 10 जोड़ों का विवाह कर समाज में एक अनूठा संदेश दिया. उनका यह अथक प्रयास समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के लिए एक बड़ी राहत है.
संपूर्ण विवाह का प्रबंध
बिना किसी सरकारी सहायता के नीतू मौसी ने प्रत्येक विवाह की जिम्मेदारी स्वयं निभाई. सभी दंपत्तियों को गृहस्थी का पूरा सामान, सोने-चांदी के आभूषण, नए कपड़े और आवश्यक घरेलू वस्तुएं भेंट की गईं, ताकि वे अपनी नई जिंदगी बिना किसी आर्थिक बोझ के शुरू कर सकें. यह सुनिश्चित करना कि नवविवाहित जोड़े एक सम्मानजनक जीवन शुरू कर सकें, उनकी सेवा भावना का मुख्य उद्देश्य है.
समाज में संदेश
नीतू मौसी का कहना है कि बेटियां परिवार और समाज की आधारशिला हैं. उनका उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाना भी है. उन्होंने लोगों से अपील की कि बेटियों को बोझ न समझें बल्कि उन्हें शिक्षा और सम्मान दें.
धार्मिक विविधता का सम्मान
विवाह समारोह में धार्मिक विविधता का भी विशेष ध्यान रखा गया. एक मुस्लिम बालिका का विवाह उसके धर्म के अनुसार संपन्न हुआ, जबकि अन्य हिंदू जोड़ों का विवाह पंडितों द्वारा पूर्ण विधि-विधान से किया गया. यह पहल समाज में सौहार्द और एकता का सुंदर संदेश बन गई, जो नीतू मौसी के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है.
शाही बारात और समारोह
कोतवाली क्षेत्र से सभी दूल्हे शाही रूप में घोड़े पर बैठकर बारात में आए. शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए बारात एक मैरिज होम पहुंची, जहां सभी जोड़ों ने पारंपरिक रस्मों के साथ विवाह संपन्न किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, समाजसेवी और किन्नर समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने नीतू मौसी के इस नेक कार्य की सराहना की.
भरतपुर में किन्नर नीतू मौसी का यह अनोखा सेवा अभियान अब समाज में मिसाल बन चुका है. उनके प्रयासों ने उन्हें सेवा, सहयोग और समर्पण का प्रतीक बना दिया है. यह कदम न केवल जरूरतमंद परिवारों को सहारा देता है बल्कि समाज में समानता, सद्भाव और मानवता का संदेश भी फैलाता है.



