राजस्थान और गुजरात की प्रति-व्यक्ति आय में बड़ा अंतर, गुजरात तीन लाख के पार; राजस्थान अब भी दो लाख से नीचे

जयपुर. आर्थिक वर्ष 2024-25 में जारी ताजा आंकड़ों ने राजस्थान और गुजरात की आर्थिक स्थिति के बीच बड़ा अंतर उजागर कर दिया है. राजस्थान जहां अभी भी प्रति-व्यक्ति आय के मामले में दो लाख रुपये के स्तर से नीचे बना हुआ है, वहीं गुजरात पहली बार तीन लाख रुपये का आंकड़ा पार कर देश के अग्रणी राज्यों की सूची में मजबूती से खड़ा हो गया है.
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की प्रति-व्यक्ति आय 2024-25 में बढ़कर 1,85,053 रूपए हो गई है, जो अभी भी गुजरात से 40% कम है. वहीं 2023-24 के 1,66,647 रूपए की तुलना में करीब 11.04% की वृद्धि दर्शाती है. हालांकि वृद्धि की यह दर उत्साहजनक है, लेकिन आर्थिक विकास की गति अभी भी उन राज्यों से कम है, जो तेजी से औद्योगिक निवेश और उत्पादन-क्षेत्र के विस्तार के कारण आगे बढ़ रहे हैं. गुजरात का जीएसडीपी चार गुना बढ़ा, वहीं राजस्थान का दोगुना से थोड़ा अधिक.
गुजरात का प्रति व्यक्ति आय 3 लाख से अधिक
ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुजरात राज्य की प्रति-व्यक्ति आय 2025 में 3,00,957 रूपए तक पहुंच गई है, जो गुजरात को देश के शीर्ष पांच बड़े अर्थतंत्रों में शामिल करती है. यह आंकड़ा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से अधिक है. यह पहली बार है जब गुजरात ने तीन लाख रुपए का स्तर पार किया है. आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक गुजरात में बीते एक दशक में मजबूत औद्योगिक नींव, बेहतर व्यापारिक माहौल और बड़े पैमाने पर निजी निवेश ने इसे ऐसी रफ्तार दी है कि राज्य की प्रति-व्यक्ति आय में 2013-14 से 2023-24 के बीच करीब 90.7% वृद्धि दर्ज हुई है.
केवल संख्याओं तक सीमिति नहीं हैं आंकड़े
राजस्थान और गुजरात के बीच यह अंतर केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है बल्कि आर्थिक ढांचे, रोजगार सृजन, निवेश‐अनुकूल नीतियों और औद्योगिक भागीदारी जैसे कारकों ने इस खाई को और गहरा किया है. गुजरात में मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, फार्मा, पेट्रोकेमिकल्स और सर्विस सेक्टर लगातार विस्तार कर रहे हैं. वहीं राजस्थान अभी भी कृषि-प्रधान राज्य होने के कारण आय के विविध स्रोतों में अपेक्षित तेजी नहीं ला पाया है.
2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की है तैयारी
राजस्थान में प्रति-व्यक्ति आय बढ़ने के बावजूद इसकी तुलना गुजरात जैसे तेजी से उभरते राज्यों से करने पर स्पष्ट होता है कि राज्य को अभी भी रोजगार-आधारित औद्योगिक विकास, कौशल-प्रशिक्षण और निवेश आकर्षित करने के लिए अधिक ठोस कदम उठाने होंगे. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि राजस्थान माइनिंग, पर्यटन, ऊर्जा और उद्योग क्षेत्रों में अपने संसाधनों का प्रभावी उपयोग करे, तो आने वाले वर्षों में यह अंतर घट सकता है. हालांकि राजस्थान की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. राइजिंग राजस्थान’ जैसे प्रयास सकारात्मक हैं, लेकिन गुजरात मॉडल से सीखना आवश्यक है. राज्य 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह अभी भी कुछ अन्य राज्यों से पीछे है.



