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Strong light in the neighborhood increases the risk of depression and anxiety among teenagers, dogs are good for children’s mental health | आर्टिफीशियल लाइट किशोर उम्र के लिए खतरनाक; पास में तेज रोशनी से डिप्रेशन और चिंता का जोखिम ज्यादा, नींद भी खराब होती है

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एक महीने पहले

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ऑस्ट्रेलियन वैज्ञानिकों के मुताबिक, घर में कुत्ते के साथ रहना छोटे बच्चों के स्वस्थ साइकोलॉजिकल विकास से जुड़ा हो सकता है।

  • एक्सपर्ट्स की सलाह- रात में रोशनी के संपर्क में कम आने की कोशिश करें, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं कुत्ते
  • स्टडी के मुताबिक- कुत्तों के साथ रहने वाले बच्चों में समाज में जाकर अच्छा व्यवहार करने की संभावना 34% तक बढ़ जाती है

निकोलस बकालर. एक स्टडी के मुताबिक, आर्टिफीशियल लाइट किशोर उम्र के लिए खतरनाक हो सकती है। स्टडी बताती है कि इससे किशोर वर्ग के लोगों की नींद खराब होती है और साइकेट्रिक डिसॉर्डर का जोखिम बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका में नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के सैटेलाइट डाटा का उपयोग कर शहरी और ग्रामीण इलाकों में आउटडोर लाइट की गहनता को ट्रैक किया।  

इस दौरान पड़ोस में रहने वाले 10123 किशोरों का नींद के पैटर्न को लेकर इंटरव्यू किया गया। साथ ही स्ट्रक्चर्ड स्केल्स की मदद से मेंटल डिसॉर्डर की भी जांच की गई। इसके अलावा 6 हजार से ज्यादा टीनएजर्स के माता-पिता से भी उनके बच्चों को लेकर सवाल किए गए।

जितनी गहन लाइट, उतना डिप्रेशन और घबराहट का खतरा
जामा साइकेट्री में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि पड़ोस में लाइट जितनी ज्यादा इंटेंस होगी, उतनी ज्यादा नींद बिगड़ेगी और डिप्रेशन, घबराहट का जोखिम बढ़ेगा। लिंग, जाति, माता-पिता की शिक्षा और जनसंख्या जैसे फैक्टर्स को एडजस्ट करने के बाद उन्होंने पाया कि कम आउटडोर लाइट में रहने वाले एक चौथाई पड़ोस में रहने वाले टीनएजर्स के मुकाबले ज्यादा लाइट में रहने वाले 29 मिनट बाद बिस्तर पर गए और 11 मिनट नींद कम ली।

ज्यादा लाइट के करीब रहने वाले किशोरों को ज्यादा नुकसान
सबसे ज्यादा लाइट के करीब रहने वाले किशोरों में बायपोलर बीमारी का खतरा 19 प्रतिशत ज्यादा था। जबकि डिप्रेशन का खतरा 7 फीसदी अधिक था। यह स्टडी ऑब्जर्वेशनल थी और किसी भी तरह के कारण या प्रभाव का सबूत नहीं देती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ में सीनियर इंवेस्टिगेटर कैथलीन आर मेरीकांगास ने कहा कि भविष्य में पॉलिसी में बदलाव फर्क ला सकते हैं। इसी बीच उन्होंने कहा एक ईकाई के तौर पर हमें रात में लाइट के संपर्क में कम से कम आने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चों के मानसिक विकास में मददगार हो सकते हैं कुत्ते

  • ऑस्ट्रेलियन वैज्ञानिकों के मुताबिक, घर में कुत्ते के साथ रहना छोटे बच्चों के स्वस्थ साइकोलॉजिकल विकास से जुड़ा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग सोशियो डेमोग्राफिक फैक्टर्स में रहने वाले 3 से 5 साल के बच्चों के 1646 पैरेंट्स से डाटा कलेक्ट किया। उन्होंने कुत्ते को घुमाने और पैट से जुड़ी दूसरी जानकारियां भी लीं। इसमें कुत्ते के साथ खेलना और घूमना शामिल था। 
  • पीडियाट्रिक रिसर्च में छपी स्टडी बताती है कि कुत्ता नहीं रखने वाले बच्चों की तुलना में कुत्ते के साथ रहने वाले बच्चों में आचरण की समस्या 30% और साथियों के साथ परेशानी की संभावना 40 फीसदी कम होती है। इसके साथ ही वे 34% ज्यादा प्रो सोशल व्यवहार रखते हैं। 
  • यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया एंड टेलीथॉन किड्स इंस्टीट्यूट में एसोसिएट प्रोफेसर हेले ई क्रिश्चियन कहते हैं कि स्टडी बताती है कि कुत्ते के मालिक होने का लाभ जीवन में बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। यह एक ऑब्जर्वेशनल प्राप्ति है और किसी भी कारण या प्रभाव को साबित नहीं करती है।
  • प्रोफेसर हेले के मुताबिक, हम यह नहीं कह रहे कि बाहर जाओ और कुत्ता ले आओ। यह एक जरूरी निर्णय है। कुत्ते को पालना खर्च और जिम्मेदारी का काम है, लेकिन रिपोर्ट्स और रिसर्च बताती है कि इसके फायदे खर्च से ज्यादा हैं।

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