उपेक्षा में खोती ऐतिहासिक धरोहर.

Last Updated:December 06, 2025, 15:44 IST
कभी रानियों की हंसी-खुशी और रियासती रौनक से गूंजने वाला करौली का शाही सुखविलास बाग आज खामोश और उपेक्षित खड़ा है. भद्रावती नदी के किनारे बसा यह बाग अपनी शानदार वास्तुकला और रियासतकालीन परंपराओं के लिए जाना जाता था, लेकिन संरक्षण के अभाव में इसकी दीवारें जर्जर हो गई हैं और छतें टूट रही हैं. यदि समय रहते प्रयास नहीं किए गए, तो यह अनोखी धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल इतिहास की किताबों और लोककथाओं तक सीमित रह जाएगी.
राजस्थान की रियासतकालीन धरोहरें आज भी उस दौर के वैभव, सौंदर्य और शान की कहानी बयां करती हैं, लेकिन कई ऐतिहासिक इमारतें उपेक्षा की मार झेलते हुए इतिहास के पन्नों में गुम होती जा रही हैं.

ऐसी ही एक अनमोल धरोहर है करौली का शाही सुखविलास बाग, जो कभी रानियों के मनोरंजन का केंद्र हुआ करता था. आज यह विरासत देखरेख के अभाव में खंडहर में बदलती जा रही है. भद्रावती नदी के किनारे बसा यह बाग अपनी शानदार वास्तुकला, सुंदर प्राकृतिक दृश्य और विशिष्ट रियासतकालीन परंपरा के लिए जाना जाता था.

इतिहासकार बताते हैं कि सावन के महीनों में रानियां यहां झूला झूलने, स्नान करने और आमोद-प्रमोद के लिए आया करती थी. यह स्थान इतना गोपनीय और विशिष्ट था कि राजा की अनुमति के बिना किसी अन्य व्यक्ति का आना सख्त वर्जित था.
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लाल पत्थर से निर्मित इस बाग की दीवारें, झरोखे और बारीक नक्काशी मुगलकालीन और राजस्थानी शिल्पकला का अनूठा मेल पेश करती हैं. तीन मंजिला झरोखों की संरचना और पत्थरों पर उकेरी गई सुंदर कारीगरी आज भी इसकी भव्यता की झलक दिखाती है.

करौली के वरिष्ठ इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा बताते हैं कि सुखविलास बाग रानियों के सुख और विलास का प्रमुख स्थल था. इसके एक ओर भद्रावती नदी की कल-कल धारा और दूसरी ओर महल के पास बना शाही कुंड—इन दोनों के बीच स्थित यह बाग रियासतकालीन स्त्रियों के मनोरंजन का मुख्य ठिकाना था. लेकिन आजादी के बाद इस धरोहर की अनदेखी शुरू हो गई.

सरकारी संरक्षण के दायरे में आने के बावजूद पर्याप्त देखभाल न होने से इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई. नतीजा यह है कि आज सुखविलास बाग की दीवारें जर्जर हो गई हैं, छतें टूट रही हैं और पूरी संरचना अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है.

कभी रानियों की हंसी-खुशी और रियासती रौनक से गूंजने वाला यह शाही बाग आज खामोश और उपेक्षित खड़ा है. यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए, तो करौली की यह अनोखी धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल इतिहास की किताबों और लोककथाओं तक सीमित रह जाएगी.
First Published :
December 06, 2025, 15:44 IST
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करौली के सुखविलास बाग की रौनक से खंडहर तक की अनकही कहानी



