धर्मेंद्र का एक्टिंग और परिवार के प्रति प्यार जानिए नई दिल्ली से.

Last Updated:November 27, 2025, 10:45 IST
धर्मेंद्र ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया है. फैंस तो उन पर दिल खोलकर प्यार लुटाया करते थे. अपने काम से वह जितना प्यार करते थे. उतना ही प्यार वह अपने परिवार से भी करते थे. इस बात का सबसे बड़ा सबूत ये है कि जाते-जाते भी धर्मेंद्र ने अपने भतीजों का भी इतना ध्यान रखा कि उनके नाम 19 कनाल जमीन कर गए हैं.
नई दिल्ली. धर्मेंद्र को एक्टिंग से इतना प्यार है कि वह मरते दम तक वह एक्टिंग की दुनिया में एक्टिव थे. इतना ही प्यार वह अपने परिवार से भी करते थे. अपनों का तो वह बहुत ही ध्यान रखते थे. वह अपने परिवार के लिए मर मिटने को तैयार रहते थे.

धर्मेंद्र सिर्फ अपने अपनी पत्नी और बच्चों की ही जिम्मेदारियां को नहीं उठाते थे, बल्कि अपने चाचा और भाई, भतीजों पर भी जान छिड़कते थे. उनके लिए तो वह ऐसा काम कर गए हैं कि वे लोग आज भी याद करते हैं.

धर्मेंद्र ने अपने पुरखों की जमीन भी अपने भतीजों के नाम कर दी है,ये बड़ा कदम उन्होंने इसलिए उठाया कि उनकी पूर्वजो की जो धरोहर है, वो हमेशा संभाल कर रख सकें.ऐसा काम करके उन्होंने साबित कर दिया कि वह रियल लाइफ में भी उतने ही बड़े स्टार हैं, जैसा कि हम उन्हें फिल्मों में देखा करते थे.
Add as Preferred Source on Google

धर्मेंद्र ने हमेशा ये साबित किया है कि वह बड़े दिल वाले इंसान थे. चमकती दुनिया में रहकर भी उन्होंने अपने परिवार और अपनी जड़ों से कभी रिश्ता नहीं तोड़ा,अपने पैतृक गांव डांगो से उनका खास कनेक्शन रहा है. वे सिर्फ अपने परिवार ही नहीं, गांव के चाचा-भतीजों पर भी बहुत प्यार लुटाते थे.

उनकी उदारता ऐसी थी कि उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन का बड़ा हिस्सा अपने भतीजों के नाम कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक धर्मेंद्र के पिता उन्हें हमेशा कहते थे कि यह जमीन हमारे पुरखों की अमानत है, इसे संभालकर रखना. धर्मेंद्र ने पिता की ये बात हमेशा दिल में रखी.

यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि देओल परिवार की विरासत है. धर्मेंद्र, सनी देओल, बॉबी देओल और नई पीढ़ी तक- सभी एक साथ इसी बंगले में रहते हैं, जो इसकी पारिवारिक पहचान को और मजबूत बनाता है.

बूटा सिंह ने इस बात का भी खुलासा किया कि धर्मेंद्र को घर की बनी चीजों से बहुत प्यार था. उनकी चाची प्रीतम कौर भी गांव में रहती हैं. परिवार के लोग बताते हैं कि मुंबई में रहने के बाद भी धर्मेंद्र उन चीजों को नहीं भूले थे.

उनके दादा जी अक्सर जब कभी भी मुंबई जाया करते थे तो वह घर का बना खोया, बर्फी और सरसों का साग धर्मेंद्र के लिए लेकर जाया करते थे. धर्मेंद्र बड़े चाव से खाते थे. 2013 में जब धर्मेंद्र अपने गांव गए थे , फूट-फूटकर रोए थे.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
November 27, 2025, 10:45 IST
homeentertainment
ये पुरखों की है, संभालकर रखना, धर्मेंद्र भतीजों के नाम कर गए 19 कनाल जमीन



