Fish Farming Profitable Species | Best Fish for Aquaculture | Machhli Palan Profit | Fish Farming Beginners Guide

Last Updated:November 26, 2025, 12:03 IST
Machhali Palan: मछली पालन शुरू करने वालों के लिए सही प्रजाति का चयन सबसे जरूरी माना जाता है. रोहू, कतला, ग्रास कार्प, पंगास और टिलापिया जैसी प्रजातियां तेजी से बढ़ती हैं और बाजार में आसानी से बिकती हैं. इन मछलियों की देखभाल सरल होती है और कम लागत में अधिक उत्पादन देती हैं, जिससे मछली पालन का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.
भीलवाड़ा: ठंड का यह मौसम मछली पालन की शुरुआत करने का एक सबसे अच्छा मौसम माना जाता है. इस मौसम में किसान मछली पालन करने की पूरी तैयारी कर सकता है. मछली पालन आज खेती के साथ-साथ एक उभरता हुआ व्यापार बनकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में नया रास्ता बन गया हैं. कम लागत में शुरू होने वाले इस उद्यम में प्रति वर्ष बेहतर आर्थिक रिटर्न की संभावना बढ़ गई है. बाजार में मछली की बढ़ती खपत, पोषण मूल्य और उच्च प्रोटीन कंटेंट के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. छोटे तालाब, नहर या कृत्रिम टैंक बनाकर भी यह व्यवसाय आसानी से स्थापित किया जा सकता है. अगर शुरुआत में सही प्रजाति चुनी जाए और तालाब मैनेजमेंट पर ध्यान दिया जाए, तो व्यवसाय में सफलता सहज रूप से सर्वाधिक संभावित है.

रोहू मछली देशभर में सबसे अधिक लोकप्रिय प्रजातियों में शामिल है. इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है क्योंकि स्वाद के साथ-साथ यह पोषण तत्वों से भरपूर मानी जाती है. रोहू की खासियत यह है कि इसकी वृद्धि दर बेहतर होती है और सामान्य तापमान वाले तालाब में इसका पालन सरलता से किया जा सकता है. उचित दाना, साफ पानी और ऑक्सीजन की सही मात्रा मिलने पर यह 8–10 महीनों में बाजार योग्य आकार प्राप्त कर लेती है. रोहू में रोग की संभावना कम होती है और उत्पादन लागत कम होने से लाभ अनुपात अधिक मिलता है.

कतला मछली अपनी तेज बढ़त और भारी वजन के लिए जानी जाती है, इसलिए व्यावसायिक मछली पालन में यह किसानों की पहली पसंद बन चुकी है. सामान्य परिस्थितियों में भी यह तेजी से आकार प्राप्त करती है, जिससे इसे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. कतला तालाब की ऊपरी सतह में रहकर भोजन ग्रहण करती है, इसलिए मिश्रित पालन में यह संतुलन बनाए रखती है. यदि तालाब में रोहू व मृगल के साथ कतला रखी जाए तो परिणाम और भी लाभकारी होते हैं.
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मृगल मछली भी भारत में पारंपरिक रूप से पालन की जाने वाली महत्वपूर्ण प्रजाति है. यह तल स्तर पर भोजन खोजती है, जिससे तालाब का प्राकृतिक इको सिस्टम मजबूत होता है. मृगल की ग्रोथ स्थिर और सुरक्षित मानी जाती है, इसलिए नए पालकों के लिए यह भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है. यदि मृगल को सही मात्रा में प्रोटीन युक्त दाना मिले और तालाब में पर्याप्त जैविक खाद डाली जाए तो इसका वजन तेजी से बढ़ता है. इसके मांस का बाजार मूल्य स्थिर रहता है, और हर मौसम में आसानी से बिकने के कारण व्यापारियों के लिए यह लगातार लाभदायक विकल्प बनती है.

पंगासियस और तिलापिया आधुनिक मछली पालन की सबसे तेजी से लोकप्रिय होती प्रजातियों में शामिल हैं. पंगासियस सामान्य जलवायु में तेजी से बढ़ती है और फिश फ़ीड की उपलब्धता होने पर यह छह से आठ महीनों में बेहतर आकार ले सकती है. तिलापिया कम देखभाल में भी जीवित रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण नए पालकों में इसकी मांग तेज हो रही है. यह प्रजाति कम पानी में भी विकसित हो सकती है और कृत्रिम टैंक सिस्टम में भी अच्छा उत्पादन देती है. दोनों प्रजातियां थोक बाजार में स्थिर रेट दिलाती हैं जिससे लाभ सुनिश्चित होता है.

मछली पालन में प्रजातियों का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है क्योंकि इससे उत्पादन की गति, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बाजार मूल्य सीधे प्रभावित होते हैं. आमतौर पर शुरुआती लोग वही प्रजातियां अपनाते हैं. जिनकी ग्रोथ तेज हो और बाजार में उनकी स्थाई खपत बनी रहती हो. ऐसे में रोहू , कतला और मृगल सबसे पारंपरिक और भरोसेमंद विकल्प माने जाते हैं. ये मछलियां भारतीय पानी के वातावरण में जल्दी ढल जाती हैं और इनके पालन में जोखिम भी अपेक्षाकृत कम रहता है. मिश्रित मछली पालन करने पर उत्पादन दोगुना बढ़ सकता है और खाद्य श्रृंखला संतुलित रहती है.
First Published :
November 26, 2025, 12:03 IST
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