300 साल पुरानी विरासत: दुनिया भर में मशहूर है जयपुरी रजाई का हुनर, सात पीढ़ियों की है इसकी कहानी!

जयपुर. सर्दियों के सीजन में जयपुर के हैंडमेड प्रोडक्ट्स की खूब डिमांड रहती है. ऐसे ही जयपुर के हैंडमेड प्रोडक्ट्स में सबसे खास है जयपुरी रजाई, जिसकी सर्दियों के सीजन में सबसे ज्यादा मांग रहती है, क्योंकि जयपुरी रजाई अपनी गर्माहट के लिए वर्षों से प्रसिद्ध है. लोकल-18 ने जयपुर के हवामहल बाजार में पहुंचकर यहां वर्षों से जयपुरी रजाई तैयार करते आ रहे हुनरमंद कारीगरों से बात की. अब्दुल अदीब बताते हैं कि जयपुरी रजाई के बनने और इसके प्रसिद्ध होने का इतिहास 300 साल पुराना है, जो बेहद रोचक है. जयपुरी रजाई पहली बार हमारे पूर्वज स्वर्गीय कादर बक्श ने 1723 में बनाई थी और आज भी हम उनकी सातवीं पीढ़ी के लोग इस काम को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं.
अदीब बताते हैं कि 300 साल पहले हमारे पूर्वज स्वर्गीय कादर बक्श आमेर में रहा करते थे और उन्होंने वहीं से पहली बार अपने हुनर से जयपुरी रजाई को इजाद किया. उन्होंने एक रजाई जयपुर के महाराजा जयसिंह को भेंट की थी, उनकी बेहतरीन रजाई से खुश होकर राजा ने उन्हें हवामहल के पास बसाया और तब से वे अपनी बेगम और पुत्र के साथ यहां रहने लगे और लगातार जयपुरी रजाई बनाने का सिलसिला शुरू हुआ. अदीब बताते हैं कि उस दौर में जयपुरी रजाई हाथ से बनाई जाती थी, जिसके चलते उनके परिवार के सदस्य एक महीने में केवल पांच रजाइयां ही बना पाते थे. समय के साथ जयपुरी रजाई खूब प्रसिद्ध हुई और अब इसकी डिमांड सर्दियों में केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत सहित विदेशों तक रहती है.
कैसे तैयार होती है जयपुर की 500 ग्राम की खास रजाई
लोकल-18 से बात करते हुए अब्दुल अदीब बताते हैं कि खासतौर पर जयपुरी रजाई अपनी गर्माहट, हल्के भार और सुंदरता के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. अदीब बताते हैं कि आम रजाई 2 से 3 किलो की होती है, जिसमें रुई के साथ फाइबर मिक्स होता है, लेकिन हमारी असली जयपुरी रजाई 500 ग्राम से 700 ग्राम तक की होती है. वे बताते हैं कि उस दौर में सभी रजाइयां हाथ से बनती थीं, जबकि आज ज्यादातर रजाइयां मशीन और हाथों की मेहनत से तैयार होती हैं. रजाई बनाने के लिए पहले उच्च गुणवत्ता की रुई का इस्तेमाल होता है, इसमें हाथों से रुई को सेट किया जाता है, फिर उसकी तगाई और धागे से सिलाई की जाती है. इसके बाद आखिरी में जयपुर की मशहूर हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग वाले कपड़े से रजाई का कंवर तैयार किया जाता है, जिससे रजाई की सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं. तब जाकर एक जयपुरी रजाई तैयार होती है. हमारे यहां खासतौर पर सिंगल बेड, मी डबल बेड, सूती कपड़े की छपाई वाली, रेशमी, मर बंधेज और गोटे-किनारी की रजाइयां तैयार होती हैं. पहले के मुकाबले अब डिमांड के हिसाब से महीने में खूब सारी रजाइयां तैयार करनी पड़ती हैं, क्योंकि सर्दियों के सीजन में लोग जयपुर के अलावा देश-विदेश से यहां घूमने आने वाले पर्यटक जयपुरी रजाई को खूब पसंद करते हैं और खूब खरीदते हैं.
नेताओं से लेकर सेलिब्रिटीज की पसंद है जयपुरी रजाई
वर्षों से अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ा रहे अब्दुल अतीक बताते हैं कि जयपुरी रजाई की बेहतरीन गुणवत्ता के चलते वह कड़ाके की ठंड में भी गर्माहट का अहसास देती है. जयपुरी रजाई आम लोगों से लेकर खास लोगों की सर्दियों में पहली पसंद रहती है. अदीब का कहना है कि हमारे पूर्वजों ने देश-दुनिया की तमाम नामचीन हस्तियों को जयपुरी रजाई भेंट की है, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी को कॉटन रजाई और स्वर्गीय राजीव गांधी को 100 ग्राम का गाउन भेंट किया था.
इसके अलावा मोरारजी देसाई, नरसिम्हा राव, वी. पी. सिंह, आई. के. गुजराल सहित बॉलीवुड के राज बब्बर, बॉबी देओल और शिल्पा शेट्टी को भी जयपुरी रजाई भेंट की जा चुकी है. अदीब बताते हैं कि अगर बात करें जयपुरी रजाई की कीमत की, तो यह 1500 से लेकर 5000 रुपये तक, अलग-अलग साइज में तैयार होती है. जयपुर में वैसे तो कई दुकानें हैं जहां जयपुरी रजाई बेची जाती है, लेकिन स्वर्गीय कादर बक्श के नाम से हमारी असली दुकान हवामहल रोड पर दुकान नंबर 27 संचालित है, और आज हवामहल पर यह दुकान जयपुरी रजाई का प्रमुख केंद्र है.



