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Karwa Chauth Moonrise Timing: करवा चौथ पर सीकर में कब दिखेगा चांद, जानें कितने बजे हो सकेगा दीदार

Last Updated:October 10, 2025, 17:42 IST

Karwa Chauth Moonrise Timing Sikar: सीकर में करवा चौथ का पर्व आज बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. आसमान साफ रहने से महिलाओं को चांद के दर्शन में कोई परेशानी नहीं होगी आज रात 8:13 बजे चंद्रोदय के बाद सुहागिनें अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी. कल्याण मंदिर में सिंदूर वितरण और सामूहिक कथा श्रवण का आयोजन किया गया है. इस शुभ दिन पर महिलाएं सोलह श्रृंगार से सजी-धजी पूजा अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना करेंगी.करवा चौथ

करवा चौथ का पर्व आज पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह व्रत हिंदू महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र और भावनात्मक होता है. सुहागिनें करवा चौथ पर अपने पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना करती हैं. हर वर्ष यह पर्व बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है. इस पर्व पर कई शहरों में महिलाओं के कई विशेष आयोजन भी होते हैं.

करवा चौथ

सीकर में आज आसमान साफ होने के कारण महिलाओं को अर्घ्य देने में कोई समस्या नहीं आएगी. सीकर में आज रात 8 बजकर 13 मिनट पर दिखाई देगा. यह समय चंद्रोदय के लिए निर्धारित है, जिसके बाद महिलाएं छलनी और थाली की ओट में चांद को देखकर अपना व्रत खोलती हैं. सीकर में महिला क्लब के द्वारा सामूहिक कथा श्रावण का भी आयोजन किया गया है.

करवा चौथ

इसके अलावा हर साल की तरह ही इस बार भी चांद निकलने से पहले सीकर के कल्याण मंदिर में सिंदूर वितरण होगा. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में महिलाएं इस मंदिर में पूजा-अर्चना करती है. जानकारी के अनुसार श्री कल्याण धाम सीकर में 7:15 पर संदूर वितरण का कार्यक्रम शुरू होगा. मंदिर के पुजारी के अनुसार इस सिंदूर को लगाने से दांपत्य जीवन हमेशा खुशमय रहता है.

करवा चौथ

धर्म विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ढांढण ने बताया कि करवा चौथ व्रत में महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं. वे पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए श्रद्धा भाव से व्रत का पालन करती हैं. यह तपस्या पति की मंगलकामना और परिवार की समृद्धि के लिए की जाती है. शाम के समय महिलाएं सोलह श्रृंगार से सजकर करवा माता की पूजा करती हैं. वे एकत्र होकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं.

करवा चौथ

कथा के बाद महिलाएं एक-दूसरे को आशीर्वाद देती हैं और व्रत की सफलता की कामना करती हैं. जब रात को चंद्रमा का उदय होता है, तब महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती है. वे चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित कर अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं. इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का समापन करती हैं. यह व्रत प्रेम और समर्पण का प्रतीक है.

करवा चौथ

धर्म विशेषज्ञ चंद्रप्रकाश ढांढण ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस तिथि को सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. वे इस दिन का इंतजार पूरे वर्ष करती हैं और विशेष तैयारी के साथ व्रत रखती हैं.

करवा चौथ

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चतुर्थी तिथि 9 अक्तूबर की रात 10:54 बजे से आरंभ होगी. यह तिथि 10 अक्तूबर की शाम 7:38 बजे तक रहेगी. अतः व्रत और पूजा दोनों का पालन 10 अक्तूबर को किया जाएगा. शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना गया है. करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा. कुल पूजा अवधि 1 घंटा 14 मिनट की होगी. इस समय में पूजा और कथा सुनाना बहुत शुभ माना गया है.

First Published :

October 10, 2025, 17:42 IST

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