डायबिटीज से कमजोरी तक में रामबाण है दाल, बस खाने का तरीका सही होना चाहिए, जानें किस बीमारी में कौन सी खाएं

Last Updated:December 28, 2025, 09:28 IST
Health Tips: दालें भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं और सेहत के लिए बेहद जरूरी भी. डॉक्टर जावेद सिद्दीक के अनुसार अलग-अलग दालें अलग स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद होती हैं. मूंग दाल पाचन के लिए हल्की होती है, मसूर दाल खून की कमी में सहायक है, चना दाल डायबिटीज में लाभ देती है, जबकि अरहर और उड़द दाल कमजोरी दूर कर शरीर को ऊर्जा देती हैं. सही दाल का चयन और सीमित तड़का सेहत को बेहतर बना सकता है.
दालें भारतीय भोजन का अहम हिस्सा रही हैं, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल और जंक फूड के कारण लोग इन्हें कम खाने लगे हैं. जबकि डॉक्टर जावेद सिद्दीक के अनुसार दालें शरीर को जरूरी प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स देती हैं. मूंग दाल पाचन के लिए हल्की और फायदेमंद है. मसूर दाल खून की कमी में सहायक होती है. अरहर दाल कमजोरी दूर करती है. चना दाल डायबिटीज में लाभकारी मानी जाती है और उड़द दाल हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली दालें सबसे बेहतर मानी जाती हैं. डॉक्टरों के अनुसार चना दाल, मूंग दाल और मसूर दाल शुगर कंट्रोल में मदद करती हैं. ये दालें खून में ग्लूकोज का स्तर अचानक नहीं बढ़ातीं और शरीर को भरपूर प्रोटीन भी देती हैं. नियमित रूप से इन दालों का सेवन करने से ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी नहीं आती. डायबिटीज रोगियों को अरहर दाल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इसका असर शुगर लेवल पर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है.

हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल की समस्या में हल्का और फाइबर युक्त भोजन बेहद जरूरी माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार मूंग दाल और मसूर दाल हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं. ये दालें पचने में हल्की होती हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती हैं. मसूर और चना दाल में भरपूर फाइबर पाया जाता है, जिससे रक्त वाहिनियों पर दबाव कम पड़ता है. नियमित रूप से इन दालों का सेवन करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है.
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पाचन की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जरूरी होता है. डॉक्टरों के अनुसार छिलके वाली मूंग दाल पेट के लिए सबसे फायदेमंद मानी जाती है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. यह दाल गैस, अपच और पेट दर्द की समस्या को कम करने में मदद करती है. कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों के लिए मूंग दाल का सेवन राहत देने वाला होता है. नियमित रूप से इसे खाने से पेट हल्का रहता है और पाचन तंत्र मजबूत बनता है.

शारीरिक कमजोरी और लगातार थकान की समस्या में पोषक तत्वों से भरपूर दालों का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार अरहर और उड़द की दाल इस स्थिति में सबसे बेहतर विकल्प हैं. इन दालों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करती हैं और हड्डियों को मजबूती देती हैं. नियमित सेवन से ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और कमजोरी धीरे धीरे दूर होने लगती है.

दालों का सही लाभ लेने के लिए उनके सेवन की विधि पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. अक्सर स्वाद बढ़ाने के लिए दाल में ज्यादा तेल, घी और मसालों का तड़का लगाया जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. डॉक्टरों के अनुसार दाल को कम मसालों के साथ साधारण तरीके से उबालकर खाना सबसे बेहतर होता है. यदि तड़का लगाना जरूरी हो तो बहुत कम मात्रा में घी या तेल का इस्तेमाल करें. इससे दाल के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और शरीर को पूरा लाभ मिलता है.
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December 28, 2025, 09:28 IST
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Health Tips: दाल सिर्फ खाना नहीं, दवा भी है, जानें किस बीमारी में कौन सी खाएं



