Rajasthan

Mahua Products Udaipur | Mahua Tea Candy Cookies | Mahua Syrup Energy Bar | Tribal Entrepreneurship Rajasthan | Mahua Processing Unit

Last Updated:December 10, 2025, 12:58 IST

Mahua Products Udaipur: उदयपुर में महुआ आधारित उद्योगों की नई शुरुआत आदिवासी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला रही है. अब महुआ से देसी शराब नहीं, बल्कि चाय, कैंडी, कुकीज, सिरप और एनर्जी बार जैसे वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी तेज है, जिससे रोजगार और आय दोनों बढ़ेंगे.उदयपुर

आदिवासी बहुल उदयपुर जिले में महुआ का नाम हमेशा से देसी शराब से जुड़ा रहा है, लेकिन अब यह तस्वीर बदलने जा रही है. प्रदेश सरकार ने पंच गौरव योजना में महुआ के पेड़ को शामिल कर इसे आमदनी बढ़ाने का बड़ा साधन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. उदयपुर और प्रतापगढ़ जिले में महुआ की भरपूर उपलब्धता को देखते हुए इससे कई तरह के वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट तैयार करने की योजना बनाई गई है.इससे स्थानीय ग्रामीणों को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

उदयपुर

वन विभाग के अनुसार अब महुआ का उपयोग केवल शराब बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. छत्तीसगढ़ मॉडल से प्रेरणा लेकर यहां भी महुआ से लड्डू, सिरप, चाय, कैंडी, एनर्जी बार और कुकीज जैसे प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे. छत्तीसगढ़ में इन उत्पादों की देशभर में अच्छी मांग है, इसलिए उदयपुर में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की योजना बनाई गई है.वन समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को इन उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

उदयपुर

कोटड़ा और देवला क्षेत्र में जिस तरह सीताफल से पल्प तैयार कर आय बढ़ाई गई है, उसी तरह महुआ को आर्थिक मजबूती का नया आधार बनाने की रणनीति है.विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महुआ से तैयार प्रोडक्ट मार्केट में उतारे गए तो आदिवासी परिवारों की आमदनी दोगुनी तक हो सकती है.साथ ही स्थानीय महिलाओं को भी घर बैठे रोजगार मिल सकेगा, क्योंकि इन प्रोडक्ट में उनका योगदान सबसे ज्यादा रहेगा.

Add as Preferred Source on Google

उदयपुर

वन विभाग पौधरोपण योजना में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है. फुलवारी की नाल सेंचुरी के कोटड़ा, पानरवा और मामेर रेंज के साथ-साथ फलासिया, झाड़ोल, कुकावास और कोटड़ा रेंज में अब महुआ के पौधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. अभी तक इन क्षेत्रों में पौधरोपण के दौरान महुआ के सिर्फ 10 प्रतिशत पौधे शामिल किए जाते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20 से 30 प्रतिशत किया जाएगा.

उदयपुर

इस बदलाव का उद्देश्य आने वाले वर्षों में महुआ की उपलब्धता बढ़ाना है ताकि बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित किए जा सकें.विभाग ने इसकी शुरुआत 2026 के मानसून सीजन से करने की योजना बनाई है.नई पौधरोपण नीति के तहत स्थानीय लोगों को भी मुफ्त या रियायती दर पर महुआ के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि गांवों में भी इसकी खेती बढ़ सके.

उदयपुर

महुआ को पंच गौरव योजना में शामिल करने से इसे सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से सम्मान मिला है. ग्रामीणों को भरोसा है कि इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि जंगल पर आधारित पारंपरिक जीवनशैली भी मजबूत होगी.स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को सरकार की मदद से देशभर के बाजारों तक भेजा जाएगा.

उदयपुर

सरकार और वन विभाग का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो उदयपुर क्षेत्र देश के सबसे बड़े महुआ उत्पादक जिलों में शामिल हो सकता है.इससे न केवल ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे.

First Published :

December 10, 2025, 12:58 IST

homerajasthan

महुआ की बदलेगी पहचान! उदयपुर बनेगा चाय, सिरप और एनर्जी बार का नया हब

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj