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भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद सिंध प्रांत से लाई गई ये खाट, इस गांव होती है इसकी पूजा, जानें महत्व

Last Updated:May 18, 2025, 16:45 IST

अलवर के मोठूका गांव में दरबार साहिब की खाट पर श्रद्धालु मन्नतें मांगते हैं. यह खाट 1947 में सिंध से लाई गई थी. गांव मोठूका में स्वामी दयाराम साहिब का हर साल वैशाख माह में यहां मेला लगता है जिसमें हजारों श्रद्धा…और पढ़ेंX
दरबार
दरबार में रखी दयाराम साहिब की खाट 

हाइलाइट्स

स्वामी दयाराम साहिब की खाट की पूजा होती है.खाट विभाजन के बाद सिंध से लाई गई थी.हर साल वैशाख माह में मोठूका में मेला लगता है.

Alwar News: अलवर के समीप किशनगढ़ बास के गांव मोठूका में दरबार साहिब में एक ऐसी खाट (चारपाई) है जिसके सामने श्रद्धालु आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं. भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद सिंध से स्वामी दयाराम साहिब के दरबार से इस खाट को विभाजन के बाद गांव मोठूका लाया गया. तभी से यहां पर इस खाट (चारपाई) की पूजा की जाती है. दरबार के साईं लाल भगत ने बताया कि 1947 में इस खाट को सिंध से यहां लाया गया.

गांव मोठूका में स्वामी दयाराम साहिब के दरबार में रखी गई इस खाट की सिंधी समाज के लोग पूजा कर अपनी मन्नत मांगते हैं. खाट पर मथा टेक श्रद्धालु प्रार्थना करते हैं तो उनके मन की इच्छा पूरी हो जाती है.

कब हुआ स्वामी दयाराम साहब का जन्म स्वामी दयाराम साहिब का जन्म सिंध प्रदेश (पाकिस्तान) के जिला हैदराबाद तहसील नावा के गांव खेबिरन में सन 1871 में दीपावली पर्व के दिन हुआ था. वहीं वैशाख माह में सन 1935 में स्वामी ने जीते जी समाधि ली उस समय से आज तक हर साल वैशाख माह में इनका मेला भरता आ रहा है जो कि 1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद यह मेला अलवर जिले के मोटूका तहसील किशनगढ़ बास में वैशाख माह की 18 तारीख को हर साल धूमधाम से मनाया जाता है.

वैशाख माह की 18 तारीख को लगता है मेलागांव मोठूका में स्वामी दयाराम साहिब का दो दिवसीय वार्षिक मेला वैशाख की 18 और 19 तारीख को लगता है जो इस साल 16 और 17 मई को है. जिसमें देश के विभिन्न शहरों अजमेर, जयपुर, आगरा, अहमदाबाद, दिल्ली, भोपाल, मंदसौर, ब्यावर, बीकानेर, डूंगरगढ़ , अलवर के अलावा देश के अनेक शहरों सहित विदेश से भी हजारों श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंचकर दरबार में खाट की पूजा कर मन्नतें मांगते हैं.दरबार में मेले की सेवा चालू है. इस दौरान दरबार में सेवा के समय प्रदीप भगतानी, सुनील भगतानी, राम भगतानी, पेरू भगतानी, लाल चंद बच्यानी, कमलेश जयपुर, लीलाराम लख्यानी, सोनू टेलर, रवि, रामोतर और गिर्राज समेत अनेक सेवादारी मौजूद थे. जिन्होंने दरबार के मेले के बारे में अन्य जानकारिया दी.

authorimgMohd Majid

with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news f…और पढ़ें

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विभाजन के बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत से लाई गई ये खाट, इस गांव होती है पूजा

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