सीकर के पंकज कुमावत ने चंदन की खेती में बनाया नया रिकॉर्ड

सीकर. जिले के रघुनाथगढ़ गांव में रहने वाले युवा पंकज कुमावत ने खेती को लेकर एक नई मिसाल पेश की है. आमतौर पर जहां इस इलाके में बाजरा, सरसों और गेहूं की खेती होती है, वहीं पंकज चंदन जैसे कीमती पेड़ उगा रहे हैं. यह खास बात इसलिए है क्योंकि चंदन के पेड़ मुख्य रूप से दक्षिण भारत की जलवायु में ही उगते हैं, लेकिन पंकज ने इसे राजस्थान की रेतीली जमीन में उगाकर खेती में नवाचार किया है.
पंकज कुमावत पहले पेशे से फार्मासिस्ट थे और अपनी नौकरी से जुड़े हुए थे, पंकज ने लॉकडाउन के दौरान खुद का कोई कारोबार शुरू करने का फैसला किया. इसी दौरान उन्हें चंदन की खेती का आइडिया आया, उन्होंने खुद का कारोबार शुरू करने का मन बनाया और इंटरनेट, कृषि विशेषज्ञों और किसानों से जानकारी जुटाई. शुरुआत में लोगों ने उन्हें मना भी किया, लेकिन पंकज ने जोखिम उठाया और खेती के इस नए प्रयोग की शुरुआत की.
300 चंदन के पेड़ लगाए
पंकज बताते हैं कि उन्होंने साल 2022 में अपने खेत में करीब 300 चंदन के पेड़ लगाए थे, कड़ी मेहनत और सही देखभाल के चलते आज इनमें से लगभग 270 पेड़ अच्छे से ग्रो कर रहे हैं. पेड़ों की सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रिप सिस्टम लगाया है, जिससे रोज करीब दो घंटे पानी दिया जाता है. इससे पानी की बचत भी होती है और पौधों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है.
दीमक की समस्या का ये समाधान किया
चंदन की खेती करने वाले पंकज ने बताया कि राजस्थान की मिट्टी में दीमक की समस्या ज्यादा होती है, जो पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने फंगीसाइड और जरूरी सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया है. वे समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते हैं, ताकि किसी भी बीमारी या कीट का असर पहले ही रोका जा सके. पंकज बताते हैं कि चंदन का पेड़ धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन अगर शुरुआती सालों में सही देखभाल हो जाए, तो आगे चलकर यह बहुत अच्छा परिणाम देता है और चंदन का पेड़ लगभग 15 साल में तैयार हो जाता है.
नर्सरी खोलने का विचार
पंकज के इस सफल प्रयोग के बाद गांव के कई किसान और युवा चंदन की खेती को लेकर जागरूक हुए हैं. लोग उनसे सलाह ले रहे हैं और खुद भी चंदन के पेड़ लगाने की योजना बना रहे हैं. पंकज का कहना है कि किसानों को चंदन के पौधे कम कीमत में मिल सकें, इसके लिए वे आगे चलकर नर्सरी खोलने का विचार कर रहे हैं. इससे किसानों को सही पौधे मिलेंगे और क्षेत्र में नई तरह की खेती को बढ़ावा मिलेगा.
10 हजार प्रति किलो बिकती है चंदन की लकड़ी
पंकज बताते हैं कि चंदन का पेड़ करीब 15 साल में तैयार हो जाता है और बाजार में इसके भाव काफी अच्छे मिलते हैं. उनका कहना है कि बाजार में चंदन की लकड़ी और इसके तेल की कीमत लगभग 10,000 रुपये प्रति किलो तक होती है और एक चंदन का पेड़ लगभग 5 लाख रुपये तक का हो सकता है. पंकज युवाओं को संदेश देते हैं कि निराश होने के बजाय नए प्रयास करें. वे यह भी बताते हैं कि शेखावाटी क्षेत्र में नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल उगाना भी फायदे का सौदा है.



