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उदयपुर: लाल बहादुर शास्त्री को तौलने जमा कराया सोना होगा CGST के हवाले, CJM कोर्ट का फैसला | udaipur – News in Hindi

उदयपुर: लाल बहादुर शास्त्री को तौलने जमा कराया सोना होगा CGST के हवाले, CJM कोर्ट का फैसला

55 साल से चले आ रहे मामले पर कोर्ट का फैसला आया है. (Demo PIc)

55 साल से चले आ रहे इस मामले में सीजीएसटी (CGST) की ओर से जयपुर के वरिष्ठ वकील संजीव पुरोहित और उदयपुर (Udaipur) के वकील प्रवीण खंडेलवाल और भंवर सिंह देवड़ा ने पैरवी की थी.

उदयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर के सीजेएम कोर्ट (Udaipur) में चल रहे एक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्वागत में उनको तोलने के लिए भेंट किया गया 56 किलो 857 ग्राम सोना सेंट्रल जीएसटी (GST) डिपार्टमेंट के सुपुर्द करने के निर्देश दिए हैं. इस सोने की वर्तमान कीमत करीब 31 करोड़ रुपए आंकी जा रही है.उ रहे इस मामले में सीजीएसटी की ओर से जयपुर के वरिष्ठ वकील संजीव पुरोहित और उदयपुर के वकील प्रवीण खंडेलवाल और भंवर सिंह देवड़ा ने पैरवी की थी. वर्ष 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री चित्तौड़गढ़ आने का कार्यक्रम था. उस दौरान बड़ी सादड़ी के रहने वाले गणपत लाल आंजना ने शास्त्री के स्वागत में उनकी वजन के बराबर उनको तोलने के लिए तत्कालीन कलेक्टर के पास 56 किलो 857 ग्राम सोना दिया.

बताया जा रहा है कि शास्त्री के निधन के चलते वे चित्तौड़गढ़ नहीं आ सके और यह सोना प्रशासन के पास ही रह गया. इस बीच आंजना परिवार ने इस सोने को प्राप्त करने के लिए लंबी लड़ाई भी लड़ी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी. साथ ही बड़ी सादड़ी के ही एक अन्य व्यक्ति द्वारा सोने को गलत नियत से खुर्द करने के आरोप लगाए और उस मामले में उदयपुर की लोअर कोर्ट में गणपत लाल आंजना सहित चार लोगों को दोषी मानते हुए सजा सुना दी. हालांकि डीजे कोर्ट और हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया लेकिन यह सोना गोल्ड कंट्रोल ऑफिसर के पास जमा रखने के आदेश दिए. वर्ष 2009 में उदयपुर सीजेएम कोर्ट में अर्जी लगा कर इस सोने को एक्साइज विभाग को सौंपने के लिए मांग की गई.

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सेंट्रल जीएसटी के हवाले होगा सोनाएक्साइज विभाग में गोल्ड कंट्रोल ऑफिसर की पोस्ट खत्म होने का हवाला देते हुए इस सोने को सुपुर्द करने का दावा पेश किया था. वर्तमान में एक्साइज विभाग की जगह सेंट्रल जीएसटी ने ले ली है. ऐसे में कोर्ट में चित्तौड़गढ़ डिवीजन के सेंट्रल जीएसटी विभाग को सोना सुपुर्द करने के आदेश सुनाए हैं. वर्ष 1962 में युद्ध के चलते देश में अन्य की कमी होने लगी थी. इसे देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने गोल्ड कंट्रोल एक्ट के तहत गोल्ड बॉन्ड स्कीम निकाली. इस स्कीम के तहत गोल्ड बॉन्ड लेने वाले व्यक्ति से किसी तरह का पूछताछ नहीं करने का प्रावधान रखा था. गणपत लाल आंजना ने भी 10 दिसंबर 1965 को इसी स्कीम के तहत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए सोना जमा कराया.

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