Palaiwal Brahmins and Historical Heritage.

Last Updated:December 01, 2025, 10:02 IST
Pali: पाली जिले की पहचान पालीवाल ब्राह्मणों की उदार परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत, टेक्सटाइल उद्योग और विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों से जुड़ी है. जवाई बांध, लेपर्ड सफारी, और मुगलों के आक्रमण का गवाह सोमनाथ महादेव मंदिर जैसी विशेषताएं इसे समृद्ध और विश्वप्रसिद्ध बनाती हैं.
Pali Palaiwal Brahmins and Historical Heritage: पाली जिले की पहचान लंबे समय से यहां की समृद्ध और उदार परंपराओं से जुड़ी रही है, जिसकी नींव पालीवाल ब्राह्मणों ने रखी थी. पालीवाल ब्राह्मणों की एक अनूठी परंपरा थी: जब भी कोई ब्राह्मण पाली आता था, उसे स्वागत स्वरूप एक ईट और एक सोने का सिक्का दिया जाता था. यह ईट उसके घर के निर्माण के लिए और सिक्का व्यापार शुरू करने के लिए होता था. इस उदार परंपरा के कारण पाली में कोई भी ब्राह्मण कभी गरीब नहीं रहा और यह क्षेत्र समृद्धि और ज्ञान का केंद्र बना.
जेएनवीयू, राजस्थानी विभाग के प्रोफेसर गजेसिंह राजपुरोहित के अनुसार, पाली में कभी पालीवाल ब्राह्मणों का वर्चस्व रहा था. इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, जब मुगलों और अन्य बाहरी आक्रमणों का खतरा बढ़ा, तो पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एक बड़ा निर्णय लिया. उन्होंने सोमनाथ महादेव मंदिर के पास 100 मण जनेरू (पवित्र धागा) उतारे और बाद में पाली छोड़कर चले गए. उनका यह विस्थापन न केवल मंदिर की रक्षा के लिए था, बल्कि यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को बचाने का एक प्रयास भी था.
महाराणा प्रताप का ननिहाल और हस्त उद्योगपाली का महत्व ऐतिहासिक और भौगोलिक दोनों दृष्टियों से है.
ऐतिहासिक संबंध: पाली को महाराणा प्रताप का ननिहाल भी माना जाता है, जो इसे राजस्थान के गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है.
जवाई बांध: जिले में स्थित जवाई बांध जल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.
हस्त उद्योग: पाली के छोटे-छोटे हस्त उद्योग और कारखाने ऐतिहासिक और व्यापारिक दृष्टि से हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहे हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
सोमनाथ महादेव मंदिर: मुगलों के आक्रमण का गवाहपाली का सोमनाथ महादेव मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह मंदिर मुगलों के आक्रमणों का गवाह रहा है. पालीवाल ब्राह्मणों ने मंदिर की सुरक्षा और सम्मान को बनाए रखने के लिए, वहां से चले जाने का कठिन निर्णय लिया था. यह मंदिर आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और पाली के समृद्ध अतीत की कहानी कहता है.
टेक्सटाइल उद्योग का जनक: बांगड़ मिल का योगदानपाली को टेक्सटाइल उद्योग का जनक भी माना जाता है. पाली में कपड़ा उद्योग की भरपूर संभावनाओं के कारण, वर्ष 1942 में राजस्थान की सबसे बड़ी बांगड़ मिल यहीं स्थापित की गई थी.
इस चयन का मुख्य कारण जवाई बांध से पानी की निरंतर उपलब्धता थी. जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने जवाई बांध से पानी उपलब्ध होने की वजह से ही पाली को औद्योगिक केंद्र के रूप में चयनित किया था, जिसने बाद में इसे टेक्सटाइल नगरी की पहचान दिलाई.
पर्यटन नगरी के रूप में विश्व पहचानआज पाली केवल इतिहास या उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटन नगरी के रूप में विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो चुका है.
जवाई लेपर्ड सफारी: यहां की प्रमुख आकर्षण जवाई लेपर्ड सफारी है. यह सफारी इंसान और लेपर्ड (तेंदुए) के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक अनूठा संदेश देती है.
आकर्षण का केंद्र: फिल्मी हस्तियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जिससे पाली को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान मिला है.
Location :
Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
December 01, 2025, 10:02 IST
homerajasthan
मैं पाली हूं, समृद्धि मेरी पहचान, पालीवाल ब्राह्मणों की परंपराओं से गढ़ी….



