Rajasthan

Hanuangarh Dispute: एथेनॉल फैक्ट्री पर हंगामा, किसानों का पथराव-आगजनी; धारा 144 लागू, भारी फोर्स तैनात

हनुमानगढ़. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में बुधवार को किसानों का प्रदर्शन हिंसक हो गया. महापंचायत के बाद सैकड़ों किसानों ने फैक्ट्री परिसर की ओर कूच किया, दीवार तोड़ी और वहां खड़ी 16 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. इसमें 10 कारें, कई बाइक, पुलिस जीप और एक जेसीबी मशीन जलकर राख हो गई. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है. बवाल के बाद 7 किसानों को डिटेन किया गया है. जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और एसपी ने असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.

घटना बुधवार शाम की है जब टिब्बी क्षेत्र में एसडीएम कार्यालय के पास महापंचायत हुई. किसान लंबे समय से ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की 450 करोड़ रुपये की लागत वाली अनाज आधारित एथेनॉल फैक्ट्री का विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि फैक्ट्री से प्रदूषण बढ़ेगा, भूजल दूषित होगा और फसलें प्रभावित होंगी. महापंचायत शांतिपूर्ण रही, लेकिन बाद में कुछ प्रदर्शनकारी फैक्ट्री साइट की ओर बढ़ गए. ट्रैक्टरों से दीवार तोड़ने के बाद पथराव शुरू हो गया. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया. देर रात जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव का बयान सामने आया.

2022 में फैक्ट्री के प्रोजेक्ट को मिली थी मंजूरी

जिला कलेक्टर खुशाल यादव ने बताया कि किसानों की भावनाओं को देखते हुए और लोकतांत्रिक मांगों को ध्यान में रखते हुए महापंचायत की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने परमिटेड एरिया को छोड़कर फैक्ट्री वाले जगह पर पहुंच गए और तोड़-फोड़ करने लगे. जबकि पूरे इलाके में धारा 144 लागू था. कुछ असामाजिक तत्वों ने फैक्ट्री परिसर को निशाना बनाया और कानून हाथ में लिया. जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया है उनके विरूद्ध कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि कई बार समाधान के लिए प्रयास किए गए, लेकिन अब हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि कोई भी कानून को अपने हाथ में न लें. यह फैक्ट्री 2022 का ही प्रोजेक्ट है. इसमें एमओयू भी हुआ था. वहीं 2023 में फैक्ट्री को सीएलयू का परमिशन और इसी साल अगस्त में स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का भी इनको परमिशन मिला था.

15 करोड़ के हर महीने खरीदे जाएंगे पराली, मक्का या चावल

उन्होंने बताया कि कोई फैक्ट्री लगती है तो उसको कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसके अलावा कई संवैधानिक संस्थाओं से भी मंजूरी लेनी होती है. इसमें सभी के हितों का ख्याल रखा जाता है. यदि कोई मांग होती है उसे संवैधानिक तरीके से समाधान किया जाता है. जिला प्रशासन की ओर से भी पिछले डेढ़-दो साल में कई प्रयास किए गए हैं. जो ग्रामीण हैं और जो प्रदर्शन कर रहे हैं, उनको पंजाब में स्थापित फैक्ट्री को विजिट करने के लिए आमंत्रित किया गया है. लोगों के समस्याओं के समाधान के लिए  कई बार बैठक से लेकर अन्य प्रयास किए गए हैं. तीन दिसंबर को भी विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया था. प्रदूषण को लेकर लोगों की जो संकाएं थी, उसको दूर करने के लिए फैक्ट्री के लोगों के द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया. फैक्ट्री से होने वाले फायदे के बारे में भी बताया गया. हर महीने 9 करोड़ की पराली और 6 करोड़ का मक्का या चावल भी खरीदेंगे. इससे से जो रोजगार के अवसर मिलेंगे उसके बारे में भी लोगों को बताया गया है.

कानून को हाथ में लोगों से न लेने की अपील

जिला कलेक्टर ने बताया कि इन सब के बावजूद लोगों ने कानून को हाथ में लिया है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसे न करें, वरना जिला प्रशासन के पास कार्रवाई के सारे अधिकार मौजूद हैं.  वहीं, एसपी हरीशंकर ने बताया कि बवाल करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. झड़प में घायल हुए 5 पुलिसकर्मियों का उपचार चल रहा है. बवाल के बाद इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है, धारा 144 लागू है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. स्कूल-कॉलेज और दुकानें बंद रहीं.

15 महीने से किसान कर रहे हैं आंदोलन

किसान पिछले 15 महीनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं. कंपनी का दावा है कि प्लांट केंद्र सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम को सपोर्ट करेगा और पर्यावरण मानकों का पालन किया जाएगा, लेकिन किसानों को यह मंजूर नहीं. घटना में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित कई लोग घायल हुए हैं. प्रशासन ने शांति की अपील की है और आगे की वार्ता के संकेत दिए हैं.स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

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