Agriculture Update | Polyhouse and Shednet Installation Made Easy for Farmers . Agriculture Tips

Last Updated:December 15, 2025, 09:50 IST
Polyhouse and Shednet Installation Made Easy for Farmers: प्रदेश सरकार ने पॉलीहाउस और शेडनेट निर्माण की न्यूनतम क्षेत्र सीमा 4000 वर्ग मीटर से घटाकर 2500 वर्ग मीटर कर दी है. इस फैसले से छोटे और मध्यम किसान भी अब अनुदान योजना का लाभ ले सकेंगे और आधुनिक खेती, खासकर उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन, मौसम की मार से बचकर कर पाएंगे.

भीलवाड़ा. आज के ज़माने में किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं, और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी पहचान आधुनिक किसान के रूप में बना रहे हैं. भीलवाड़ा जिले के किसानों के लिए आधुनिक खेती के रास्ते अब और आसान हो गए हैं, क्योंकि पॉलीहाउस और शेडनेट निर्माण के लिए अनुदान की क्षेत्र सीमा 4000 वर्ग मीटर से घटाकर 2500 वर्ग मीटर कर दी गई है. इस बदलाव से छोटे और मध्यम किसानों को सीधा फायदा मिलेगा. पहले बड़े क्षेत्र की अनिवार्यता के कारण कई किसान योजना से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब कम भूमि वाले किसान भी नियंत्रित खेती अपनाकर अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त कर सकेंगे. इससे खेती में जोखिम कम होगा और मौसम पर निर्भरता भी घटेगी.

कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि इस बदलाव से अब अधिक किसानों को अनुदान का फायदा मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि पहले जहाँ केवल 40 किसान ही इस योजना से जुड़ पा रहे थे, अब यह संख्या बढ़कर 54 हो जाएगी, यानी 14 अतिरिक्त किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे. उन्होंने आगे कहा कि नियंत्रित वातावरण में खेती करने से फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, बाजार में अच्छा भाव मिलता है, और किसानों की सालाना आय में बढ़ोतरी संभव है. यह बदलाव खेती को व्यवसायिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.

सरकार द्वारा दी जा रही अनुदान दर किसानों के लिए एक बड़ी राहत है. लघु, सीमांत और एससी-एसटी वर्ग के किसानों को पॉलीहाउस और शेडनेट निर्माण पर 70 प्रतिशत तक अनुदान मिल रहा है, जबकि सामान्य वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. इससे किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है. किसान कम पूंजी में आधुनिक ढांचा तैयार कर सकते हैं और खेती से मिलने वाले मुनाफे को तेजी से बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि योजना के लिए आवेदन की संख्या लगातार बढ़ रही है.
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भीलवाड़ा जिले में पहले से ही पॉलीहाउस और शेडनेट में खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और डच रोज़ जैसी फसलों की खेती तेजी से बढ़ रही है. इन फसलों की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है और नियंत्रित तापमान व नमी में इनका उत्पादन अधिक होता है. साधारण खेती की तुलना में यहाँ प्रति वर्ग मीटर उत्पादन कई गुना ज्यादा मिलता है. इससे किसानों को कम ज़मीन में अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिल रहा है और खेती आधुनिक स्वरूप ले रही है.

किसानों को इस योजना का पूरा लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए. सबसे पहले, उन्हें अपने खेत की उपलब्ध भूमि और जल संसाधन का सही आकलन करना चाहिए. इसके बाद, उद्यान विभाग या कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उस फसल का चयन करें जो पॉलीहाउस या शेडनेट के लिए सबसे उपयुक्त हो. साथ ही, समय पर आवेदन करें, सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे रखें, और तकनीकी प्रशिक्षण ज़रूर लें, ताकि संरचना का सही उपयोग हो सके और उत्पादन में कोई कमी न रहे.

सरकार का यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने, खेती को तकनीक से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर पैदा करने वाला साबित होगा. यदि किसान सही योजना, प्रशिक्षण और बाज़ार की समझ के साथ इस योजना को अपनाते हैं, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि लाभ का एक मज़बूत माध्यम बन सकती है. पॉलीहाउस और शेडनेट आधारित खेती आने वाले समय में भीलवाड़ा जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.
First Published :
December 15, 2025, 09:50 IST
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किसानों के लिए खुशखबरी: पॉलीहाउस और शेडनेट लगाना अब हुआ आसान, जानें कैसे लें..



