Rajasthan

परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन, अनफिट स्कूल बसों की अब खैर नहीं, फिटनेस-बीमा से लेकर इमरजेंसी गेट तक होगी सख्त जांच

Last Updated:November 10, 2025, 12:43 IST

Sikar News Hindi : प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों के बाद परिवहन विभाग हरकत में आ गया है. अब सभी स्कूल वाहनों की फिटनेस, बीमा और सुरक्षा मानकों की सघन जांच होगी. बिना परमिट या फिटनेस वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. इस अभियान का मकसद है – बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिवहन व्यवस्था में सख्ती.स्कूल बस

सीकर : प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए अब परिवहन विभाग ने स्कूलों में चलने वाले वाहनों की विशेष जांच का अभियान शुरू कर दिया है. जयपुर के मनोहरपुरा में हाल ही में हुई एक दुर्घटना में शामिल बस की न तो फिटनेस थी और न ही बीमा. इसी घटना के बाद विभाग ने रूट बस सहित सभी स्कूलों के वाहनों की पूरी जांच करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी कोई भी घटना दोबारा न हो. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन नियमों का सख्ती से पालन कराना है.

स्कूल बस

अब परिवहन विभाग स्कूल संचालकों के साथ मिलकर बाल वाहनियों की जांच करेगा. जांच में वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट, ब्रेक, स्टीयरिंग, टायर की स्थिति, इमरजेंसी गेट और फर्स्ट एड बॉक्स जैसी अनिवार्य सुविधाओं की पुष्टि की जाएगी. सभी वाहनों में इन सुरक्षा उपकरणों का होना अब जरूरी कर दिया गया है. विभाग का कहना है कि अगर किसी वाहन में सुरक्षा मानकों की कमी पाई जाती है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. इस प्रक्रिया से न केवल बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा.

स्कूल बस

अभियान के दौरान परिवहन विभाग के अधिकारी खुद स्कूलों में जाकर वाहनों की जांच करेंगे. स्कूलों में खड़ी सभी गाड़ियों की जांच सूची तैयार की जाएगी और वाहन मालिकों से संबंधित दस्तावेज मांगे जाएंगे. खास बात यह है कि इस बार वे वाहन भी जांच के दायरे में आएंगे जो लंबे समय से सड़क पर नहीं चल रहे हैं. अभियान पूरा होने के बाद प्रत्येक वाहन की फिटनेस रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी. इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि कौन से वाहन सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं और किनमें सुधार की आवश्यकता है.

स्कूल बस

सीकर जिले में वर्तमान में लगभग तीन हजार स्कूली वाहन पंजीकृत हैं. इनमें मिनी बसें, जीपें और टैंपो शामिल हैं जो बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने का कार्य करते हैं. अब इन सभी वाहनों के चालकों और परिचालकों का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा हर वाहन पर ऑन स्कूल ड्यूटी का बोर्ड लगाना होगा ताकि यह साफ हो सके कि वाहन केवल स्कूली उपयोग में है. इस कदम से वाहनों की पहचान आसान हो जाएगी.

स्कूल बस

परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के एडीशनल कमिश्नर ओमप्रकाश बुनकर ने निर्देश दिए हैं कि 10 नवंबर तक सभी स्कूल वाहनों की जांच पूरी कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि किसी वाहन में फिटनेस या बीमा की कमी पाई जाती है तो उसका संचालन तत्काल रोका जाएगा. विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना वैध परमिट या लाइसेंस के बच्चों को ढोने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि सड़क सुरक्षा को कोई खतरा न रहे.

स्कूल बस

बाल वाहिनी योजना के तहत अब जिले के हर स्कूल में एक निगरानी समिति बनाई जाएगी. यह समिति स्कूल वाहनों की नियमित जांच करेगी और किसी भी तरह की तकनीकी या दस्तावेजी कमी की जानकारी परिवहन विभाग को देगी. इसके अलावा समिति का दायित्व यह भी होगा कि वह समय-समय पर वाहनों की स्थिति का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर सुधार के लिए निर्देश जारी करें. समिति में स्कूल प्रबंधन, परिवहन प्रतिनिधि और अभिभावकों के सदस्य भी शामिल होंगे ताकि निगरानी सुनिश्चित की जा सके.

स्कूल बस

परिवहन विभाग के अधिकारी इन समितियों के सहयोग से शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित यातायात को लेकर जागरूकता अभियान चलाएंगे. इसके अंतर्गत छात्र-छात्राओं को सड़क पार करने के नियम, हेलमेट और सीट बेल्ट का महत्व, तथा बस में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने के तरीके सिखाए जाएंगे. विभाग का मानना है कि बच्चों में बचपन से ही यातायात नियमों की समझ विकसित की जानी चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें. इस पहल से न केवल स्कूल परिवहन सुरक्षित बनेगा बल्कि समाज में भी सड़क सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा.

First Published :

November 10, 2025, 12:40 IST

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स्कूल बसों की बढ़ी टेंशन, बिना फिटनेस-बिना बीमा वाहनों पर चलेगा डंडा!

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