97 साल के ये बाबा हैं मैथ जीनियस, चुटकियों में सॉल्व करते हैं गणित के कठिन सवाल

झुंझुनूं: उम्र करीब 97 वर्ष से ज्यादा हो गई है, लेकिन आज भी गणित के कठिन से कठिन सवाल वे बिना कैलकुलेटर के हल कर लेते हैं. बीस साल के बच्चे को जितने पहाड़े याद हैं, उससे ज्यादा पहाड़े इनको अभी भी याद हैं. खास बात यह है कि अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों को हिन्दी में पहाड़े सही तरीके से नहीं आते और हिन्दी माध्यम में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों को अंग्रेजी में अच्छी तरीके से पहाड़े नहीं आते. लेकिन गणितज्ञ के नाम से प्रसिद्ध रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. घासीराम वर्मा ऐसे व्यक्ति हैं, जिनको अंग्रेजी व हिन्दी के साथ- साथ शेखावाटी की भाषा में भी पहाड़े कंठस्थ याद हैं. इसके अलावा सवा डेढ, ढाई के पहाड़े भी याद हैं.
बचपन से ही पहाड़े, गिनती, वर्ग इत्यादि में थी विशेष रूचि
घासीराम वर्मा ने बताया कि वह बचपन से ही पहाड़े, गिनती, वर्ग इत्यादि में विशेष रूचि रखते थे. वह उन्हें एक लय में याद किया करते थे. जहां आज बच्चों को 20 तक पहाड़े बड़ी मुश्किल से याद होते हैं. वहीं उन्हें 30 की वर्ग भी आज भी इस उम्र में भी बड़ी आसानी से याद है, जो कि उन्होंने अपने बचपन में प्रारंभिक पढ़ाई करते हुए दूसरी या तीसरी क्लास में सीखा होगा, लेकिन आज भी वे उसे भूले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि गणित का कोई शॉर्टकट नहीं है. एक दो सूत्र याद करके महान गणितज्ञ नहीं बन सकते. उसके लिए हर दिन मेहनत आवश्यक है.
कभी कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया
उन्होंने बताया कि वे अपनी पढ़ाई के दौरान भी कभी कोई शॉर्टकट नहीं अपनाते थे. उन्होंने हमेशा मेहनत की. वह बच्चों को पढ़ाने के दौरान कभी उनको हतोत्साहित नहीं करते थे. हमेशा बच्चों को प्रोत्साहित किया.
बच्चों में बढ़ाया विश्वास
घासीराम वर्मा ने बताया कि वह अपनी क्लास में बच्चों को पढ़ने के दौरान बोर्ड पर आकर सवाल सॉल्व करने के लिए कहते थे. बच्चे शुरू में तो हिचकिचाते थे, लेकिन उनके प्रोत्साहित करने पर वह आगे सवालों का जवाब दिया करते थे. इसी के चलते उनकी पढ़ाई में बच्चों की गणित भी मजबूत बनी. वह हमेशा लय में पढ़ने पर ज्यादा विश्वास करते थे, ताकि आजीवन वह चीज उनको याद रह सके.
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FIRST PUBLISHED : December 25, 2024, 13:30 IST