मथानिया के किसानों को फव्वारा पद्धति से फायदा | Sprinkler Irrigation Benefits for Farmers in Mathania

Last Updated:November 30, 2025, 11:33 IST
Sprinkler Irrigation Benefits: मथानिया के किसानों ने फव्वारा पद्धति अपनाकर कम पानी में फसल उत्पादन बढ़ाया है. यह आधुनिक तकनीक गिरते भूजल स्तर की समस्या से निपटने में सहायक सिद्ध हो रही है. कृषि उद्यान विभाग 70-75% सब्सिडी दे रहा है, जिससे किसानों को लाभ और पानी की बचत हो रही है.
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मथानिया के किसान फव्वारा पद्धति से लाभान्वित, कम पानी में बढ़ी फसल
Sprinkler Irrigation Benefits: मथानिया क्षेत्र में सिंचाई के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. लगातार सूखते कुएं और नलकूप किसानों के लिए चिंता का कारण बने हुए थे. ऐसे में आधुनिक तकनीक ही खेती को बचाने का नया सहारा बन रही है. गिरते भूजल स्तर के कारण किसान अब फव्वारा पद्धति (स्प्रिंकलर) अपना रहे हैं. इस तकनीक से कम पानी में भी बेहतर फसल उत्पादन हो रहा है, जिससे खेतों में लहलहाती हरी-भरी फसलें दिखाई दे रही हैं. यह बदलाव न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि क्षेत्र के जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
फव्वारा पद्धति के फायदे
फव्वारा पद्धति पानी को बारीक बूंदों के रूप में खेत में फैलाती है, ठीक बारिश की तरह. इससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और फसल तेजी से बढ़ती है. किसान कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं. प्रगतिशील किसानों के अनुसार इस तकनीक से:
पानी की 40-50% तक बचत होती है.
मेहनत कम लगती है (सिंचाई की पारंपरिक विधि की तुलना में).
फसलें रोगों से सुरक्षित रहती हैं (पत्तों पर सीधा पानी जमा नहीं होता).
यह पद्धति उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहाँ पानी की कमी एक गंभीर चुनौती है.
विभाग की सब्सिडी और प्रोत्साहन
कृषि उद्यान विभाग के वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक रामकरण बेंदा ने बताया कि राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन (PDMC) के तहत किसानों को फव्वारा, बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप) और मिनी स्प्रिंकलर लगाने पर 70-75% तक सब्सिडी मिल रही है. सरकार का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि जल संसाधन का बेहतर प्रबंधन हो सके.
75% अनुदान: अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला तथा लघु एवं सीमांत किसानों को.
70% अनुदान: सामान्य पुरुष किसानों को.
कौन सी फसल के लिए कौन सी तकनीक उपयुक्त
सूक्ष्म सिंचाई के तहत दो मुख्य तकनीकें प्रचलन में हैं, जो अलग-अलग फसलों के लिए उपयुक्त हैं:
बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप): यह विधि प्याज, लहसुन, जीरा, मेथी और कम ऊंचाई वाली सब्जियों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसमें पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुंचता है.
फव्वारा पद्धति (स्प्रिंकलर): यह रायड़ा, गाजर, गेहूं, पुदीना, धनिया और अधिक ऊंचाई वाली फसलों के लिए उपयुक्त है, जहाँ पूरे खेत में समान नमी की जरूरत होती है.
किसान अब इस आधुनिक तकनीक को अपनाकर कम पानी में अधिक लाभ कमा रहे हैं और आसपास के किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं.
Location :
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
November 30, 2025, 11:33 IST
किसान खुश, फसल हरी-भरी: जानें मथानिया में फव्वारा पद्धति के फायदे, विभाग दे…



