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Last Updated:December 26, 2025, 11:00 IST
Aravali Hills Conservation: उदयपुर के प्रो. डॉ. इकबाल सक्का ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर अनोखी पहल की है. उन्होंने चांदी में विश्व की सबसे छोटी अरावली माला बनाकर पर्यावरण संकट की ओर ध्यान खींचा है. यह सूक्ष्म कलाकृति अरावली के क्षरण और संरक्षण की जरूरत को दर्शाती है. डॉ. सक्का ने सरकार से अरावली को संरक्षित करने की अपील करते हुए कहा कि कला के माध्यम से पर्यावरण चेतना जगाना समय की आवश्यकता है.
उदयपुर: विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली को बचाने के लिए उदयपुर के प्रसिद्ध स्वर्णकार शिल्पी वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर प्रोफेसर डॉक्टर इक़बाल सक्का ने एक अनोखी पहल की है. उन्होंने चांदी से विश्व की सबसे छोटी अरावली पर्वतमाला का सूक्ष्म मॉडल बनाकर केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार से इसके संरक्षण की अपील की है.यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक रचनात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है.
डॉ. सक्का द्वारा तैयार की गई यह सूक्ष्म अरावली माला कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है. महज 3 मिलीमीटर आकार की इस कलाकृति में हरी-भरी पहाड़ियों के साथ-साथ रेतीले क्षेत्र को भी बेहद बारीकी से दर्शाया गया है.यह मॉडल इतना छोटा है कि इसे सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं है, इसके लिए विशेष लेंस की आवश्यकता होती है.
डॉ. सक्का ने बताया कि इस अनूठी अरावली माला को तैयार करने में उन्हें करीब 24 घंटे का समय लगा. इस दौरान उन्होंने पूरी एकाग्रता और धैर्य के साथ बेहद बारीक काम किया. चांदी से बनी यह सूक्ष्म पर्वतमाला न सिर्फ उनकी कला का प्रमाण है, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनकी चिंता को भी दर्शाती है.
उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए जीवन रेखा की तरह है.यह जल संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने, पर्यावरण संतुलन और जलवायु नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है. अरावली के कारण ही कई क्षेत्रों में हरियाली और प्राकृतिक संतुलन बना हुआ है.
अंधाधुंध दोहन से अरावली का अस्तित्व खतरे में पड़ गयाडॉ. सक्का ने चिंता जताई कि वर्तमान समय में खनन, अतिक्रमण और विकास के नाम पर हो रहे अंधाधुंध दोहन से अरावली का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
राजस्थान सरकार और न्यायपालिका से अपीलअपने इस कलात्मक प्रयास के जरिए डॉ. सक्का ने भारत सरकार, राजस्थान सरकार और न्यायपालिका से अपील की है कि अरावली से जुड़े अदालती फैसलों पर एक बार फिर गंभीरता से विचार किया जाए. उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं.
डॉ. सक्का ने कहा कि कला समाज को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम है. यदि उनकी यह छोटी-सी अरावली माला सरकार और समाज को अरावली संरक्षण के लिए सोचने और कदम उठाने के लिए प्रेरित कर पाती है, तो यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Location :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
December 26, 2025, 11:00 IST
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अरावली बचाने की अपील! सूक्ष्म कला के ज़रिये डॉ. सक्का ने जगाई पर्यावरण चेतना



