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होली पर भाभियों ने देवरों पर किया डोलची से प्रहार! लेकिन किसी ने नहीं मानी हार, दौसा में जोरों से खेली गई डोलची होली!

Last Updated:March 16, 2025, 09:07 IST

Dolchi Holi Dausa Rajasthan 2025: दौसा जिले के पावटा गांव में इस बार शनिवार के दिन डोलची होली का आयोजन हुआ. इस आयाजन में डोलची की पानी की मार से कई युवाओं की पीठ लाल पड़ गई, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी. वहीं डो…और पढ़ेंX
डोलची
डोलची होली

हाइलाइट्स

दौसा में डोलची होली का आयोजन हुआभाभियों ने देवरों पर डोलची से प्रहार कियाडोलची होली के बाद देवर-भाभी की होली खेली गई

दौसा:- राजस्थान के दौसा जिले के महवा उपखंड के पावटा गांव में हर साल धुलंडी के दूसरे दिन डोलची होली खेली जाती है. इस साल यह आयोजन शनिवार को हदिरा मैदान में हुआ. बता दें, कि यह होली किसी युद्ध के मैदान से कम नहीं होती, जहां एक तरफ भाभियां अपने देवरों पर कोड़े बरसाती हैं, वहीं देवर डोलची से पानी की बौछार कर जवाब देते हैं.

किसी युवा ने नहीं मानी हारआपको बता दें, इस अनोखी होली को देखने के लिए हजारों लोग मौजूद रहे. पानी से भरी चमड़े की डोलची से नंगे बदन पर पानी की बौछार और युवाओं का जोश इस होली की खासियत है. इस खेल की शुरुआत हवन क्रिया से हुई, जिसके बाद गांव के भैरूजी के मंदिर पर होली का आमंत्रण दिया गया, फिर इसके बाद दडगस और पीलवाड़ गोत्र के युवा आमने-सामने आए, और ऐसा दृश्य बना मानो कोई युद्ध छिड़ गया हो. डोलची की पानी की मार से कई युवाओं की पीठ लाल पड़ गई, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी. करीब दो घंटे चले इस रोमांचक खेल का समापन गांव के बुजुर्गों की पहल पर कराया गया.

देवरों पर कोड़ों की बौछारआपको बता दें, कि डोलची होली के बाद खेली गई देवर-भाभी की होली भी आकर्षण का केंद्र रही. इस परंपरा के तहत भाभियां अपने गांव के देवरों पर डोलची से प्रहार करती हैं, और होली खेलती हैं. यह परंपरा आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देती है.

ढोला-मारू की शोभायात्रा के साथ हुआ समापनडोलची होली का समापन परंपरागत ढोला-मारू की शोभायात्रा के साथ हुआ. इस दौरान पूरे गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी. सैकड़ों लोग घरों की छतों से इस अनूठी यात्रा के साक्षी बने. इस ऐतिहासिक आयोजन में राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म भी शामिल हुए और इस परंपरा का हिस्सा बने. बता दें,कि पावटा की डोलची होली केवल एक खेल नहीं, बल्कि वीरता, परंपरा और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है, जिसे देखने के लिए हर साल हजारों लोग उमड़ते हैं.

डोलची होली से जुड़ी ये है मान्यताआपको बता दें, कि डोलची होली से जुड़ी धार्मिक मान्यता भी है. ग्रामीणों के अनुसार यह बल्लू शहीद की याद में खेली जाती है. सालों पहले एक युद्ध में बल्लू सिंह का सिर धड़ से अलग कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने बिना सिर के भी लड़ाई जारी रखी और वीरगति को प्राप्त हुए. उनकी इसी वीरता की स्मृति में गांव वाले हर साल यह परंपरा निभाते हैं. कहा जाता है कि कभी गांव में किसी कारणवश होली नहीं खेली गई थी, जिसके बाद गांव में भीषण अकाल पड़ा. तब ग्रामीणों ने बल्लू शहीद के स्थान पर मन्नत मांगी और हर साल डोलची होली खेलने का प्रण लिया, जिसके बाद अकाल समाप्त हो गया.


Location :

Dausa,Rajasthan

First Published :

March 16, 2025, 09:07 IST

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दौसा में देवर, भाभियों के बीच जोरों से खेली गई डोलची होली, जानें इसके बारे में

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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