Nag Nagini Temple | Unique Snake Worship Temple | Ajab Gajab Mandir

Last Updated:December 09, 2025, 11:30 IST
Nag Nagin Ka Ajab Gajab Mandir: भारत में स्थित यह अजब-गजब मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां नाग–नागिन के जोड़े की विशेष पूजा की जाती है. माना जाता है कि यहां पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में शांति आती है. इस मंदिर की रहस्यमयी मान्यताओं के कारण दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
सिरोही : राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली की वादियों में कई प्राचीन मंदिर है, जिनको लेकर भक्तों में अनोखी मान्यताएं है. यहां एक मंदिर ऐसा भी है जहां नाग नागिन के जोड़े की पूजा होती है. जी हां, हम बात कर रहे है माउंट आबू की पहाडियों की तलहटी में नागपुरा गांव के पास बने अर्बुद नाग नागिन मंदिर की. नागपुरा गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच बने इस मंदिर में स्थापित नाग नागिन की प्रतिमा की पूजा होती है.
मंदिर को लेकर भक्तों में एक कथा भी प्रसिद्ध है. स्थानीय रहवासी और भक्त हेमाराम ने बताया कि माउंट आबू की पहाड़ियां अर्बुद नाग पर टिकी हुई है. इस वजह से इस क्षेत्र की अर्बुद अरण्य या अर्बुदांचल के नाम से जाना जाता है.
अर्बुद नाग से मिली गांव को पहचानअर्बुद नाग का मुंह वाला हिस्सा नागाणी गांव और पूंछ वाला हिस्सा नागपुरा गांव में माना जाता है. इस वजह से अर्बुद नाग के मंदिर स्थापित है. यहां बने अर्बुद नाग नागिन मंदिर का जीर्णोद्धार करीब 12 वर्ष पहले हुआ था. यहां अर्बुद नाग और नागिन के जोड़े मूर्ति के रूप में विराजमान हैं. जिनकी पूजा करने के लिए दूरदराज से भक्त यहां आते है. इस मंदिर में देवासी समाज के इष्टदेव गोगाजी के रूप में भी पूजे जाते है.
मंदिर को लेकर प्रसिद्ध है ये कथामन्दिर को लेकर यहां गुरु वशिष्ठ की एक कथा भी प्रसिद्ध है. जिसके मुताबिक प्राचीन काल में यहां बनी ब्रह्म खाई में एक बार गुरु वशिष्ठ की कामधेनू गाय नंदिनी गिर गई थी. जिस बचाने के बाद इस खाई को पाटने के लिए भगवान शिव को आराधना कर गुरु वशिष्ठ ने यहां सरस्वती नदी प्रवाहित करवाई थी. इसके बाद यहां हिमालय के पुत्र नंदिवर्धन को स्थापित करने के लिए अर्बुद नाग को बुलाया गया था. इसी नाग पर ये पर्वत टिका हुआ हैं. नीचे ब्रह्म खाई होने से बार बार ये पर्वत हिलने लगते थे. जिस पर संत महात्माओं ने पुनः भगवान शिव का आह्वान किया, तो अर्बुद नाग को भगवान शिव के पैर के अंगूठे पर यहां टिकाया गया था. आज भी इस अंगूठे की अचलगढ के अचलेश्वर महादेव में पूजा होती है और यहां अर्बुद नाग की पूजा होती है. माना जाता है कि जब ये अंगूठा और अर्बुद नाग हट जाएगा, तो आबू की ये पहाड़ियां ब्रह्म खाई में समा जायेगी.
About the AuthorJagriti Dubey
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Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
December 09, 2025, 11:30 IST
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विश्वास या चमत्कार? इस मंदिर में नाग–नागिन की पूजा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं



