Rajasthan

Dholpur Ancient Temples and Mythological History

Last Updated:November 17, 2025, 10:24 IST

Dholpur News: धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर भगवान राम, कृष्ण, मचकुंड ऋषि और राजाओं के इतिहास से जुड़े हैं. ताड़का वध का यज्ञ, कालयावन का संहार और राजवंश की मनोकामना इन मंदिरों को आज भी रहस्य और आस्था का केंद्र बनाते हैं.धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर—राम-कृष्ण इतिहास और रहस्य

अचलेश्वर महादेव मंदिर धौलपुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर चंबल के घने बीहड़ों में स्थित है. इस मंदिर को लेकर यह प्राचीन मान्यता है कि किसी समय ऋषि-मुनियों का समूह चंबल के घने बीहड़ों में रात्रि विश्राम के लिए रुका था. स्वप्न में उनको वहाँ पर एक शिवलिंग दिखा और उन्होंने प्राण-प्रतिष्ठा के साथ उस शिवलिंग को स्थापित किया. इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दिन में तीन बार रंग बदलता है—सुबह पीला, दोपहर को पीला और हरा रंग का मिश्रण, और शाम होते-होते यह श्याम रंग का हो जाता है.

धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर—राम-कृष्ण इतिहास और रहस्य

चोपड़ा मंदिर का निर्माण धौलपुर के महाराज भगवंत सिंह के दीवान रहे राजधर कन्हैया लाल ने 1856 में कराया था. यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 150 फीट है. मंदिर के दरवाज़ों पर आकर्षित मूर्तियाँ उकेरी गई हैं, जो उस समय की बेहतरीन कला और वास्तुकला को दर्शाती हैं. इसके अलावा, मंदिर के प्रवेश द्वार पर ब्रह्मा जी की मूर्ति विराजमान है, जो इसे धौलपुर के प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों में एक विशेष स्थान दिलाती है.

धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर—राम-कृष्ण इतिहास और रहस्य

धौलपुर ज़िला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित सेपऊ महादेव मंदिर एक ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर है. इसके बारे में कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम ने अपने गुरु विश्वामित्र के साथ यहीं पर यज्ञ किया था. इसके बाद, उन्होंने इस शिवलिंग को जल अभिषेक करके प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने यहीं पर अपने गुरु विश्वामित्र के आदेश पर ताड़का का वध किया था. यह मंदिर आज भी भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र है और इसकी कहानी भगवान राम के जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ी हुई है.

धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर—राम-कृष्ण इतिहास और रहस्य

भगवान नरसिंह को धौलपुर रियासत के जाट राजाओं का कुल देवता कहा जाता है. इस मंदिर से जुड़ी कहानी के अनुसार, जब गोहद के महाराज कीरत सिंह ग्वालियर के सिंधिया राजाओं से युद्ध में गोहद राज्य हार गए थे, तो उन्हें जंगलों में भटकना पड़ा था. जंगलों में ही महाराज कीरत सिंह को साधु-संतों ने भगवान नरसिंह की प्रतिमा दी और कहा कि 6 महीने पूजा करने के बाद आप किसी न किसी राज्य के राजा बन जाएँगे. 6 महीने भगवान नरसिंह की पूजा करने के बाद महाराज कीरत सिंह धौलपुर रियासत के राजा बने, जिसके बाद उन्होंने भगवान नरसिंह का भव्य मंदिर स्थापित करवा दिया.

धौलपुर के 5 प्राचीन मंदिर—राम-कृष्ण इतिहास और रहस्य

राजस्थान के इतिहास में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जिनका निर्माण राजा-महाराजाओं ने करवाया था. एक ऐसा ही मंदिर है धौलपुर ज़िले में लाडली जगमोहन जी का मंदिर, जिसका निर्माण आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी संवत 1899 में महाराज भगवंत सिंह के दीवान राजधर कन्हैयालाल ने करवाया था. इस मंदिर का निर्माण धौलपुर के ही प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से करवाया गया था, जो न केवल इसकी भव्यता बढ़ाता है, बल्कि इसे एक विशिष्ट स्थानीय पहचान भी देता है.

First Published :

November 17, 2025, 10:24 IST

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धौलपुर के वो 5 रहस्यमयी मंदिर जहां आज भी महसूस होती है दिव्य शक्ति!

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