अब लड़कियां नहीं डरेंगी – सेल्फ डिफेंस सीखकर बनेंगी हर वार की जवाबदार

खैरथल–तिजारा जिले के मुंडावर स्थित राठ पीजी महिला महाविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर ने छात्राओं में नया उत्साह और आत्मविश्वास जागृत किया. शिविर के दौरान महिला पुलिस कॉन्स्टेबल मोना चौधरी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “नारी अबला नहीं, सबला है… बस आवश्यकता है अपनी शक्ति को पहचानने की.” उनका यह संदेश बालिकाओं के मन में साहस और जागरूकता का संचार करता नजर आया.
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था, ताकि वे किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में निडर होकर सामना कर सकें. प्रशिक्षण का संचालन महिला कॉन्स्टेबल मोना चौधरी और ममता ने संयुक्त रूप से किया. मोना चौधरी ने बताया कि आत्मरक्षा केवल शारीरिक बल पर आधारित नहीं होती, बल्कि इसमें सजगता, फुर्ती और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने समझाया कि यदि कोई हमलावर अचानक हमला करे तो सबसे पहले ब्लॉक का इस्तेमाल कर अपना बचाव करना चाहिए और फिर समय रहते पंच की तकनीक से जवाबी वार कर खुद को सुरक्षित किया जा सकता है. उन्होंने “भागते हुए पंच” जैसी तकनीक को भी अत्यंत उपयोगी बताया, जो विपरीत परिस्थितियों में तेजी से बाहर निकलने में मदद करती.
छात्राओं ने सीखी आत्मरक्षा तकनीकेंशिविर में छात्राओं को कई व्यावहारिक तकनीकें विस्तार से सिखाई गईं – जिनमें अलर्ट पोजिशन, पंचिंग, फिक्स व ब्लॉकेज, फॉरवर्ड फॉल, थ्रो तकनीक, चाकू, लाठी व हैमर जैसे हथियारों से बचाव, साथ ही गर्दन या बाल पकड़ने की स्थिति में सुरक्षित निकलने की विधियां शामिल थीं. इन अभ्यासों ने छात्राओं को न केवल आत्मरक्षा की बुनियादी समझ दी, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में आत्मविश्वास के साथ प्रतिक्रिया देना भी सिखाया.
फिटनेस और मानसिक दृढ़ता पर फोकसमोना चौधरी ने फिटनेस और मानसिक दृढ़ता के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि योग, नियमित व्यायाम और सतर्कता आत्मरक्षा की मजबूत नींव हैं. उन्होंने शरीर के नाजुक अंगों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कम बल का प्रयोग कर भी विपरीत परिस्थितियों को नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही, किशोरावस्था के बदलाव, संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता, गुड टच–बैड टच और जेंडर गैप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सार्थक संवाद हुआ.
छात्राओं में बढ़ा आत्मविश्वास और जागरूकताइसके अतिरिक्त, छात्राओं को चाइल्ड हेल्पलाइन, गरिमा पेटी और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया. तमन्ना, रितु, मोनिका, साक्षी, मुस्कान, सोनू, ईशु, दिव्या, प्रिया, खुशी, सिमरन, नेहा और महिमा सहित कई छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई और उत्साहपूर्वक आत्मरक्षा के गुर सीखे. यह आत्मरक्षा शिविर न सिर्फ छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ, बल्कि उन्हें यह संदेश भी मिला कि आज के समय में हर नारी का सजग, सक्षम और आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है.



