दौसा : सिकराय का ‘चमत्कारी स्कूल’: 9 साल से 100% रिजल्ट, भामाशाहों ने बदली तस्वीर

दौसा : जहां अधिकांश सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की लापरवाही के कारण अभिभावक बच्चों की शिक्षा को लेकर अक्सर चिंतित दिखते हैं, वहीं सिकराय उपखंड क्षेत्र का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुरा उन विद्यालयों में से एक है, जहां शिक्षकों की मेहनत, अनुशासन और जागरूकता ने शिक्षा का ऐसा माहौल तैयार किया है कि उसके परिणाम पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन चुके हैं. यहां शिक्षकों की लगन गांव में रहने वाले अभिभावकों से अधिक दिखाई देती है, जो हर दिन बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए समर्पित होकर कार्य करते हैं.
विद्यालय के प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश मीणा बताते हैं कि पिछले नौ वर्षों में विद्यालय का परिणाम लगातार शत-प्रतिशत रहा है. केवल यही नहीं, बल्कि परिणामों में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी अधिक रहती है तथा 80% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में शामिल है. शिक्षा विभाग ने विद्यालय को इसकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2020-21 में ब्लॉक स्तर का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय घोषित किया, जिसके लिए विद्यालय को 10,000 रुपए का विकास अनुदान भी मिला.
छात्रों को मिले स्कूटी, लैपटॉप और टैबलेटराज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ इस विद्यालय के विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में मिला है. पिछले 7 से 8 वर्षों में यहां की 30 से अधिक छात्राओं को स्कूटी, जबकि 20 से अधिक छात्रों को लैपटॉप प्रदान किए गए हैं. पिछले दो वर्षों में 20 से 22 विद्यार्थियों को टैबलेट भी उपलब्ध करवाए गए हैं. यह सब विद्यालय के निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण संभव हुआ है.
भामाशाहों का सराहनीय योगदान : लगभग 30 लाख की सहायताविद्यालय के भौतिक विकास में स्थानीय भामाशाहों का अभूतपूर्व योगदान रहा है. भामाशाह भरत लाल मीणा ने विद्यालय के लिए एक बीघा भूमि दान कर शिक्षा-संवर्धन की मिसाल पेश की है. इसके अलावा अन्य भामाशाहों द्वारा लाखों रुपये की लागत से कक्षाओं का निर्माण, बरामदे, मुख्य द्वार तथा चारदीवारी का निर्माण कार्य भी करवाया गया. अब तक विद्यालय में लगभग 30 लाख रुपये से अधिक की राशि भामाशाहों द्वारा विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है. विद्यालय के सभी शिक्षक भी प्रतिवर्ष 5 से 10 हजार रुपये तक दान करते हैं, जिससे विद्यालय विकास कार्यों में सतत योगदान बना रहता है. इससे ग्रामीणों में भी यह संदेश जाता है कि शिक्षक स्वयं अपने विद्यालय के प्रति पूरी निष्ठा रखते हैं.
अनुशासन एवं साप्ताहिक टेस्ट से बनता है शैक्षणिक माहौलप्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश मीणा बताते हैं कि सत्र की शुरुआत से ही विद्यालय में अनुशासन को सर्वोपरि माना जाता है. छात्र-छात्राओं का साप्ताहिक टेस्ट लिया जाता है और प्राप्त अंकों की जानकारी अभिभावकों तक तुरंत पहुंचाई जाती है. समय-समय पर अभिभावक बैठक (PTM) का आयोजन भी किया जाता है, जिससे बच्चों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन होता रहता है. विद्यालय में स्पष्ट नियम है कि एक बार बच्चा प्रवेश कर ले, तो किसी भी स्थिति में बीच में घर जाने की अनुमति नहीं होती, सिवाय विशेष परिस्थितियों के. यह व्यवस्था शिक्षा के प्रति गंभीरता को बढ़ाती है.
राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी छात्रों की भागीदारीविद्यालय की छात्राओं ने भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. एक छात्रा ने जिला स्तर पर तीन बार प्रथम स्थान हासिल किया, जिसके लिए जिला कलेक्टर द्वारा उसे सम्मानित कर मोबाइल भी भेंट किया गया. इसी प्रकार विद्यालय की एक अन्य छात्रा दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुकी है. वह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम योजना के अंतर्गत पांच राज्यों की शैक्षणिक यात्रा पर भी गई है तथा पूर्व में अंतर-जिला भ्रमण में भी शामिल हो चुकी है.
विद्यालय का माहौल शिक्षकों की मेहनत से विकसितकक्षा 12 के छात्र अंकित बताते हैं कि विद्यालय में पढ़ाई का माहौल इतना अनुशासनयुक्त है कि विद्यार्थियों के मन में प्रतिदिन पढ़ाई के प्रति उत्साह बना रहता है. वहीं भामाशाह भरत लाल मीणा कहते हैं कि विद्यालय के शिक्षक हमेशा विद्यार्थियों के हित में काम करते हैं, इसलिए ही उन्होंने विद्यालय के लिए भूमि दान की. गांव के ही आरएएस अधिकारी केदारमल मीणा ने विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुए विद्यालय में जल मंदिर का निर्माण करवाया. पहले बच्चों को पीने के पानी की समस्या रहती थी, जिसे अब लाखों रुपये की लागत से पूरी तरह दूर कर दिया गया है. राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुरा आज उन विद्यालयों की श्रेणी में शामिल हो चुका है, जहां अनुशासन, परिश्रम, जनसहयोग और प्रभावी नेतृत्व ने शिक्षा के स्तर को नई दिशा दी है. यहां का वातावरण बताता है कि यदि शिक्षक, समाज और विद्यार्थी एकजुट होकर कार्य करें तो सरकारी विद्यालय भी सर्वश्रेष्ठ बन सकते हैं.



