52 फीसदी युवा जाना चाहते हैं विदेश, आखिर किस काम के लिए मची ऐसी भगदड़, आंखों खोल देगी यह रिपोर्ट

Last Updated:January 08, 2026, 05:31 IST
Migration Survey : एक सर्वे में पता चला है कि देश के 52 फीसदी युवा देश के बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह पैसा और बेहतर करियर है.
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एक सर्वे में पता चला है कि आधे से ज्यादा युवा विदेश जाने का प्लान कर रहे हैं.
नई दिल्ली. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश के 52 फीसदी युवा बेहतर करियर और पैसे कमाने के लिए विदेश जाना चाहते हैं. एआई आधारित ग्लोबल टैलेंट प्लेटफॉर्म टर्न ग्रुप की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर करियर और पैसे कमाने के लिए युवाओं में विदेश जाने का मजबूत रुझान देखा गया है. यह सर्वेक्षण देशभर में करीब 8,000 लोगों से बातचीत पर आधारित है. टर्न ग्रुप एक एआई-पावर्ड ग्लोबल टैलेंट मोबिलिटी प्लेटफॉर्म है, जिसने अपने ईयर-एंड माइग्रेशन बैरोमीटर के ज़रिये सर्वे कराया है.
नतीजों से पता चलता है कि 52% भारतीय या तो विदेश जाने के बारे में सोच रहे हैं या सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण वित्तीय और करियर की महत्वाकांक्षाएं हैं. सर्वे यह भी बताता है कि माइग्रेशन की पसंद बदल रही है. 52% लोगों ने समय के साथ अपनी पसंदीदा जगह बदल दी है, जबकि 43% ने अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए स्पष्ट पसंद जाहिर की है, जो ग्लोबल करियर मोबिलिटी की बढ़ती अपील को दिखाता है.
क्या है माइग्रेशन का सबसे बड़ा कारणवित्तीय विकास माइग्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है. 46% लोगों ने इसे अपनी मुख्य प्रेरणा बताया है, इसके बाद करियर ग्रोथ 34% पर है. व्यक्तिगत सपने और ग्लोबल एक्सपोजर दूसरे नंबर पर हैं, जो क्रमशः 9% और 4% है. यह इस बात पर जोर देता है कि मौजूदा माइग्रेशन की लहर सिर्फ जीवनशैली की आकांक्षाओं के बजाय आर्थिक नतीजों पर आधारित है. अब पसंदीदा जगहों से यूरोप और एशिया की ओर एक साफ बदलाव दिखता है. जर्मनी सबसे पसंदीदा जगह है, जो 43% लोगों को आकर्षित करता है. इसके बाद यूके 17%, जापान 9% और यूएसए 4% पर है. यह ट्रेंड भारतीय टैलेंट के लिए बढ़ती ग्लोबल मांग को दिखाता है, जिसे 57% लोगों ने माना है.
नर्सों में भी जमकर माइग्रेशनसर्वे से यह भी पता चलता है कि देश के कुछ हिस्सों से नर्सों के माइग्रेशन में एक मजबूत क्षेत्रीय एकाग्रता है. विदेश जाने वाली ज्यादातर नर्सें (61%) भारत के बड़े शहरों के बाहर के राज्यों से हैं. इनमें टियर 2 और टियर 3 क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी को दिखाता है. दिल्ली एनसीआर से 17% नर्सें माइग्रेट करती हैं, जो इस क्षेत्र की जानकारी और अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट नेटवर्क तक पहुंच को दिखाता है. दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत दोनों का योगदान 9% है, जो ग्लोबल हेल्थकेयर सिस्टम के लिए प्रमुख टैलेंट पूल के रूप में उनकी लंबे समय से चली आ रही भूमिका को दिखाता है.
माइग्रेशन में भाषा सबसे बड़ी बाधामजबूत माइग्रेशन के इरादे के बावजूद, कई बाधाएं बनी हुई हैं. भाषा की जरूरतें सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं, जिसका जिक्र 44% लोगों ने किया है, जिनमें से 36% अभी भाषा सीखने के स्टेज पर अटके हुए हैं. पारंपरिक रिक्रूटमेंट मॉडल पर भरोसा अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है. 48% लोगों ने अनैतिक रिक्रूटमेंट तरीकों के अपने पर्सनल अनुभव बताए हैं, जबकि 15% ने अपने साथियों से ऐसे मामलों के बारे में सुना है. प्रवासियों को गाइडेंस की कमी (33%), ज्यादा खर्च (14%) और लंबे समय (10%) से जुड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 08, 2026, 05:31 IST
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52 फीसदी युवा जाना चाहते हैं विदेश, आखिर किस काम के लिए मची ऐसी भगदड़



