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किडनी स्टोन से परेशान हैं? दवा नहीं, ये देसी आदतें और आयुर्वेदिक नुस्खे चुपचाप कर देंगे पथरी बाहर!

किडनी स्टोन का देसी इलाज: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम में इतने उलझ गए हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान देना ही भूल जाते हैं. न समय पर पानी पीना, न सही खाना और ऊपर से घंटों कुर्सी पर बैठे रहना इन्हीं वजहों से किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी अब आम समस्या बनती जा रही है. कई बार तो लोगों को तब पता चलता है, जब तेज दर्द शुरू हो जाता है.

आयुर्वेद में पथरी को अश्मरी कहा गया है. राहत की बात यह है कि अगर पथरी शुरुआती स्टेज में हो, तो सही खानपान, दिनचर्या और कुछ देसी उपायों से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

Local 18 से बातचीत में डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ने पर शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं. ये टॉक्सिन्स धीरे-धीरे मूत्र मार्ग में इकट्ठा होकर पथरी का रूप ले लेते हैं. अगर समय रहते शरीर को डिटॉक्स किया जाए और गलत आदतें सुधारी जाएं, तो पथरी की परेशानी बढ़ने से रोकी जा सकती है.

पानी है सबसे सस्ती और असरदार दवापथरी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है भरपूर पानी पीना. रोज कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पिएं. पानी शरीर को साफ रखने में मदद करता है और पथरी बनने की रफ्तार को धीमा करता है. सुबह उठते ही 1–2 गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालना और भी फायदेमंद माना जाता है.

खानपान में ये गलती न करेंडॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार पथरी की समस्या में कुछ चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है. पालक, चॉकलेट, मूंगफली, टमाटर के बीज और ज्यादा नमक वाले खाने में ऑक्सलेट की मात्रा ज्यादा होती है, जो पथरी बढ़ा सकती है. इसके बजाय मौसमी फल, हल्की सब्जियां, दालें और फाइबर युक्त भोजन लें. खाना हमेशा समय पर और हल्का रखें, ताकि पाचन ठीक बना रहे.

ये देसी ड्रिंक दे सकते हैं राहतआयुर्वेद में कुछ प्राकृतिक पेय पथरी में बेहद असरदार माने जाते हैं.नींबू पानी पथरी बनने से रोकने में मदद करता है.नारियल पानी शरीर को ठंडक देता है और मूत्र मार्ग को साफ रखता है.खीरे का रस पानी की कमी पूरी करता है.तुलसी के पत्तों का रस और बेल का शरबत भी मूत्र से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माने जाते हैं.

लाइफस्टाइल बदले बिना नहीं मिलेगी राहतसिर्फ दवा या नुस्खों से ही नहीं, बल्कि दिनचर्या सुधारने से भी पथरी में आराम मिलता है. रोज थोड़ी देर वॉक करें, योग और प्राणायाम अपनाएं. ज्यादा देर एक जगह बैठे रहने से बचें और तनाव कम करें. ध्यान और गहरी सांस लेने से शरीर का संतुलन बना रहता है.

आयुर्वेदिक दवाओं की भूमिकाडॉक्टर की सलाह से गोखरू, पुनर्नवा, वरुण, पत्थरचट्टा और शिलाजीत जैसी आयुर्वेदिक औषधियां ली जा सकती हैं. अश्मरीहर क्वाथ और पुनर्नवा मंडूर जैसे नुस्खे भी डॉक्टर की निगरानी में फायदेमंद हो सकते हैं.

जरूरी चेतावनीअगर दर्द बहुत ज्यादा हो, पेशाब में जलन या खून आए, उल्टी हो या बुखार आए, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें. घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय हमेशा एक्सपर्ट की सलाह के साथ ही अपनाएं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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