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सीकर: NFSA सत्यापन में 2.47 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले किसानों की जांच

Last Updated:November 23, 2025, 20:00 IST

सीकर जिले में NFSA लाभार्थियों की पात्रता की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है, 2.47 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले किसानों को सूची से बाहर करने की प्रक्रिया चल रही है. सरकारी अधिकारियों का उद्देश्य केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक राशन योजना का लाभ पहुंचाना और योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना है.खाद्य सुरक्षा योजना

राजस्थान के सीकर जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत चयनित लाभार्थियों की पात्रता की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है. इस प्रक्रिया में विशेष रूप से उन किसानों को चिन्हित किया गया है, जिनके पास 2.47 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि है. ऐसे 10,773 किसानों की सूची विभाग को प्राप्त हुई है, जिनका सत्यापन किया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र परिवारों तक ही पहुंचे.

खाद्य सुरक्षा योजना

जांच प्रक्रिया में पाया गया है कि कई किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और NFSA दोनों योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जबकि भूमि की पात्रता सीमा से अधिक होने पर उन्हें राशन योजना में शामिल नहीं होना चाहिए. रसद विभाग ने ऐसे किसानों के नाम चिन्हित किए हैं और उपखंड अधिकारियों को विस्तृत सत्यापन के निर्देश दिए हैं. यह कदम पात्रता में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

खाद्य सुरक्षा योजना

प्रदेश सरकार के हालिया निर्देशों के बाद यह कार्रवाई तेज हो गई है, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में 2.47 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि के रूप में दर्ज हैं, उन्हें खाद्य सुरक्षा योजना से हटाया जाएगा. ऐसे किसानों को सक्षम श्रेणी में माना गया है, जिन्हें सरकारी सब्सिडी वाले राशन की आवश्यकता नहीं है, विभाग की टीम प्रत्येक मामले की गंभीरता से जांच कर रही है.

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रसद अधिकारी विजेंद्रपाल के अनुसार, यदि किसी लाभार्थी की भूमि सीमा निर्धारित मानकों से अधिक पाई जाती है, तो उसे NFSA सूची से बाहर कर दिया जाएगा. अधिकारियों ने यह भी कहा कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी है, वे स्वेच्छा से योजना से बाहर हो जाएं, ताकि जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ आसानी से मिल सके. विभाग ने इस कदम को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी जोड़ा है.

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सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए विभाग वर्ष 2016 की कृषि भूमि रजिस्टर सूची का उपयोग कर रहा है. इस पुराने रिकॉर्ड को वर्तमान पीएम किसान योजना के डेटा के साथ मिलान किया जा रहा है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन किसानों की भूमि सीमा समय के साथ बढ़ी है या जिन्होंने गलत जानकारी देकर सरकारी लाभ उठाया है, डेटा का यह क्रॉस-चेक जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाता है.

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सीकर जिला प्रशासन ने सभी उपखंड अधिकारियों को पत्र जारी कर सूची में शामिल किसानों का स्थल सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारी गांवों में जाकर वास्तविक भूमि स्थिति की जांच कर रहे हैं. सत्यापन रिपोर्ट जल्द ही विभाग को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर पात्रता के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है.

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सरकार का कहना है कि NFSA जैसी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए हैं, इसलिए पात्रता का पालन करना आवश्यक है. यदि सक्षम किसान भी इन योजनाओं का लाभ लेते हैं, तो वास्तविक जरूरतमंद वंचित रह जाते हैं, इसलिए विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि केवल योग्य परिवार ही सरकारी राशन प्राप्त करें. जांच पूरी होने के बाद कई किसान सूची से बाहर हो सकते हैं, जिससे योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी.

First Published :

November 23, 2025, 20:00 IST

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सीकर में NFSA सत्यापन में 2.47 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले किसानों की होगी जांच

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