राजस्थान में पहली बार पुलिस ने ही खोली अपने थानेदारों की पोल, DGP ने बंद किए सिस्टम के सुराख

Last Updated:December 23, 2025, 10:48 IST
Rajasthan Police News : राजस्थान पुलिस हेडक्वार्टर ने पहली बार एक साथ बड़ा ‘डिकॉय ऑपरेशन’ कर अपने ही फोर्स के कारनामों का बड़ा खुलासा किया है. इस डिकॉय ऑपरेशन में इस बात की पड़ताल की गई कि किस तरह से पुलिस अवैध बजरी खनन माफियाओं को ‘प्रोटेक्ट’ कर रही है. पुलिस की जाल में उसके अपने 11 थानाप्रभारी फंस गए. ये थानाप्रभारी बजरी माफियाओं के लिए काम करते हुए मिले. इस पर डीजीपी राजीव शर्मा ने इनमें से पांच एसएचओ को सस्पेंड कर दिया और छह को लाइन हाजिर कर दिया गया है.
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DGP राजीव शर्मा ने पांच थानाप्रभारियों को सस्पेंड कर दिया है और 6 को लाइन हाजिर कर दिया है.
जयपुर. राजस्थान में बजरी खनन का मुद्दा नया नहीं है बल्कि बरसों से ये सूबे की फिजाओं में गूंजता रहा है. अवैध रूप से बजरी खनन का यह मामला सड़कों से लेकर राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहा है. अवैध बजरी खनन और खनन माफिया हर चुनाव में अक्सर मुद्दा बनते हैं. सड़कों पर इसको लेकर घमासान होता रहा है. अवैध बजरी खनन के कारण बिगड़ती कानून व्यवस्था भी किसी से छिपी नहीं है. इसमें बजरी माफिया और पुलिस की मिलीभगत के कई बार सबूत आमजन दे चुकी है लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पहली बार पुलिस मुख्यालय ने पहल करते हुए ‘डिकॉय ऑपरेशन’ कर पुलिस की पोल खुद ही खोली है. इसका परिणाम सबके सामने है. सीधे तौर पर 11 थानाप्रभारियों और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका में इसमें सामने आई. इस पर डीजीपी के निर्देश पर पांच एसएचओ को सस्पेंड और 6 को लाइन हाजिर कर दिया गया. पीएचक्यू की यह कार्रवाई आमजन को सुकून पहुंचाने वाली है.
राजस्थान में बजरी खनन माफियाओं के सड़कों पर तेज स्पीड में दौड़ते ओवरलोड डंपर न जानें कितने ही लोगों की जिंदगी को अपने चक्कों के नीचे चकनाचूर कर चुके हैं. कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर कई बार बड़ा संकट खड़ा कर चुके हैं. राजस्थान और अवैध बजरी खनन दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. राजस्थान में बजरी माफिया ने अवैध बजरी खनन कर मरुधरा की कई नदियों के पेटे खाली कर दिए. बजरी के लिए कई पहाड़ी इलाकों को खोखला कर डाला. बजरी के लिए वहां से सॉफ्ट पत्थरों खनन कर धरती की सूरत ही बिगाड़ डाली. राजस्थान की सरजमीं में इतने बड़े-बड़े गड्डे कर दिए कि उनको बरसों तक नहीं भरा जा सकता है. मोटी कमाई के लिए राजस्थान की धरती को जगह-जगह से छलनी कर डाला.
कई ईमानदार पुलिस और प्रशासिनक अधिकारी पिट चुके हैंप्रशासन की नजरों से बचने के लिए माफियाओं के बजरी से भरे डंपर सड़कों पर इस तरह दौड़ते हैं कि कई राहगीर अकाल मौत के शिकार हो गए. इसके चलते आए दिन सड़कें और हाईवे जाम होना आम बात रही है. यहां तक कि कई ईमानदार पुलिस, प्रशासनिक और खान विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी इन खनन माफियाओं के शिकार हो चुके हैं. इन्हें रोकने की कोशिश करने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पिट चुके हैं. कई जगह बवाल मच चुके हैं. कानून व्यवस्था खराब हो चुकी है. धरने-प्रदर्शन और जाम के हालात बन चुके हैं.
पुलिस की ‘मिलीभगत’ और ‘बंधी’ सिस्टम का खेलहर बार ठोस कार्रवाई का आश्वासन मिलता रहा. जबकि यह सब कुछ खनन वाले इलाकों में पुलिस की ‘मिलीभगत’ और ‘बंधी’ सिस्टम से बदस्तूर जारी रहा. मिलीभगत वाले पुलिसकर्मी उसी हनक के साथ अपने खेल खेलते रहे. पहली बार पीएचक्यू ने अपने ही फोर्स में हो रहे सुराखों को ढूंढने के लिए ‘डिकॉय आपॅरेशन’ चलाया तो पूरी पिक्चर एक झटके में क्लियर हो गई. अवैध बजरी खनन को बजरी माफियाओं के साथ अपनी कमाई का जरिया बनाने वाले थानेदार खुद के विभाग के जाल में फंस गए. कहने को पुलिस विभाग और खनन विभाग पहले भी अपने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ छोटी-मोटी कार्रवाई करने का दावा करता रहा है. लेकिन उनके इस दावे की हवा उनके अपने लोग ही निकालते रहे हैं.
पीएचक्यू ने ढूंढे अपनी फोर्स में गद्दारी के सुराखबजरी माफियाओं के खिलाफ तो कुछ कार्रवाइयां हुई लेकिन सिस्टम को खोखला करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई. वे अपनी मूंछों पर यूं ही ताव देते रहे. सूबे के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राजीव शर्मा ने पहल करते हुए सिस्टम के सुराख ढूंढने के लिए डिकॉय ऑपेरशन करवाया तो जो सच्चाई सामने आई उससे वे खुद हैरान रह गए. पुलिस किस तरह से मिलीभगत कर बजरी माफियाओं को पनपा रही थी. वह खुद ही उसे चोर रास्ते बता रही थी. इसके साथ ही उनकी अपनी फोर्स ही बजरी माफियाओं पर लगाम लगाने की पीएचक्यू की प्लानिंग भी उन तक पहुंचा रही थी. पुलिस की वर्दी में ये थानेदार पुलिस महकमे के लिए नहीं बल्कि बजरी माफियाओं के लिए काम कर रहे थे. प्रदेशभर में पुलिस ने पुलिस के खिलाफ ही यह डिकॉय ऑपरेशन 18 और 19 दिसंबर को चलाया गया था.
पुलिस ही माफियाओं को नए-नए चोर रूट सुझा रही थीDGP राजीव शर्मा के निर्देशों के बाद डिकॉय ऑपरेशन किया गया तो कड़वा सच सामने आ गया. एडीजी (विजीलेंस) के मुताबिक अवैध बजरी के खेल में कई थाने के थानेदार और वहां का स्टाफ माफियाओं के लिए काम रहे थे. ये माफियाओं को नए-नए रूट सुझा रहे थे. बजरी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की पुलिस मुख्यालय की प्लानिंग को लीक कर रहे थे. अवैध बजरी से भरे ट्रकों को नाकाबंदी से बिना जांच पड़ताल के पास कर रहे थे. विजीलेंस की रिपोर्ट के बाद डीजीपी राजीव शर्मा ने सख्त एक्शन लेते हुए पांच थानाप्रभरियों को सस्पेंड कर दिया और छह को थानों से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया.
कई जिलों के एसपी की मॉनिटरिंग और कार्यशैली पर भी सवालों के घेरे में हैबजरी माफियाओं से मिलीभगत में करीब एक दर्जन थानाधिकारी लिप्त पाए गए हैं. इनमें जयपुर के शिवदासपुरा के एसएचओ सुरेन्द्र सैनी, अजमेर के पीसांगन के प्रहलाद सहाय, टोंक के पीपलू के रघुवीर सिंह, बरौनी के बिजेन्द्र सिंह और धौलपुर कोतवाली SHO बृजेश मीना को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं भीलवाड़ा के गुलाबपुरा के थानाप्रभारी हनुमान सिंह, कोटा के कुन्हाड़ी के मांगीलाल तथा नांता के चेतन शर्मा, दौसा के लालसोट एसएचओ श्रीकृष्ण मीणा, जोधपुर के लूणी थानाप्रभारी हनुमंत सिंह और चित्तौड़गढ़ के गंगरार थाने के प्रभारी दुर्गाप्रसाद दाधीच को थाने से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया गया है. डिकॉय ऑपरेशन के दौरान कई जिलों के एसपी की मॉनिटरिंग और कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए हैं. उनकी भी गहनता से जांच की जा रही है. पीएचक्यू की इस कार्रवाई के बाद थानाप्रभारियों में हड़कंप मचा हुआ है.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 23, 2025, 10:48 IST
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राजस्थान: पहली बार पुलिस ने ही खोली अपने थानेदारों की पोल, क्यों करना पड़ा ऐसा



