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Best Trees to Plant on Farm Borders for Profit | Farmers News India.

Last Updated:December 21, 2025, 06:59 IST

Benefits Of Planting Neem, Karanj, And Shisham: करौली के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेत की मेड़ पर नीम, करंज और शीशम के पेड़ लगाने की सलाह दी है. नीम और करंज प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में फसल की रक्षा करते हैं और मिट्टी के कटाव को रोकते हैं. वहीं, शीशम की कीमती लकड़ी भविष्य में किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ देती है. यह मॉडल न केवल खेती की लागत कम करता है, बल्कि जैव विविधता और नमी बनाए रखकर उत्पादन क्षमता में भी सुधार करता है.

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कीटों और मिट्टी की चिंता छोड़ें: खेत की मेड़ पर लगाएं बस ये 3 पेड़ और आपकी....किसानों के लिए मुनाफे का सौदा: मेड़ पर लगाएं ये 3 पेड़, कीटनाशक का खर्च बचेगा और लकड़ी से होगी लाखों की आय

करौली. आधुनिक खेती के दौर में अब किसानों की आमदनी केवल फसल तक सीमित नहीं रही है. खेती में लागत घटाने और प्राकृतिक सुरक्षा चक्र तैयार करने के लिए विशेषज्ञों ने एक प्रभावी तरीका सुझाया है. करौली के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेत की खाली पड़ी मेड़ों पर नीम, करंज और शीशम जैसे उपयोगी पेड़ लगाकर किसान न केवल अपनी फसल को सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) जैसा मजबूत आर्थिक स्रोत भी तैयार कर सकते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, खेत के चारों ओर लगाए गए ये पेड़ मिट्टी की सेहत सुधारने में जादुई भूमिका निभाते हैं. नीम और करंज की गहरी जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधकर रखती हैं, जिससे बारिश के दिनों में उपजाऊ मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) की समस्या खत्म हो जाती है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन पेड़ों के प्राकृतिक तत्व हानिकारक कीटों को फसल से दूर रखते हैं. इससे किसानों की रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत में भारी गिरावट आती है.

नीम और करंज: फसल के प्राकृतिक अंगरक्षकनीम का पेड़ किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसकी पत्तियां, बीज (निंबोली) और तेल जैविक कीटनाशक बनाने के काम आते हैं. मेड़ पर नीम होने से हवा के जरिए फैलने वाले कई रोग फसल तक नहीं पहुँच पाते. वहीं, करंज का पेड़ भी प्राकृतिक कीट नियंत्रण में सहायक है. गर्मी के मौसम में इन पेड़ों की सघन छाया फसलों को भीषण लू और बढ़ते तापमान से बचाकर नमी बरकरार रखने में मदद करती है.

शीशम: भविष्य का बड़ा निवेशजहाँ नीम और करंज फसल की रक्षा करते हैं, वहीं शीशम को दीर्घकालिक निवेश माना जाता है. शीशम की लकड़ी की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि 10 से 15 वर्षों में शीशम के पेड़ किसानों को लाखों-करोड़ों का आर्थिक लाभ पहुँचा सकते हैं. शुरुआती वर्षों में यह छाया और सुरक्षा प्रदान करता है और परिपक्व होने पर इसकी कीमती लकड़ी किसान की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल देती है.

विशेषज्ञों की राय: टिकाऊ खेती का आधारकृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वी. डी. शर्मा का कहना है कि खेत की सीमा पर वृक्षारोपण करने से जैव विविधता बढ़ती है और पर्यावरण का संतुलन बना रहता है. इससे खेत की मिट्टी में नमी लंबे समय तक टिकी रहती है, जिससे उत्पादन क्षमता में सुधार होता है. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इन पेड़ों का चुनाव करें और सही देखभाल के साथ इनका रोपण करें. यह कदम खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Karauli,Karauli,Rajasthan

First Published :

December 21, 2025, 06:59 IST

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