इजरायली कलाकार ओमेर गोरेन बोले- ‘ऊं’ भारत की आत्मा है, पुष्कर में टैटू बनवाना आध्यात्मिक अनुभव

अशोक सिंह भाटी/अजमेर. राजस्थान के पवित्र तीर्थस्थल पुष्कर, जहां ब्रह्मा मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा हर आने वाले को आकर्षित करती है, यहां कला और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला. प्रसिद्ध टैटू आर्टिस्ट जिम्मी कल्याणा ने इजरायली म्यूजिक प्रोड्यूसर ओमेर गोरेन, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक म्यूज़िक सर्कल में Electrockrat के नाम से जाना जाता है, के लिए एक विशेष ‘ऊं’ टैटू तैयार किया. यह टैटू न केवल बॉडी आर्ट का शानदार नमूना है, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सनातन धर्म की गहन दार्शनिक ध्वनि ‘ऊं’ के माध्यम से एक आध्यात्मिक पुल का प्रतीक बन गया है.
सनातन धर्म में ‘ऊं’ (ऊंकार) का महत्व असीम है. वेदों और उपनिषदों में इसे ब्रह्मांड की आदि ध्वनि माना गया है, जो सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय का प्रतिनिधित्व करती है. यह तीन अक्षरों अ, उ, म से मिलकर बना है, जो जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाओं को दर्शाता है. ध्यान, योग और मंत्र जाप में ‘ऊं’ का उच्चारण मन को शांत करता है, चक्रों को सक्रिय बनाता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है. भगवद्गीता और मांडूक्य उपनिषद में इसे ‘प्रणव’ कहा गया है, जो सभी मंत्रों का मूल है. यह न केवल ध्वनि है, बल्कि कंपन ऊर्जा है जो ब्रह्मांड के साथ तालमेल बिठाती है. पुष्कर जैसे स्थान पर, जहां ब्रह्मा की सृष्टि ऊर्जा प्रबल है, ‘ऊं’ का टैटू बनाना एक पवित्र अनुष्ठान जैसा है.
इजराइल के मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर हैं ओमेर गोरेन
ओमेर गोरेन, जो इलेक्ट्रॉनिक और मेडिटेटिव संगीत के फ्यूजन के लिए मशहूर हैं, भारत यात्रा के दौरान पुष्कर पहुंचे हैं. उनकी रचनाओं में अक्सर आध्यात्मिक वाइब्रेशन झलकती है, जो पूर्वी दर्शन से प्रेरित है. जिम्मी कल्याणा से मुलाकात के बाद उन्होंने ‘ऊं’ को चुना, जो उनके संगीत की लय और सनातन की ध्वनि का मेल खाता था. ओमेर ने कहा, “मैंने ‘ऊं’ को हमेशा भारत की आत्मा के रूप में महसूस किया. इसे शरीर पर उत्कीर्ण करना मेरे लिए भावनात्मक यात्रा थी. यह मेरे संगीत की तरह, शांति और ऊर्जा का मिश्रण है.” टैटू डिजाइन में ‘ऊं’ को स्टाइलिश कर्व्स और मिनिमलिस्टिक लाइन्स के साथ बनाया गया, जो बॉडी पर कंपन पैदा करता प्रतीत होता है.
टैटू आर्ट को भारतीय संस्कृति से जोड़ रहे हैं जिम्मी कल्याण
जिम्मी कल्याणा, जो पुष्कर में वर्षों से टैटू आर्ट को भारतीय संस्कृति से जोड़ रहे हैं, बताते हैं, “विदेशी कलाकार जब ‘ऊं’ जैसे प्रतीक से जुड़ते हैं, तो यह सिर्फ आर्ट नहीं, बल्कि एनर्जी का आदान-प्रदान होता है. सनातन धर्म में ‘ऊं’ सृष्टि का बीज मंत्र है, जो ध्यान में मन को केंद्रित करता है. पुष्कर की आध्यात्मिकता इसे और गहरा बनाती है.” जिम्मी के स्टूडियो में ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय कलाकार आते हैं, जो भारतीय प्रतीकों को अपनाते हैं, लेकिन ‘ऊं’ का चयन विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा. सनातन धर्म के ‘ऊं’ ने इजरायल के संगीतकार को अपनी गोद में समेट लिया, जहां कला, संगीत और ध्यान एक ही वाइब्रेशन पर मिले. सोशल मीडिया पर यह टैटू वायरल हो रहा है, जो दर्शाता है कि सनातन की प्राचीन ध्वनि आज भी दुनिया को एकजुट कर रही है.



