मार्गशीर्ष मास में कात्यायनी व्रत क्यों है शुभ? जानें कैसे मिलता है मनचाहा वर और दूर होती है सभी बाधाएं

Last Updated:November 18, 2025, 08:51 IST
Margashirsha Month Importance: मार्गशीर्ष मास को हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र मास माना गया है. इसी माह में श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था, इसलिए यह मास जप, तप और साधना का सर्वोत्तम काल है. करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा के अनुसार, इस महीने किए गए दान-धर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है. विवाह में बाधा आने पर मां कात्यायनी का व्रत करने की भी विशेष मान्यता है. इस माह की मोक्षदा एकादशी को मोक्ष और पापों से मुक्ति देने वाली तिथि माना गया है.
करौली. हिंदू पंचांग में मार्गशीर्ष मास का विशेष और दिव्य महत्व बताया गया है. यह वही पवित्र मास है जिसमें श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को जीवन का परम ज्ञान श्रीमद्भगवद्गीता उपदेश स्वरूप प्रदान किया था. शास्त्रों के अनुसार स्वयं श्रीकृष्ण ने भी गीता में कहा है “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्”, अर्थात् “मैं मासों में मार्गशीर्ष हूँ.” इसी कारण से सनातन संस्कृति में यह महीना तप, भजन, साधना और कल्याणकारी कर्मों का सर्वोत्तम समय माना जाता है.
करौली के आध्यात्मिक गुरु पं. हरिमोहन शर्मा बताते हैं कि मार्गशीर्ष माह का महत्व केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मास व्यक्ति के आध्यात्मिक उत्थान का भी उत्कृष्ट अवसर है. वे बताते हैं कि श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंध में इस महीने का उल्लेख मिलता है और इसके महत्व का कारण यही है कि इसमें गीता का उपदेश पूरा हुआ था. इसीलिए इस मास को अगहन नाम से भी जाना जाता है.
मां कात्यायनी देवी का व्रत करने से मनोवांछित वर प्राप्त होता है
आध्यात्मिक गुरु के अनुसार, इस माह में किए गए जप, तप, यज्ञ, दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है. वे कहते हैं कि इस दौरान लोगों को अधिक से अधिक सात्त्विक आहार लेना चाहिए, संयम का पालन करना चाहिए और मानसिक शुद्धता बनाए रखनी चाहिए. इस महीने आत्मिक विकास, शांति और मन की स्थिरता के लिए विशेष साधनाएं भी की जाती हैं. पं. शर्मा बताते हैं कि जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही हो, उन्हें इस मास में मां कात्यायनी की आराधना अवश्य करनी चाहिए. श्रीमद्भागवत महापुराण में भी वर्णन है कि कात्यायनी देवी का व्रत करने से मनोवांछित वर प्राप्त होता है.
मोक्षदा एकादशी को भी माना गया है अत्यंत शुभ
प्राचीन काल में ब्रज की गोपियों ने भी इसी मास में कात्यायनी व्रत कर भगवान कृष्ण को अपने वर के रूप में प्राप्त करने की प्रार्थना की थी. इस महीने में आने वाली मोक्षदा एकादशी को भी अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है. शास्त्र कहते हैं कि इसी एकादशी के दिन श्रीकृष्ण का गीता उपदेश पूर्ण हुआ था. मोक्ष प्रदान करने वाली इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और जीवन में सद्गति प्राप्त होती है. मार्गशीर्ष मास को जप, तप, यज्ञ, दान और कीर्तन का श्रेष्ठतम समय बताया गया है. आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना मन, वचन और कर्म को पवित्र बनाकर व्यक्ति को परमात्मा के निकट ले जाने वाला माना जाता है. इसलिए इस पूरे महीने लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ साधना कर कल्याण की कामना करते हैं.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें
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Karauli,Rajasthan
First Published :
November 18, 2025, 08:49 IST
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कात्यायनी व्रत मार्गशीर्ष में ही क्यों करें? जानें धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



