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राजस्थान में विधायकों को कितना मिलता है विधायक कोष, किस-किसमें किया जा सकता है खर्च? जानें सबकुछ

Last Updated:December 15, 2025, 15:59 IST

Rajasthan News : राजस्थान में विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली राशि में कमीशनखोरी का खुलासा होने के बाद सूबे की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. राजस्थान में प्रत्येक विधायक को अपने-अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाने के लिए प्रतिवर्ष पांच-पांच करोड़ रुपये राशि दी जाती है. जानें पहले यह कितना मिलती थी. कब इसमें बढ़ोतरी हुई.राजस्थान में विधायकों को कितना मिलता है विधायक कोष? किसमें कर सकते हैं खर्चराजस्थान में विधायकों को प्रति वर्ष पांच करोड़ रुपये विधायक निधि में मिलते हैं.

जयपुर. अगर बाड़ ही खेत को खाने लग जाए तो फिर क्या कीजिएगा? आप समझ गए होंगे कि हमारा इशारा किधर है. राजस्थान की सबसे बड़ी पंचायत यानी विधानसभा में चुनकर आने वाले जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने इलाके में विकास कार्य के लिए सरकार की ओर से प्रति वर्ष पांच-पांच करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि दी जाती है. इस धनराशि से विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में जरूरत और मन मुताबिक विकास के कार्य करवा सकता है. इसे विधायक कोष या विधायक निधि नाम दिया गया है. लेकिन जब इस विधायक कोष पर विधायक ही डाका डालने लग जाए तो फिर इसकी रखवाली कौन करेगा?

राजस्थान में एक दिन पहले ही एक अखबार ने बीजेपी के खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा, कांग्रेस की हिंडौन विधायक अनिता जाटव और भरतपुर के बयाना की निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत का स्टिंग ऑपरेशन कर इस विधायक कोष में से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में कमीशन लिए जाने का खुलासा किया है. इस खुलासे के बाद सूबे की सियासत में हलचल मची हुई है. सत्तारूढ़ पार्टी, विपक्षी पार्टी और निर्दलीय विधायक के इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद अब इस मामले की जांच की जा रही है. बीजेपी और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर जांच कर रही है. वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने भी यह मामला सदाचार कमेटी को सौंपा है. सीएमओ ने भी इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई है.

2.25 करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ की गई थीदरअसल राजस्थान में पिछली सरकार तक विधायक निधि में प्रत्येक विधायक को अपने इलाके में काम कराने के लिए सालाना 2.25 करोड़ रुपये की राशि मिलती थी. लेकिन पूर्ववर्ती गहलोत कांग्रेस सरकार ने साल 2021 में इसमें इजाफा कर दिया था. 18 मार्च 2021 को बजट पास होने के पहले विधायकों की मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया था. सत्ता पक्ष और विपक्ष समेत विधानसभा के तमाम सदस्यों ने इस राशि को बढ़ाने की एक साथ मांग रखी थी.

पहले साल कोविड कंट्रोल के लिए खर्च की गई थी राशिविधायकों की इस मांग का समर्थन तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने भी किया था. उसके बाद विधायक निधि को 2021 से कुछ शर्तों के साथ बढ़ाया गया था. उस समय देश दुनिया कोविड की चपेट में थी. लिहाजा इसके चलते विधायक निधि को खर्च करने की रूपरेखा सरकार के स्तर पर तय की गई. 5 करोड़ में से 3 करोड़ रुपए फ्री वैक्सीनेशन दिए जाने पर सहमति बनी. शेष 2 करोड़ की राशि में से 1 करोड़ रुपये विधानसभा क्षेत्र में चिकित्सा से जुड़े आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के कार्यों में खर्च किया जाना तय किया गया.

30 से 40 फीसदी की कमीशनखोरी!वहीं 25 लाख की राशि कोविड महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने के कार्यों पर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में खर्च की गई. इस राशि से राज्य सरकार की ओर से लागू कर्फ्यू, लॉकडाउन, जनअनुशासन पखवाड़ा के दौरान जरुरतमंद तबके को भोजन आदि के लिए भी इस राशि को खर्च किया गया. यह राशि राज्य स्तर से ही मुख्यमंत्री सहायता कोष-कोविड 19 राहत कोष में जमा कराई गई थी. उसके बाद यह विधायक को प्रति वर्ष पांच करोड़ करोड़ की राशि मिलने लगी थी. लेकिन इसी राशि में से 30 से 40 फीसदी कमीशनखोरी की बात सामने आने के बाद सियासत में भूचाल मच गया है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें

Location :

Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

December 15, 2025, 15:59 IST

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राजस्थान में विधायकों को कितना मिलता है विधायक कोष? किसमें कर सकते हैं खर्च

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