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सत्ता की रार पीठ पर वार,प्रदेश में मचा हाहाकार, पायलट आग लगा हुए जमीदोंज।

जयपुर,(प्रेम शर्मा)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गांधीगिरी छोड़ आक्रामक हो चुके है, सचिन पायलट पर तंज कसते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि जिसे हम जिम्मेदार समझते रहे वह चवन्नियां निकला, जिस परिवार ने उसे इतनी सी उम्र मे राष्ट्रीय स्तर की पहचान दी, उसी की पीठ में छूरा भोंककर उन लोगों की गोद मे बैठा हैं, जिन्हें देश से कोई सरोकार नहीं हैं।

गहलोत का आक्रामक अंदाज गांधीगिरी से अलग हटकर स्वतंत्रता संग्राम में उग्र भूमिका अदा करनेवाले सुभाषचंद्र बोस की झलक मे नजर आ रहा था। उनके चेहरे पर आरपार के सग्राम की चमक साफ दिखाई दे रही थी। घर ना बिखरे इसके लिए प्रदेश से लेकर आलाकमान तक सभी के प्रयास सचिन की घर वापसी के असफल रहे। सूत्रों की माने तो राहुल गांधी की चौकडी मे बचपन के मित्र ज्योतिरादित्य सिधिंया के हाथों में सचिन पायलट की कमान हैं ओर भाजपा का निशाना सिधिंया के कंधे पर बंदूक रखकर राजस्थान की सरकार हैं।

उधर सचिन पायलट मानेसर में अपने चहेते विधायकों के साथ पूरे घटनाक्रम में अण्डरग्राउण्ड हुए पड़े है,उन्हें लेकर चर्चा है कि प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में आग लगा वे जमींदोज हो गए ओर जिस जनता के भरोसे को हासिल करके सत्ता का मुकाम हासिल किया उसे हाहाकार करता छोड़ चले।
लोगों का मानना है कि उन्होंने जल्दबाजी करे स्वयं के पांव पर कुल्हाडी मारी है। अगर वे मिशन में सफल नहीं होते है तो घर के रहेंगे न घाट के।पब्लिक का विश्वास हासिल करने के लिए उन्हें कड़े सघर्ष के दौर से गुजरना होगा।क्योंकि भाजपा का दामन थामते भी है तो उन्हें उस मंच पर भी मुख्यमंत्री के रूप में कोई नहीं स्वीकारेंगा। भले ही भाजपा का दामन थाम चुकें ज्योतिरादित्य सिंधिया पर उन्हें भरोसा हो,लेकिन उनमें ओर पायलट में जमीन आसमां का फर्क है यह सचिन को नहीं भूलना चाहिए,लेकिन सत्ता के नशे में मद्द पायलट एक के बाद एक गलती करते गए,जबकि सिंधिया को उनके परिवार का फायदा भाजपा में मिला है क्योंकि सभी जानते हैं कि सिंधिया परिवार भाजपा का फाउण्डर रहा है।

प्रदेश मे गहलोत की सतर्कता ही अभी कांग्रेस ओर राजस्थान सरकार की पालनहार बनी हुई हैं। सियासी घमासान का पटाक्षेप होता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि गहलोत ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए विधायकों को बताया कि अभी कुछ ओर दिन इस तरह से रहना पड सकता हैं।

उधर अपने आप को राजनीति का मझा खिलाड़ी समझने वाले विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली हैं, जबकी विधायकी पर निर्णय देना उनका स्वाधिकार हैं लेकिन घर वापसी की सोच को लेकर किए प्रयासों ने सियासी घमासान को अदालत के द्वार पहुंचा दिया। इस पूरे घमासान मे पीस रही हैं तो वह हैं प्रदेश की वह जनता, जिनकी बदौलत सेवा भाव की कर्मस्थली हार्सट्रेडिंग का सेक्टर बनती जा रही हैं ओर गहलोत ने इस मर्म को समझ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र के माध्यम से अवगत कराया

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