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कपिल श्रीमाली/उदयपुर. बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आखिरकार सलाखों के पीछे भेज दिया गया है. पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को दोनों को उदयपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां लंबी कानूनी बहस के बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए. इसके साथ ही विक्रम भट्ट की रात अब उदयपुर सेंट्रल जेल में कटेगी. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि कानूनी और कारोबारी हलकों में भी हलचल मचा दी है.

उदयपुर के चर्चित डॉक्टर और इंदिरा आईवीएफ ग्रुप के संस्थापक डॉ. अजय मुर्दिया से जुड़े इस मामले में पुलिस पहले ही विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर लाई थी. इसके बाद अदालत से दोनों की सात दिन की पुलिस रिमांड ली गई थी. इस दौरान उनसे लगातार पूछताछ की गई. रिमांड अवधि खत्म होने पर सोमवार दोपहर बाद पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.

कोर्ट में जमानत को लेकर हुई लंबी बहसअदालत में पेशी के दौरान विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट की ओर से अधिवक्ताओं ने दो अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए. पहला आवेदन न्यायिक अभिरक्षा का विरोध करते हुए जमानत के लिए था, जबकि दूसरा आवेदन विक्रम भट्ट की खराब सेहत का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत और निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति को लेकर दिया गया. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि विक्रम भट्ट की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा की जरूरत है.

डॉ. अजय का ओर से अधिवक्ताओं ने क्या कहा?वहीं डॉ. अजय मुर्दिया की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि सरकारी अस्पतालों में भी अनुभवी और योग्य डॉक्टर उपलब्ध हैं और आरोपी को वहीं समुचित इलाज मिल सकता है. साथ ही यह भी कहा गया कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है, ऐसे में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और बाद में अंतिम जमानत और अंतरिम जमानत दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया. इसके साथ ही विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश सुना दिया गया.

30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामलापूरा मामला फिल्म निर्माण के नाम पर की गई कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है. आरोप है कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने डॉ. अजय मुर्दिया की दिवंगत पत्नी पर बायोपिक और अन्य फिल्मों के निर्माण का झांसा देकर करीब 30 करोड़ रुपये की राशि ली. शिकायत के अनुसार बड़े मुनाफे और कई फिल्मों के निर्माण का वादा किया गया था, लेकिन तय समय पर न तो फिल्में बनाई गईं और न ही निवेश की गई रकम का हिसाब दिया गया.

पुलिस ने रिमांड के दौरान वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहन जांच की है. अब न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने के बाद आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.

उदयपुर सेंट्रल जेल में रहेंगे विक्रम भट्ट
कोर्ट के आदेश के बाद विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट को सीधे उदयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया. बॉलीवुड के एक नामचीन फिल्म निर्माता का इस तरह जेल पहुंचना इस मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ले आया है. आने वाले दिनों में हाईकोर्ट में संभावित सुनवाई और आगे की जांच से यह तय होगा कि इस हाई प्रोफाइल मामले में आगे क्या मोड़ आता है. फिलहाल विक्रम भट्ट के लिए यह रात सलाखों के पीछे बीतने वाली है.

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