National

पाकिस्‍तान F-16 पर इंस्‍टाल कर चुका था परमाणु बम… पूर्व CIA अफसर का खुलासा, इरादा बेहद खतरनाक

Last Updated:November 07, 2025, 17:32 IST

Pakistan News Today: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने खुलासा किया कि 1990 में पाकिस्तान अपने F-16 लड़ाकू विमानों पर परमाणु हथियार फिट कर रहा था. उन्होंने इसे इस्लामिक बम करार देते हुए कहा कि अमेरिका की सैन्य मदद पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में लगी. बार्लो के मुताबिक, वॉशिंगटन ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं ताकि अफगान युद्ध में पाकिस्तान का साथ बना रहे.पाकिस्‍तान F-16 पर इंस्‍टाल कर चुका था परमाणु बम... पूर्व CIA अफसर का खुलासासीआईए के पूर्व अफसर ने बड़ा खुलासा किया.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने वाशिंगटन और इस्लामाबाद दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. न्‍यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में बार्लो ने दावा किया कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को 1990 में ही पक्के सबूत मिल गए थे कि पाकिस्तान अपने F-16 लड़ाकू विमानों पर परमाणु हथियार फिट कर रहा था.

बार्लो के मुताबिक, “हमने 1990 में देखा कि पाकिस्तान के F-16 पर न्यूक्लियर बम लगाए जा रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं था कि ये विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं.” उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस परियोजना को ‘इस्लामिक बम’ या ‘मुस्लिम बम’ कहता था और इसके पीछे जनरल्स और वैज्ञानिक ए.क्यू. खान की सोच थी. बार्लो ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैन्य और गुप्त मदद से पाकिस्तान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, जबकि अमेरिका को इसकी पूरी जानकारी थी.

उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल ने कभी पाकिस्तान के कहूटा परमाणु संयंत्र पर प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक (पहले हमला करने) की योजना बनाई थी. बार्लो ने कहा, “अफसोस है कि इंदिरा गांधी ने उस वक्त इस योजना को मंजूरी नहीं दी. अगर देतीं तो शायद आज कई समस्याएं खत्म हो चुकी होतीं.”

रिचर्ड बार्लो ने खुलासा किया कि जब उन्होंने इन सच्चाइयों को उजागर करने की कोशिश की, तो उनकी जिंदगी तबाह हो गई. उन्होंने कहा, “मैंने सब कुछ खो दिया नौकरी, शादी, परिवार, सब.” बार्लो को अमेरिका की ‘व्हिसलब्लोअर’ लिस्ट में एक साहसी अफसर के तौर पर जाना जाता है, जिसने अपने ही देश की नीति पर सवाल उठाने का साहस दिखाया. उनके आरोपों से यह पुराना सवाल फिर जीवंत हो गया है कि क्या अमेरिका ने वाकई पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध किया था या यह विरोध केवल दिखावे का हिस्सा था? 1980 के दशक में जब पाकिस्तान अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका का अहम सहयोगी था, तब वॉशिंगटन ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं.

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को कहूटा में यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे दबा दिया ताकि पाकिस्तान के साथ सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ बरकरार रहे. अब बार्लो के ये बयान न सिर्फ इतिहास की परतें खोल रहे हैं, बल्कि अमेरिका की “दोहरी नीति” पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या वाकई पाकिस्तान का परमाणु हथियार कार्यक्रम सिर्फ इस्लामाबाद का नहीं, बल्कि वॉशिंगटन की चुप्पी से पोषित एक ‘गुप्त साझेदारी’ थी?

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :

November 07, 2025, 17:32 IST

homenation

पाकिस्‍तान F-16 पर इंस्‍टाल कर चुका था परमाणु बम… पूर्व CIA अफसर का खुलासा

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj