बाबा श्याम की नगरी बनी रियल एस्टेट का नया हब…आसमान छूती जमीनों की कीमतें, 25 लाख की जमीन हुई 6 करोड़ की

सीकर. बाबा श्याम की महिमा का असर अब देश-विदेश में तेजी से फैलने के साथ ही भक्तों में यहां स्थायी रूप से बसने की चाह भी बढ़ती जा रही है. यही कारण है कि श्याम नगरी और इसके आसपास का इलाका अब रियल एस्टेट निवेश का नया केंद्र बन चुका है. पिछले कुछ वर्षों में यहां जमीनों की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है. जो जमीन पहले लाखों में बिकती थी, वह अब दो से छह करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच चुकी है. जय प्रकाश जाजोरा, जो कि खाटूश्यामजी के पास डूकिया गांव में श्री श्याम वाटिका कॉलोनी को डेवलप कर रहे हैं, के अनुसार कोरोना के बाद खाटूश्यामजी क्षेत्र रियल एस्टेट के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले इलाकों में शामिल हो गया है.
जयपुर, दिल्ली और सीकर की कई कंपनियों ने यहां अपने प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं. इसके अलावा जयपुर के बड़े रियल एस्टेट व्यापारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि खाटू और इसके 15 किलोमीटर के दायरे में करीब 200 कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं, जिनमें से 150 से अधिक कॉलोनियां पिछले पांच सालों में बसी हैं. साथ ही, 500 फ्लैट्स और 100 से अधिक विला तैयार होकर बिक चुके हैं.
25 लाख की जमीन 6 करोड़ की हुई
रियल एस्टेट से जुड़े राजेंद्र सुरपुरा, जो कि खाटू एलिगेंस कॉलोनी डेवलपर हैं, ने बताया कि जयपुर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों की नजदीकी, रेलवे स्टेशन की घोषणा और 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला श्याम कोरिडोर निवेशकों का रुझान बढ़ा चुका है. अब गुजरात और हरियाणा के डेवलपर्स भी इस क्षेत्र में निवेश करने आ चुके हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना से पहले खाटू में जमीन की दर लगभग 25 लाख रुपये प्रति बीघा थी, जो अब बढ़कर 2 से 6 करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है.
रजिस्ट्रियों के आंकड़े भी इस तेजी को दर्शाते हैं
रजिस्ट्रियों के आंकड़े भी इस तेजी को साबित करते हैं, पिछले कुछ सालों में यहां रजिस्ट्रियों के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं. साल 2023 में दांतारामगढ़ में 6040 रजिस्ट्रियां हुई, जो 2024 में बढ़कर 7920 हो गई, 2025 में अब तक 3748 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं. दांतारामगढ़ में अब तक 15.62 करोड़ रुपये और पलसाना में 17.26 करोड़ रुपये की रजिस्ट्री हो चुकी है. दिल्ली, जयपुर सहित देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां खाटूश्यामजी में कॉलोनियां और बिल्डिंग बना रही है.
लोग क्या कह रहे हैं?
खाटूश्यामजी में आशियाना खरीदने की चाह के पीछे भक्तों के अपने अनुभव भी हैं, दिल्ली निवासी अंजू लाली जैन बताती हैं, “हम खाटू को अपना गांव मानते हैं. जब भी यहां आते हैं, मन को असीम शांति मिलती है, पहले धर्मशालाओं में ठहरते थे, अब अपना घर बना लिया है.” वहीं, वापी (गुजरात) की अंजली देवी कहती हैं, “हम हर महीने बाबा श्याम के दर्शन करने आते हैं, इसलिए खुद का आशियाना खरीद लिया.” जयपुर के गौरव कुमावत ने बताया, “कोरोना के बाद श्याम नगरी में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ रही है. यहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद में मैंने खाटूश्यामजी के पास कुछ निवेश किया है.”



