DGP राजीव शर्मा ने दी सख्त चेतावनी

जोधपुर. जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में एसएचओ और वकील के बीच हुआ विवाद अब पूरे राज्य में पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर चुका है. वकील के साथ हुई कहासुनी का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की जमकर किरकिरी हुई है, जिसके बाद डीजीपी राजीव शर्मा ने अत्यंत सख्त लहजे में पुलिसकर्मियों को चेतावनी जारी की है. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी थाने में आने वाला व्यक्ति चाहे आम नागरिक हो, शिकायतकर्ता हो, आरोपी हो या वकील, उससे शालीन, संवेदनशील और मर्यादित व्यवहार अनिवार्य है. डीजीपी ने जिला एसपी को भी निर्देश दिए कि वे लगातार थानों का औचक निरीक्षण करें और अधीनस्थ कर्मचारियों के व्यवहार पर विशेष निगरानी रखें. उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रतिष्ठा नागरिकों के विश्वास पर टिकी है और किसी एक घटना से पूरे विभाग की साख पर आंच नहीं आनी चाहिए.
डीजीपी शर्मा ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए मंगलवार शाम सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से लेकर थानों के प्रभारी तक की आपात ऑनलाइन बैठक बुलाई. बैठक में डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि अनुशासनहीनता, अभद्रता या शक्ति का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई गईं तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर विभागीय कार्रवाई तय है.
डीजीपी शर्मा का सख्त आदेशडीजीपी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि आमजन से संवाद की संस्कृति बेहतर करें, शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुनें और किसी भी परिस्थिति में गैर-पेशेवर व्यवहार न करें. उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता या वकील से बहस करने या आवाज ऊंची करने जैसी घटनाएं पुलिस की गरिमा को धूमिल करती हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना आवश्यक है.
घटनाक्रम कैसे शुरू हुआ और कैसे बिगड़ा माहौलघटना की शुरुआत सोमवार देर रात हुई जब एडवोकेट भरतसिंह राठौड़ और एक महिला अधिवक्ता दुष्कर्म पीड़िता की ओर से बयान करवाने के लिए कुड़ी भगतासनी थाने पहुंचे. आरोप है कि वहां एक पुलिसकर्मी बिना वर्दी के पीड़िता का बयान ले रहा था, जिस पर वकीलों ने तत्काल आपत्ति जताई. कहना यह है कि पुलिसकर्मी का व्यवहार प्रक्रिया के विरुद्ध था और वकीलों ने इसे लेकर SHO हमीरसिंह से सवाल किए. इसी दौरान SHO ने कथित रूप से वकीलों को वीडियो बनाने से रोका और विवादित टिप्पणी कर दी- वकील है तो क्या हुआ, अभी 151 में बंद कर दूंगा, सारी वकालत निकल जाएगी.
पुलिस का वायरल वीडियोयह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया. वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वकील समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया. रातोंरात सैकड़ों वकील थाने के बाहर जमा हो गए और कुड़ी थाने के सामने ही धरना शुरू कर दिया. पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ने लगा और मामला पूरी तरह से उग्र हो गया.
मामला कैसे बढ़ा, वकीलों का विरोध और कोर्ट की सख्तीअगली सुबह वकीलों की भीड़ और बढ़ गई. प्रदर्शनकारियों ने SHO और संबंधित पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित करने की मांग तेज कर दी. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन को आपात बैठक बुलानी पड़ी. बैठक में दोनों संस्थाओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का फैसला लिया.
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञानमामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया. मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह की खंडपीठ ने वायरल वीडियो देखने के बाद इसे बेहद गंभीर माना और पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान को कोर्ट में तलब कर लिया. कोर्ट ने सख्ती से कहा कि पुलिस के व्यवहार और प्रक्रियाओं में तत्काल सुधार जरूरी है और ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था और आमजन में गलत संदेश देती हैं. यही पूरा घटनाक्रम बाद में डीजीपी के हस्तक्षेप का कारण बना. उन्होंने आपात बैठक बुलाकर पूरे पुलिस महकमे को व्यवहार सुधारने की सख्त चेतावनी जारी की.



