Documentary: सीकर: जहां भेड़िए से शुरू हुई कहानी, वहीं गढ़ा गया शिक्षा का साम्राज्य – वीरता से लेकर NEET टॉपर्स तक की नगरी!

सीकर : मैं सीकर हुं, मुझे राव दौलत सिंह ने राजस्थान की राजधानी जयपुर की स्थापना से 40 साल पहले 1687 ईस्वी में बसाया था. उस समय मुझे वीरभान-का-बास के नाम से जाना जाता था. स्थापना के समय मैं एक छोटा-सा गांव हुआ करता था. मेरी स्थापना के समय जब राव दौलत सिंह महल के निर्माण के लिए जगह देख रहे थे तब “एक भेड़ अपने बच्चे को बचाने के लिए भेड़िए से लड़ गई थी और अपने बच्चे को बचाया था.” यह देखकर रावराजा ने इसी जगह पर सुभाष चौक में अपना महल बनाया, जिसका नाम सीकर गढ़ रखा गया. इसके बाद मेरा विस्तार करते हुए उन्होंने यहां लोगों को बसाया और कई गांव बनाए. ऐसे में मुख्य रूप में मेरे जन्मदाता राव दौलत सिंह थे. इस दौरान उन्होंने यहां गांव बसाने और जनसंख्या बढ़ाने पर अधिक ध्यान दिया.
राव राजा दौलत सिंह के कई साल राज करने के बाद उनके पुत्र शिव सिंह ने 1721 में मेरी गद्दी संभाली. इन्होंने ही मेरा नाम वीरभान-का-बास से बदलकर सीकर रख. राजा दौलत सिंह ने 1748 तक मुझ पर राज किया. उन्होंने सबसे अधिक काम मेरी बनावट पर किया. उन्होंने मेरी अधूरी किला-दीवारों को पूरा किया. इसके अलावा आक्रमणकारियों और दुश्मनों से बचने के लिए पूरे शहर को परकोटे से घेरा. इसके अलावा लोगों को हिंदू धर्म और संस्कृति से जोड़ने के लिए गोपीनाथ जी सहित कई मंदिर की स्थापना की और कला-संस्कृति को बढ़ावा दिया और हर्ष पर्वत पर भगवान शिव का मंदिर बनाया जो कि प्राचीन शिव मंदिर के पास स्थित है. इसके बाद राव सम्रथ सिंह 1748 में मेरे ताजा बने और 1754 तक राज किया. इस दौरान वे आंतरिक कलह में उलझे रहे. इस कारण मेरे में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ. इसके बाद राव नाहर सिंह ने 1754 मेरा शासन संभाला और वे 1756 तक मेरे राजा रहे. उनका शासनकाल छोटा रहा लेकिन उन्होंने सीकर सैन्य शक्ति को मजबूत बनाया. फिर 1756 में राव चंद सिंह आए और 1763 तक मेरी शासन की बागडोर संभाली और उन्होंने अपने पूर्व जो की व्यवस्था को स्थिर रखा.
राव राजा देवी सिंह का स्वर्णकाल1763 में आए रावताजा देवी सिंह, इनका कार्यकाल मेरे विकास का स्वर्ण काल रहा. इन्होंने उन्होंने मुझे और मजबूत किया और सीमा का विस्तार करते हुए नया किला बनवाया. इस दौरान उन्होंने नए शहर रामगढ़ शेखावाटी की नींव रखी. इसके बाद 1795 में इन्होंने अपने शासन की भाग दौड़ अपने पुत्र राव राजा लक्ष्मण सिंह को दे दी. राजा लक्ष्मण सिंह ने कला, संस्कृति, धर्म और शिक्षण को बढ़ाया. इन्होंने भी अपनी सीमा का विस्तार करते हुए प्रसिद्ध लक्ष्मणगढ़ किला बनवाया. इन्होंने ही सीकर को शिक्षा नगरी बनाने का सपना सबसे पहले देखा था. राजा लक्ष्मण ने 1833 तक मुझ पर राज किया.
राम प्रताप ने किया शासन सुधारइसके बाद 1833 में आए राव राजा राम प्रताप सिंह इन्होंने 1850 तक मेरे शासन की बागडोर संभाली. इनकी उम्र बहुत कम होने के बाद भी उन्होंने कई आंतरिक मामलों में शासन में सुधार किया. फिर 1851 में राव राजा भैरों सिंह आए और उन्होंने 1886 तक मेरे ऊपर राज किया. इनकी अवधि में मेरे अंदर सामाजिक विकास और प्रशासन सुधार के कार्य सबसे अधिक हुए. फिर शिक्षा और चिकित्सा की बुनियादी नींव रखने वाले मेरे शासक राव राजा सर माधो सिंह आए, उन्होंने 1886 से लेकर 1922 तक शिक्षा, चिकित्सा एवं बुनियादी सेवाओं पर काम किया. इस दौरान उन्होंने सागर-तालाब बनवाया और पहली बार बिजली लेकर आए. इसी समय आधुनिक सीकर के निर्माण की नींव रखी गई थी.
राव राजा कल्याण सिंह ने बढ़ाया विकास कार्यइसके बाद 1922 में आए राव राजा कल्याण सिंह इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान शहर के अंदर कई विकास कार्य करवाए. आम लोगों को राज दरबार से जोड़ा. राजा कल्याण ने भी अपने दादा परदादाओं के सपने को पूरा करने के लिए शिक्षा-संस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया. इन्होंने 34 साल तक मुझ पर राज किया. 15 जून 1954 को राजा कल्याण सिंह ने अपने शासन की बागडोर राज्य सरकार को सौंप दी थी. राजशाही व्यवस्था खत्म होने के बाद राव राजा कल्याण सिंह के पुत्र हुए राजकुमार हरदयाल सिंह, इनका विवाह नेपाल की राजकुमारी त्रैलोक्यराज्यलक्ष्मी के साथ हुआ. राजकुमार की मृत्यु के बाद त्रैलोक्यराज्यलक्ष्मी ने विक्रम सिंह को गोद लिया गया. वे वर्तमान में काठुमांडु रहते हैं.
लक्ष्मण सिंह ने बढ़ाई शिक्षा-धाराजब एक ठिकाने के रूप में मेरी स्थापना हुई थी तब ही यहां के राजाओं ने सोच लिया है कि यह एक गढ़ और ठिकाना न बने, बल्कि शिक्षा-संस्कृति का केन्द्र बने. राजा देवी सिंह, लक्ष्मण सिंह और बाद के माधो सिंह और कल्याण सिंह ने मुझे में शिक्षा-संस्थान, कला-महल, पुस्तकालय व सड़कों का विकास पर अधिक बल दिया. आज जो मैं, धीरे-धीरे शिक्षा नगरी के रूप में प्रसिद्ध होता जा रहा हूं उनकी इसका कारण यहां के राजा ही है.
अब का सीकर आज मैं पूरे भारत के स्टूडेंट्स और अभ्यर्थियों के लिए JEE, NEET और सेना भर्ती की तैयारियों का केंद्र बना चुका है. चिकित्सा के क्षेत्र में भी आज मैं राजस्थान के अधिकांश जिलों से आगे हुं. मेरे अंदर विभिन्न भर्ती परीक्षा की दर्जनों कोचिंग संस्थान है जहां पढ़ने के लिए हर साल लाखों बच्चे और उनके माता पिता बेग में कपड़ों के साथ सपने और उम्मीदें लेकर आते हैं. मेरे यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने कई बार पूरे देश को टॉप किया है. पिछले दो साल से मेडिकल NEET परीक्षा ऑल इंडिया टॉपर यहां से आ रहे हैं. मेडिकल ही नहीं, JEE, NDA, UPSC, RAS, Bank, SSC और टीचर्स भर्ती परीक्षाओं में यहां पढ़कर सफल हो चुके.



