मेवड़ा नागौर का अनोखा स्थल और रोग इलाज

Last Updated:November 06, 2025, 16:29 IST
नागौर जिले के पादूकलां से उत्तर में 6 किलोमीटर दूर स्थित यह अनोखा मंदिर करीब 1600 वर्ष पुराना है. इसे नाथ संप्रदाय के योगी राजा भूतहरि के शिष्य, अच्छीनाथ महाराज, के समाधि स्थल के रूप में जाना जाता है. मंदिर में अच्छीनाथजी की जीवित समाधि सहित कुल 25 समाधियां हैं, जिनमें 15 जीवित हैं.
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नागौर. जिले के पादूकलां से उत्तर दिशा में 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित करीब 1600 वर्ष पूर्व बना एक अनोखा मंदिर मौजूद है. इस मंदिर को नाथ सम्प्रदाय के योगी पुरुष राजा भूतहरि के चार शिष्यों में से एक मेवड़ा में अच्छीनाथ महाराज के समाधि स्थल के रूप में जाना जाता है. इंसान के पीठ पीछे एक ऐसी गांठ होती है जिसे अदीठ कहते हैं, जो प्रत्यक्ष आंखों से दिखाई नहीं देती. इसके अलावा गले और कान के आसपास उठने वाली गांठें जैसे कई असाध्य रोग भभूति लगाने मात्र से ही ठीक हो जाते हैं. मंदिर में अच्छीनाथजी की जीवित समाधि स्थल सहित कुल पच्चीस समाधियां बनी हुई हैं, जिनमें से 15 जीवित समाधियां हैं.
बहुत पहले पूर्व जोधपुर दरबार के भी अदिठ रोग हुआ, लेकिन इसका कहीं इलाज नहीं हुआ, तो महाराज हार-थककर बैठ गए. किसी ने उन्हें अच्छीनाथजी का नाम बताया और जानकारी दी कि वहां भभूति मात्र से ही अदिठ रोग ठीक हो जाता है. जोधपुर दरबार ने अच्छीनाथजी को लाने के लिए मेवड़ा भेजा, महाराज ने कहा कि “आप लोग चलों, मैं वहां पहुंच जाऊंगा.” यह वाकया सुनकर दरबारी अचंभित हो गए कि बूढ़ा आदमी पैदल कैसे पहुंचेगा। दरबारियों के जोधपुर पहुंचने से पहले ही अच्छीनाथजी ने जोधपुर पहुंचकर गेट के पास धूणा लगाकर बैठ गए. वहां भभूति का पिंड बनाकर उनकी पीठ पर लगाया गया, जिससे राहत मिली.
अच्छीनाथजी का जीवन परिचय
1600 वर्ष पूर्व भूतहरी महाराज ने बड़ा आसन, राताढुंडा थांवला में 12 वर्ष तक तपस्या की. इस दौरान उन्होंने भभूति के पिंड से चार शिष्य बनाए, जिनमें भूचरनाथ, खेचरनाथ, अरवीनाथ और अच्छीनाथ शामिल थे. उन्होंने भी 12 वर्ष तक थांवला में तपस्या के बाद मेवड़ा में जीवित समाधि ली. महंत का दायित्व निभा रहे पीर योगी लक्ष्मणनाथ महाराज ने बताया कि भूतहरि ने बड़ा आसन, राताढुंडा थांवला में 12 वर्ष तपस्या की और भभूति के पिंड से चार शिष्य बनाए. जिनमें भूचरनाथ, खेचरनाथ, अरवीनाथ और अच्छीनाथ हुए. पीर योगी लक्ष्मणनाथ महाराज ने बताया कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से शरीर के कोड रोग का इलाज होता है. इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अच्छीनाथजी महाराज की समाधि के दर्शन करने आते हैं, इसके अलावा मन्नत का धागा बांधने से यहां पर लोगों की मनोकामना भी पूरी होती है.
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
November 06, 2025, 16:29 IST
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नागौर का अच्छीनाथ महाराज मंदिर, जानिए क्या है इसकी खासियत



