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संकट टला सियासत का, कब तक ? यह किसी को मालूम नहीं।

  • राहुल ने सोनिया से मुलाकात की, सोनिया ने कमेटी बनाने के निर्देश दिए
  • राहुल की हरी झंडी के बाद भंवर जितेंद्र सिंह और दीपेंद्र ने पायलट से बात की
  • कांग्रेस की 3 सदस्यीय कमेटी पर टिका सुलह का फॉर्मूला
  • 5 दिन पहले राजद्रोह की धारा हटाने के बाद से ही आपसी सुलह की पटकथा लिखनी शुरू हो गई थी

संकट टला सियासत का, कब तक ? यह किसी को मालूम नहीं।

दैनिक निराला समाज जयपुर
AUGEST 11,2020,  10:24 AM IST

जयपुर. (प्रेम शर्मा)। राजस्थान को सियासी संकट के भंवर से निकालने में चार किरदारों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई प्रियंका गांधी वाड्रा ने। क्योंकि प्रियंका ने ही सबसे पहले सचिन पायलट से संपर्क किया और उन्हें राहुल गांधी से बात करने के लिए राजी किया। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल व सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दरअसल, वेणुगोपाल तीन दिन पहले ही जैसलमेर आए थे और उन्होंने गहलोत खेमे के विधायकों से सुलह को लेकर बातचीत भी की थी।

बता दें कि पायलट ने दिल्ली में करीब दो घंटे तक प्रियंका गाधी की मौजूदगी में राहुल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी से उनका कोई विरोध नहीं है। ये लड़ाई पद के लिए नहीं, आत्मसम्मान के लिए थी। इसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया।

फिर सोनिया गांधी ने पायलट समेत बागी विधायकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। वहीं, पायलट और गहलोत के बीच तनातनी पर युवा नेता भी खुश नहीं थे। युवा ब्रिगेड ने यह बात राहुल के सामने भी जोरदार तरीके से रखी। इनमें राहुल के करीबी दीपेंद्र हुड्डा, भंवर जितेंद्र सिंह, मिलिंद देवड़ा और जितिन प्रसाद शामिल थे। राहुल की हरी झंडी के बाद भंवर जितेंद्र सिंह और दीपेंद्र ने पायलट से बात की।

राजस्थान में सियासी शह और मात का खेल 32 दिन चला। कांग्रेस के दो धड़ों की दो जगह बाड़ेबंदी चली। इधर बीजेपी ने भी बाड़ेबंदी की तैयारी कर ली थी। इसी बीच सचिन गुट की दिल्ली में राहुल और प्रियंका गांधी से वार्ता हो गई। फिलहाल सियासी संकट टल गया। बीजेपी अपने ऑपरेशन लोटस में फेल हो गई। अगर सुलह का फॉर्मूला सेट नहीं बैठा तो फिर कलह तय है।

विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला : सचिन व समर्थक विधायकों को राजद्रोह की धारा के तहत भेजा था नोटिस

प्रदेश में सियासी संकट की पटकथा उसी दिन शुरू हो गई थी, जब विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को राजद्रोह की धारा के तहत पूछताछ का नोटिस भेजा गया था। इसके बाद पायलट अपने 18 विधायकों के साथ दिल्ली चले गए। 4 अगस्त को एसओजी ने ये धारा हटाकर एफआर लगा दी। उसके बाद से सियासी संकट खत्म होने का माहौल बनना शुरू हो गया था। जानिए, धारा लगने से हटने के बीच कब क्या हुआ… 10 जुलाई : एसओजी ने राजद्राेह का मामला दर्ज किया था। इसी दिन एसओजी ने मुख्यमंंत्री अशाेक गहलाेत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित 16 विधायकाें काे नाेटिस दिया था। 12 जुलाई : एसओजी ने ब्यावर के भरत मालानी तथा उदयपुर के अशाेक सिंह काे कांग्रेस समर्थित विधायकाें की खरीद फराेख्त करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। 16 जुलाई : सरकार की ओर से तीन ऑडियाे वायरल करने के बाद मुख्य सचेतक ने एसओजी में दाे और एसीबी में एक मामला दर्ज कराया। 17 जुलाई : एसओजी ने तीन मामले दर्ज किए। एसओजी की टीम 17 जुलाई काे मानेसर पहुंची। जहां हरियाणा पुलिस ने एसओजी की टीम काे उस हाेटल में जाने से राेक दिया। यहीं कांग्रेस के बागी विधायक ठहरे हुए थे। एसओजी की टीम 20 दिन मानेसर, गुरुग्राम तथा दिल्ली में रही। एसीबी ने विधायक विश्वेन्द्र तथा भंवरलाल शर्मा काे पूछताछ के लिए बुलाने के लिए तीन बार नाेटिस दिए। मगर दाेनाें ही नहीं आए। 4 अगस्त : एसओजी ने राजद्राेह के तीनाें मामलाें में एफआर लगा दी। केस एसीबी को सौंपा।

ऑपरेशन लोटस फेल, फिर अटैक को तैयार बीजेपी : प्रदेश में चले सियासी घटनाक्रम के बाद गहलोत सरकार भले ही बच गई है लेकिन बीजेपी आलाकमान गहलोत सरकार काे प्रभावित करने के लिए दोबारा अटैक कराकर सियासी संकट पैदा कर सकता है। गहलाेत-पायलट के बीच सुलह के बाद भी इन चर्चाओं ने जाेर पकड़ रखा है कि भले ही बीजेपी का प्रदेश में ऑपरेशन लाेट्स फेल रहा लेकिन बीजेपी आलाकमान गहलोत सरकार पर हमला कर सकता है।

आगे क्या हाेगा ये सब भविष्य पर निर्भर है लेकिन बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने साेमवार काे बीजेपी कार्यालय में कहा कि ये कांग्रेस के आपस की लडाई थी, उन्हें नहीं लगता कि गहलोत सरकार आगे लंबा चल पाएगी। गाैरतलब है कि खुद सीएम अशाेक गहलाेत ने भाजपा पर सरकार गिराने का तीन बार षडयंत्र रचने का आराेप लगाया था। सियासी संकट के बीच गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ विधायक ताेड़ने के ऑडियाे से लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गाेयल व धर्मेंद्र प्रधान तक के नाम लिए थे।

इनकम टैक्स, ईडी सहित कई एजेंसी के इस्तेमाल पर चर्चा भी : प्रदेश में सियासी संकट के बीच इनकम टैक्स, ईडी जैसी एजेंसियाें ने सीएम अशाेक गहलाेत के रिश्तेदाराें व करीबी लाेगाें पर कार्रवाईयां की थी। अशाेक गहलाेत, बेटे वैभव गहलाेत के करीबी लाेग व गहलाेत के भाई अग्रसेन गहलाेत के खिलाफ आयकर विभाग व ईडी ने कार्रवाईयां की थी। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बीजेपी अगले सियासी संकट काे खड़ा करने में इन एजेंसियाें का इस्तेमाल कर सकती है।

प्लानिंग धरी रह गई, पायलट की मदद के लिए चर्चा में भी रही : भारी सियासी उठापटक के बीच बीजेपी ने भी विधायकाें की जयपुर के हाेटल में बाड़ेबंदी की तैयारी की थी। अविश्वास प्रस्ताव की भी तैयारी थी। बीजेपी के चार किरदार केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता राजेंद्र राठौड़ ऑपरेशन लोटस को सफल बनाने के लिए मुख्य भूमिका में बताए गए। केंद्रीय पदाधिकारी भी मंगलवार सुबह जयपुर पहुंच रहे थे, लेकिन प्लान धरा रह गया।

पहले से पता था इस नाटक के खात्मे का : छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस की नोटंकी अब खत्म हाे गई है। काेराेना में सरकार हाेटलाें में रही। इस नाटक में कुछ लाेगों ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की चुप्पी पर सवाल खड़े किए थे। वे इसलिए चुप थी क्योंकि उन्हें पता था कि ये नाटक था और इसे इसी तरह से खत्म हाेना था। बीजेपी में वसुंधरा ही सर्वमान्य नेता है।

प्रियंका गांधी से पायलट गुट के विधायकों ने कहा- इस सरकार में कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं

^हमारी समस्याएं हमने प्रियंका गांधी को बताई है। वन टू वन उनसे चर्चा हुई है। आश्वासन है कि कमेटी हमारी समस्याओं का समाधान करेगी। –रमेश मीणा, विधायक

^हम कांग्रेस के कट्‌टर सिपाही हैं। किसी भी पद की कोई बात नहीं हुई है। विधायकों को मान सम्मान नहीं मिल रहा था उन मुद्दों को लेकर बात की है। –मुरारी मीणा, विधायक

^सरकार को कोई खतरा नहीं है। विधायक जिस डिमांड को लेकर आए थे उस पर सुनवाई हुई है। भाजपा से हमारा कोई लेना देना नहीं था। हम अपने खर्च पर ही रुके थे। –वेद प्रकाश सोलंकी, विधायक

^नेतृत्व की कुछ परेशानियां थीं। हमारी मांगें सुन ली गई हैं इसके लिए कमेटी बनाई गई है।
-मुकेश भाकर, विधायक

 

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