कुचामन के पकोड़े का स्वाद: 14 साल से गर्म तेल में हाथ डालते गोपाल गुर्जर

नागौर. राजस्थान के नागौर जिले का कुचामन अपने देसी स्वाद, सादगी और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है. इन्हीं स्वादों को सबसे अलग पहचान दिलाने वाला एक नाम है. गोपाल गुर्जर, जो पिछले 14 सालों से अपने ढाबे पर ऐसा कमाल कर रहे हैं कि लोग सिर्फ उनका हुनर देखने और पकोड़े खाने दूर-दूर से आते हैं.
जहाँ आम लोग गरम तेल के पास जाने में भी डरते हैं, वहीं गोपाल गुर्जर बिना किसी दस्ताने या चिमटे के सीधे हाथ से उबलते तेल में पकोड़े निकाल लेते हैं. यह कला ना केवल जोखिमभरी है बल्कि बेहद कौशल, आत्मविश्वास और वर्षों की मेहनत मांगती है. गोपाल का कहना है कि:“शुरुआत में डर लगता था, लेकिन समय के साथ प्रैक्टिस ने इसे आसान बना दिया.” उनकी यही अनोखी शैली लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है, और उनकी कला का वीडियो देखने के लिए लोग इंतज़ार करते हैं.
ढाबे पर सुबह-शाम लगी रहती है भीड़कुचामन में गोपाल के ढाबे का एक अलग ही क्रेज है. कुछ लोग उनके देसी स्वाद के फैन हैं, तो कुछ लोग LIVE हाथ से पकोड़े निकालते देखने आते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है: “गोपाल भाई के पकोड़े में जो देसी स्वाद है, वो और कहीं नहीं मिलता. तेल का तापमान इतना ज्यादा होता है, फिर भी उनके हाथ नहीं जलते. यह एक चमत्कार है.”
यह लाइव शो और शानदार स्वाद ही भीड़ का कारण बनता है.
14 साल की निरंतर मेहनत और स्थानीय पहचानपिछले 14 वर्षों से रोज़ाना एक जैसी लगन और मुस्कान के साथ गोपाल अपने ग्राहकों को चटपटा स्वाद परोस रहे हैं. उनके ढाबे पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं दाल के पकोड़े, जिन्हें वह खुद बनाते और हाथ से निकालते हैं.
उनके पकोड़े:
बाहर से कुरकुरे
अंदर से नरम
और बिल्कुल गाँव की देसी रसोई जैसा स्वाद देते हैं.
स्थानीय लोग अपने मेहमानों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भी खासतौर पर यहाँ लेकर आते हैं, ताकि वे भी गोपाल के हाथ का स्वाद और उनकी लाइव कला देख सकें.
कुचामन का लोकल ब्रांड बना साधारण ढाबागर्म तेल में हाथ डालकर पकोड़े निकालना केवल एक हुनर नहीं, बल्कि गोपाल की लगन, आत्मविश्वास और मेहनत का प्रतीक है. आज उनका ढाबा कुचामन की पहचान में शामिल हो चुका है और एक लोकल ब्रांड बन गया है.



